इजराइल में आम चुनाव के बाद वोटों की गिनती का काम लगभग पूरा होने की कगार पर है, लेकिन देश में सत्ता की तस्वीर अब भी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी को चुनाव में तगड़ा झटका लगा है, वहीं विपक्षी दल उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए लामबंद हो रहे हैं। इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों का रहा है। इन्होंने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इजराइल में पहली बार विरोधी दल मिलकर अरब पार्टियों के समर्थन से नई सरकार बनाएंगे?
25 साल में सबसे ज्यादा 78% मतदान
इस चुनाव में पिछले 25 से अधिक वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए लगभग 78 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वोटिंग का ये आंकड़ा 1999 के बाद से सबसे अधिक है। चुनाव परिणामों में नेतन्याहू के गठबंधन के प्रति आम जनता की नाराजगी और लंबे समय से चले आ रहे युद्ध से थकी जनता का गुस्सा साफ नजर आया। इसके साथ ही अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी आबादी को सैन्य सेवा से मिली छूट को लेकर भी लोगों में भारी गुस्सा था। हालांकि परिणाम यह भी दिखाते हैं कि विरोधी दल 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले के बाद पैदा हुए जनआक्रोश का पूरी तरह से फायदा उठाने में नाकाम रहे।
वोटों की गिनती में किसे कितना मिला समर्थन?
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग द्वारा 85 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी किए जाने तक के आंकड़े सामने आए हैं। इसमें लिकुड पार्टी (बेंजामिन नेतन्याहू) को 20.8 प्रतिशत वोट मिले मिले हैं। 2022 के पिछले चुनाव में लिकुड को 23.4 प्रतिशत वोट मिले थे, यानी इस बार उनके वोट शेयर में गिरावट आई है। नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी एसेनकोट की यशर पार्टी को 16.1 प्रतिशत वोट मिले हैं। अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गिने गए वोटों का 14.9 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया है।
आपको बता दें कि इजराइल में मतदाता व्यक्तियों को नहीं बल्कि पार्टियों को चुनते हैं। 120 सीटों वाली इजराइली संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों का आंकड़ा होना जरूरी है, लेकिन फिलहाल न तो नेतन्याहू के गठबंधन और न ही एसेनकोट के विरोधी गठबंधन के पास बहुमत का आंकड़ा बनता दिख रहा है।
नेतन्याहू का रुख: अरब पार्टियों से गठबंधन को बताया खतरनाक
लगातार 17 सालों से सत्ता पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू ने अरब पार्टियों का समर्थन लेने या उनके साथ मिलकर काम करने की संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। नेतन्याहू ने चेतावनी देते हुए इसे खतरनाक सरकार करार दिया और कहा कि वे इन पार्टियों के साथ कोई हाथ नहीं मिलाएंगे। वहीं दूसरी ओर अरब पार्टियों ने भी नेतन्याहू के साथ किसी भी गठबंधन की बात से साफ इनकार कर दिया है।
क्या गादी एसेनकोट अरब पार्टियों संग बनाएंगे सरकार?
नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी एसेनकोट ने कुछ शर्तों के साथ अरब पार्टियों को गठबंधन में शामिल करने का विकल्प खुला रखा है। एसेनकोट की शर्त है कि अरब पार्टियों को इजराइल को एक यहूदी राष्ट्र के रूप में और हमास को एक चरमपंथी संगठन के रूप में मान्यता देनी होगी। विरोधी दल डेमोक्रेट्स के नेता यायर गोलान ने भी अरब पार्टियों को साथ लाने का समर्थन करते हुए कहा कि इजराइली और अरब वोटों के बीच नेतन्याहू के नस्ली विभाजन को अब और स्वीकार नहीं किया जा सकता। यूनाइटेड अरब लिस्ट के नेता मंसूर अब्बास ने उत्साहित होकर कहा कि हम यहां हैं और हम हाशिए पर नहीं हैं।
राष्ट्रपति हर्ज़ोग की अपील: दोबारा चुनाव से बचा जाए
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने चुनाव नतीजों के बीच अपील की है कि देश को एक और चुनाव की ओर धकेलने से बचाने के लिए सभी प्रयास किए जाने चाहिए। अगर गादी एसेनकोट या नेतन्याहू में से कोई भी दल 61 सीटों का बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो इजराइल को अगले साल की शुरुआत में एक बार फिर से आम चुनाव की ओर जाना पड़ सकता है। इससे पहले भी इजराइल में राजनीतिक गतिरोध की वजह से अप्रैल 2019 से नवंबर 2022 के बीच पांच बार चुनाव कराने पड़े थे।