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इजरायल में नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती, राष्ट्रपति ने गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का न्योता दिया, अब आगे क्या होगा?

Israel Political Crisis: इजरायल की राजनीति में 27 अक्टूबर के चुनावों के बाद भूचाल आ गया है! प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बहुमत पाने में नाकाम रहने पर राष्ट्रपति हर्जोग ने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का न्योता दिया है। लेकिन आइजेनकोट के लिए भी राह आसान नहीं है। 61 सांसदों का जादुई आंकड़ा जुटाने के लिए उन्हें अरब पार्टियों का रुख करना पड़ेगा

Edited By: Abhishek Guptaअपडेटेड Nov 08, 2026 पर 10:29 AM
इजरायल में नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती, राष्ट्रपति ने गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का न्योता दिया, अब आगे क्या होगा?
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इजरायल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन संसद में बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा है। इसके बाद राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट को अगली सरकार बनाने का मौका दिया है। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद यह पहली बार है जब किसी नेता को सरकार बनाने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी संसद में सबसे बड़ी अकेली पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उनके नेतृत्व वाला दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों का गठबंधन बहुमत के जरूरी आंकड़े तक नहीं पहुंच सका। दूसरी ओर आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास भी अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं। ऐसे में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के 19 सांसदों का समर्थन बेहद अहम हो गया है।

राष्ट्रपति से सरकार बनाने का न्योता मिलने के बाद आइजेनकोट ने कहा कि यह राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय है और वह यह साबित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे कि वे इस जिम्मेदारी के योग्य हैं। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक साथ लाकर 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना है।

इजरायल की संसद में किस गठबंधन को कितनी सीटें मिलीं?

इजरायल की 120 सदस्यीय संसद को नेसेट कहा जाता है। यहां किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। 27 अक्टूबर के चुनाव के बाद कोई भी राजनीतिक गठबंधन इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया। चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी अकेली पार्टी रही, लेकिन उनके नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के गठबंधन को कुल 53 सीटें मिलीं। वहीं गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें हासिल हुईं। इसके अलावा अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें जीतीं। इन पार्टियों ने राष्ट्रपति के सामने आइजेनकोट को अगली सरकार का नेतृत्व सौंपने की सिफारिश की। इसी समर्थन के आधार पर राष्ट्रपति हर्जोग ने उन्हें सरकार बनाने का पहला मौका दिया।

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