Russia Election 2026: रूस में पुतिन की पार्टी की फिर ऐतिहासिक जीत! संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया को भारी बहुमत, विपक्ष का सूपड़ा साफ

Russia Parliamentary Election 2026: रूसी संसदीय चुनाव में मतदान के बाद आए शुरुआती नतीजों के अनुसार, सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी देश के पहले युद्ध-कालीन संसदीय चुनाव जीतने की राह पर है। इस चुनाव के दौरान साइबर हमले और यूक्रेन के कई ड्रोन हमले भी हुए। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर सत्ता में वापसी करने जा रहे हैं

अपडेटेड Sep 21, 2026 पर 1:36 PM
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Russia Parliamentary Election 2026: व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर से रूस के राष्ट्रपति बन गए हैं

Russia Parliamentary Election 2026: रूस में यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी 'यूनाइटेड रशिया' ने एक बार फिर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस संसदीय चुनाव में पार्टी को करीब 58 फीसदी वोट मिले हैं। चुनाव में वास्तविक विपक्ष की मौजूदगी बेहद सीमित रही। रूसी सरकारी न्यूज एजेंसियों ने केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़ों के हवाले से बताया कि करीब 90 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक 'यूनाइटेड रशिया' को लगभग 58 प्रतिशत वोट मिले।

वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी करीब 13.84 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही। जबकि राष्ट्रवादी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को 8.9 प्रतिशत वोट मिले। आपको बता दें कि इस संसदीय चुनाव के दौरान साइबर हमले और यूक्रेन की तरफ से कई घातक ड्रोन हमले भी हुए।

दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की तैयारी


पुतिन की पार्टी 'यूनाइटेड रशिया' साल 2003 से संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा में बहुमत बनाए हुए है। मौजूदा नतीजों के आधार पर उसके पिछली संसद की तरह फिर से संवैधानिक बहुमत यानी दो-तिहाई से अधिक सीटें हासिल करने की संभावना है। 'स्टेट ड्यूमा' में कुल 450 सीटें हैं। इनमें से आधी सीटें पार्टी की लिस्ट के आधार पर और बाकी आधी सीटों पर एकल निर्वाचन क्षेत्रों में सीधे मुकाबले के जरिए चुनी जाती हैं। चुनाव आयोग के अनुसार मतदान प्रतिशत करीब 57 फीसदी रहा, जो 2021 के पिछले संसदीय चुनाव की तुलना में अधिक है।

'न्यू पीपल्स' भी 5 फीसदी की सीमा पार करने की ओर

कारोबार समर्थक पार्टी के रूप में खुद को पेश करने वाली 'न्यू पीपल्स' को करीब 7.94 फीसदी वोट मिले हैं। ऐसे में उसके भी संसद में लौटने की संभावना है। वहीं, वामपंथी पार्टी 'ए जस्ट रशिया' को मॉस्को समयानुसार सुबह 8 बजे तक 4.95 फीसदी वोट मिले थे। संसद में एंट्री के लिए जरूरी 5 फीसदी सीमा के बेहद करीब होने के कारण उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि पार्टी ड्यूमा में जगह बना पाएगी या नहीं।

चुनाव से पुतिन के यूक्रेन युद्ध को समर्थन दिखाने की कोशिश

इस चुनाव के जरिए क्रेमलिन का उद्देश्य यूक्रेन में जारी युद्ध के लिए पुतिन को मजबूत जनसमर्थन दिखाना भी माना जा रहा है। युद्ध अब पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। रूस को युद्ध के मैदान में भारी सैन्य नुकसान के बावजूद सीमित प्रगति मिलने के बीच देश में इस बात की आशंका भी जताई जा रही है कि चुनाव के बाद क्रेमलिन सेना में भर्ती के लिए एक और बड़े पैमाने पर मोबिलाइजेशन की घोषणा कर सकता है। इसके तहत लाखों नहीं तो सैकड़ों हजारों लोगों को सेना में बुलाए जाने की आशंका जताई गई है। हालांकि, पुतिन ने ऐसी किसी योजना से इनकार किया है। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में नई भर्ती की संभावना को लेकर चल रही चर्चा को पूरी तरह बकवास बताया था।

युद्ध पर सभी प्रमुख पार्टियों का रुख

चुनाव में शामिल सभी पार्टियों ने यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन का समर्थन किया। रूस सरकार इसे 'विशेष सैन्य अभियान' कहती है। इन पार्टियों ने राष्ट्रपति की घरेलू नीतियों की भी कोई खास आलोचना नहीं की। उदारवादी याब्लोको पार्टी ने जब 'शांति और स्वतंत्रता' के मुद्दे पर चुनाव प्रचार करने का ऐलान किया, तो उसे पिछले महीने स्टेट ड्यूमा की पार्टी सूची से बाहर कर दिया गया।

रूस के सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी पर चुनावी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए यह फैसला दिया। हालांकि, याब्लोको से जुड़े कुछ उम्मीदवार सिंगल निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए चुनाव मैदान में बने रहे। 'स्टेट ड्यूमा' चुनाव के अलावा रूस के 39 क्षेत्रों में विधायी निकायों और देश के 10 संघीय क्षेत्रों में नगरपालिका निकायों के लिए भी चुनाव हुए। इसके साथ ही 11 क्षेत्रों में गवर्नरों का चुनाव भी कराया गया।

चुनाव के आखिरी दिन यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला

रूस में मतदान के आखिरी दिन यूक्रेन की ओर से युद्ध शुरू होने के बाद के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक किया गया। रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसने 19 रूसी क्षेत्रों और क्रीमिया में 1,110 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। रूस ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर उसे अपने क्षेत्र में शामिल करने का दावा किया था। इसे यूक्रेन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बड़ा हिस्सा मान्यता नहीं देता। रूस के अनुसार, यह इस साल अब तक रातभर में मार गिराए गए ड्रोन की सबसे बड़ी संख्या थी। इससे पहले अगस्त में 822 ड्रोन का आंकड़ा सामने आया था।

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