Captain Smit Machchhar: फ्लाईदुबई विमान में हुए हाई-स्टेक्स मिड-एयर हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से खास बातचीत की। इस दौरान नेतन्याहू ने संकट की घड़ी में कैप्टन मच्छर के अदम्य साहस और सूझबूझ की जमकर सराहना की। उन्होंने कैप्टन मच्छर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का औपचारिक न्योता भी दिया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार (3 अक्तूबर) रात फोन पर बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि हमले से पहले को-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी। उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे।
मच्छार ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए। नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं। उन्होंने कहा, "आपने इतनी सारी जानें बचाईं... आपने दुनिया की आत्मा को बचाया।"
उन्होंने कहा, "मैं आपको और मेरे प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे अगले स्वतंत्रता दिवस पर जश्न की मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं। आप भारत और इज़राइल के बहादुर लोगों के सच्चे हीरो हैं। आप पूरी दुनिया के हीरो हैं। मैं आपके जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करता हूं।"
नेतन्याहू ने आगे कहा, "आम तौर पर यह सम्मान इज़राइली नागरिकों को ही दिया जाता है। लेकिन मुझे लगता है कि इस मामले में इजरायल के सभी नागरिक आपका स्वागत करेंगे। इसलिए हमें उम्मीद है कि आप जल्द ही इजरायल आएंगे... मैं आपको यहां फिर से देखने के लिए उत्सुक हूं। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे लगता है कि यह यात्रा यादगार और ऐतिहासिक होगी।"
कॉकपिट में अचानक हुआ हमला
कैप्टन स्मित मच्छार ने नेतन्याहू को उस खौफनाक घटना के बारे में बताया, जब फ्लाईदुबई की उड़ान सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान उनके को-पायलट ने प्रार्थना करने की अनुमति मांगी। मच्छार ने बताया कि स्थानीय क्रू सदस्यों के लिए यह सामान्य बात थी, इसलिए उन्होंने पेशेवर रवैया अपनाते हुए अपना ध्यान उड़ान पर बनाए रखा। लेकिन करीब चार-पांच मिनट बाद उनके सिर के पीछे जोरदार हमला हुआ।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई गंभीर तकनीकी खराबी हुई है। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि कॉकपिट के अंदर ही उन पर हमला किया जा रहा है। हमले के बाद उनकी आंखों के सामने धुंध छाने लगी और वह बुरी तरह भ्रमित हो गए। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर जाने लगा। कॉकपिट के फर्श पर पड़े होने के बावजूद उन पर लगातार वार किए जाते रहे।
'अगर दरवाजा नहीं खोलता तो मेरी मौत हो जाती'
कैप्टन मच्छर ने बताया कि उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि विमान को बचाने का एकमात्र रास्ता कॉकपिट का दरवाजा खोलना था। उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और दरवाजे की तरफ बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा, "मेरे अंदर बस एक आखिरी लड़ाई बाकी थी। आप इसे निजी लड़ाई कहें या लोगों के लिए लड़ाई। लेकिन मैंने सोचा कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो मैं मर जाऊंगा। इसके बाद मैंने अपनी पूरी ताकत लगाई और दरवाजे की तरफ गया और उसे खोल दिया।"
नेतन्याहू ने पूछा- सुरक्षित कॉकपिट का दरवाजा कैसे खोला?
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से पूछा कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति में उन्होंने कॉकपिट का सुरक्षित दरवाजा कैसे खोला? इस पर मच्छार ने कॉकपिट डोर की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि बाहर से कॉकपिट में एंट्री के लिए सिक्योरिटी कोड की जरूरत होती है।
स्मित ने बताया कि विमान के अंदर मौजूद क्रू को उस समय प्रवेश करने से रोका गया था। हालांकि, कॉकपिट के अंदर की तरफ से दरवाजा एक सामान्य मैनुअल टर्न-नॉब के जरिए खोला जा सकता है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए कैप्टन मच्छार ने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजा खोला और विमान को एक संभावित बड़ी त्रासदी से बचाने की कोशिश की।
यह बातचीत फ्लाईदुबई विमान में हुई उस भयावह घटना के बाद हुई है, जिसमें कॉकपिट के भीतर हिंसा के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कंट्रोल बनाए रखा और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए आखिरी क्षण तक संघर्ष किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कैप्टन स्मित मच्छार के लिए 'अशोक चक्र' की मांग की है।