फ्लाईदुबई की फ्लाइट में बीच हवा में कॉकपिट के अंदर हुए हमले की जांच अभी जारी है। इस मामले में अब सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान से पहले यूएई ने फ्लाइट के पायलट और अन्य क्रू मेंबर्स की पूरी सूची इजरायल के साथ शेयर की थी। इस खुलासे के बाद अब सवाल उठ रहा कि ओमानी को-पायलट हम्माम अल-हम्मामी को तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट उड़ाने की अनुमति कैसे मिली। कॉकपिट में हुए हमले की जांच संयुक्त अरब अमीरात कर रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, ओमानी को-पायलट को कथित तौर पर उसके चरमपंथी विचारों से जुड़ी चिंताओं के चलते ओमान में विमान उड़ाने से रोक दिया गया था। ओमान के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसके बावजूद उसे इजराइली यात्रियों को तेल अवीव ले जाने वाली फ्लाइट को उड़ाने की अनुमति कैसे मिली। इसे सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है।
यूएई के अधिकारियों के मुताबिक, को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने के बाद विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की। अधिकारियों ने इस घटना को संभावित आतंकी हमला बताया। विमान में करीब 180 लोग सवार थे। कैप्टन मच्छार ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्रियों और अन्य लोगों ने मिलकर हमलावर को काबू में करने में मदद की।
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, उड़ान रवाना होने से पहले यूएई ने इजरायल के साथ विमान में सवार यात्रियों और क्रू से जुड़ी जानकारी शेयर की थी। इसमें उनके देश और राष्ट्रीयता जैसी जानकारियां भी शामिल थीं। वहीं इजरायली अधिकारियों का कहना है कि उन्हें विमान में मौजूद किसी भी यात्री या क्रू सदस्य को लेकर सुरक्षा संबंधी कोई आपत्ति या चेतावनी नहीं मिली थी। इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने कहा कि, यात्रियों की सूची की जांच परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी है।
वहीं, परिवहन मंत्रालय ने कहा कि, उसे न तो यात्रियों की सूची मिली और न ही किसी तरह की सुरक्षा चेतावनी दी गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, उड़ान से पहले यात्रियों और क्रू की जानकारी शेयर करना नॉर्मल प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अलग-अलग देशों के बीच सुरक्षा जांच में कुछ सीमाएं भी होती हैं।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि विदेशी एयरलाइंस के साथ ऐसे समझौते हैं, जिनके तहत उन देशों के पायलटों को इजराइल में उड़ान भरने से रोका जा सकता है, जिनके साथ उसके डिप्लोमैटिक रिलेशन नहीं हैं। फ्लाईदुबई की घटना के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा जांच की जा रही है। जांच में ये भी देखा जा रहा है कि को-पायलट ने विमान में सवार होने से पहले किन-किन सुरक्षा जांचों को पास किया था और इसके बावजूद उसे उड़ान की अनुमति कैसे मिली।