कई लोग बिना पूरी जानकारी लिए कोई भी रत्न पहन लेते हैं। लेकिन हर रत्न का अपना अलग संबंध और महत्व माना जाता है। रत्नशास्त्र और ज्योतिष में नीलम को शनि ग्रह से जुड़ा रत्न माना जाता है और इसे काफी प्रभावशाली रत्न बताया जाता है। इसी वजह से मान्यता है कि इसे धारण करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। खासतौर पर नीलम हर व्यक्ति के लिए एक जैसा अनुकूल हो, यह जरूरी नहीं माना जाता।
नीलम को लेकर कई तरह की ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। इसमें इसे पहनने का दिन, सही उंगली, धातु और रत्न की क्वालिटी जैसी बातें शामिल हैं। कुछ मान्यताओं में इसे पहनने से पहले कुछ दिनों तक अपने पास रखने की सलाह भी दी जाती है। लेकिन इन्हें ज्योतिषीय मान्यताओं के तौर पर ही देखना चाहिए।
नीलम पहनने से पहले किसी जानकार ज्योतिषी से सलाह लेना बेहतर माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इसका संबंध शनि ग्रह से है और यह हर व्यक्ति के लिए सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए अपनी कुंडली में शनि की स्थिति देखकर ही इसे पहनने की सलाह दी जाती है।
मान्यता के अनुसार नीलम को शनिवार के दिन पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि शनिवार का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है। इसे पहनने से पहले रत्न की साफ-सफाई और पूजा करने की परंपरा भी बताई जाती है। कुछ लोग नीलम को पहनने से पहले कुछ दिनों तक अपने पास रखकर उसके असर को देखने की सलाह देते हैं।
रत्नशास्त्र में नीलम को सही उंगली और धातु में पहनने की बात कही जाती है। प्रचलित मान्यता के अनुसार इसे दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना चाहिए। इसके लिए चांदी या पंचधातु की अंगूठी को परफेक्ट माना जाता है। अपनी स्थिति के अनुसार सही तरीका जानने के लिए विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
नीलम खरीदते समय उसकी असली क्वालिटी पर जरूर ध्यान दें। बाजार में अलग-अलग क्वालिटी के रत्न मिलते हैं, जिन्हें पहचानना आम व्यक्ति के लिए मुश्किल हो सकता है। इसलिए किसी भरोसेमंद विक्रेता से ही नीलम खरीदें और उसकी क्वालिटी व असलियत की जांच जरूर करवाएं।
इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिष और रत्नशास्त्र में प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। नीलम धारण करने से पहले योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।