Ganesh Chaturthi 2026: गणेश स्थापना तिथि से लेकर विसर्जन तक, जानें शुभ मुहूर्त, चंद दोष सब कुछ

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। वहीं गणपति उत्सव 11 दिनों तक चलेगा। स्थापना से लेकर विसर्जन की तिथियां, पूजा मुहूर्त, चतुर्थी तिथि, चंद्र दर्शन का समय तक जानिए सब कुछ।

अपडेटेड Sep 13, 2026 पर 4:39 PM
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गणेश चतुर्थी सोमवार 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार हिंदू महीने भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार 14 सितंबर को शुरू होगी, जब भगवान गणेश 11 दिनों के लिए पधारेंगे। भक्त गणेश जी की मूर्तियां घर लाएंगे, पारंपरिक पूजा करेंगे और बुद्धि, समृद्धि और बाधाओं को दूर करने का आशीर्वाद मांगेंगे।

गणेश चतुर्थी की मुख्य पूजा का मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। यह त्योहार शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होगा, जब भक्त भगवान गणेश को विदा करेंगे और मूर्तियों का विसर्जन करेंगे।

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?


गणेश चतुर्थी सोमवार 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। यह त्योहार हिंदू महीने भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसे भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जिनकी पूजा बुद्धि, समृद्धि, सौभाग्य और बाधाओं को दूर करने वाले देवता के रूप में की जाती है। गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 की शुरुआत और विसर्जन की तारीख

गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को शुरू होगी। इस दिन भक्त तय 'मुहूर्त' समय में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। यह त्योहार पारंपरिक रूप से 11 दिनों तक चलता है। इसका समापन अनंत चतुर्दशी को होता है, जो शुक्रवार 25 सितंबर, 2026 को है। इस दिन गणेश विसर्जन किया जाता है, जिसमें मूर्तियों को जुलूस के साथ ले जाकर पानी में विसर्जित किया जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में 14 सितंबर को गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है। यह शुभ समय लगभग 2 घंटे 28 मिनट का होता है। गणेश पूजा के लिए मध्याह्न का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि पारंपरिक रूप से माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म दिन के इसी समय हुआ था। जो भक्त घर पर यह त्योहार मनाते हैं, वे आमतौर पर इसी शुभ समय में मूर्ति स्थापना और पूजा करते हैं।

चतुर्थी तिथि कब शुरू और खत्म होती है?

चतुर्थी तिथि 14 सितंबर, 2026 को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी। हालांकि यह तिथि अगली सुबह तक रहती है, लेकिन गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को ही मनाई जाएगी। त्योहार का समय प्रचलित चंद्र तिथि और तय मध्याह्न समय के अनुसार तय किया जाता है।

गणेश विसर्जन 2026 कब है?

गणेश विसर्जन शुक्रवार, 25 सितंबर, 2026 को होगा। कई दिनों की पूजा और उत्सव के बाद, भक्त गणेश जी की मूर्तियों को जुलूस के साथ ले जाते हैं और फिर उन्हें पानी में विसर्जित करते हैं। यह रस्म भगवान गणेश की विदाई का प्रतीक है। हालांकि कई भक्त अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करते हैं, लेकिन कुछ परिवार और समुदाय छोटी परंपराओं का पालन करते हैं और एक, तीन, पांच या सात दिनों के बाद मूर्ति का विसर्जन करते हैं।

गणेश चतुर्थी पर चांद देखने से कब बचना चाहिए?

पारंपरिक मान्यता के अनुसार, नई दिल्ली में 14 सितंबर, 2026 को सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे के बीच भक्तों को चांद देखने से बचना चाहिए। यह मान्यता इस विश्वास से जुड़ी है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चांद देखने से 'मिथ्या दोष' लग सकता है, जिसका संबंध पारंपरिक रूप से झूठे आरोपों या लांछन से है।

यह रोक भगवान कृष्ण से जुड़ी एक पौराणिक कथा पर आधारित है। कथा के अनुसार, चतुर्थी के दिन चांद देखने के बाद कृष्ण पर स्यमंतक मणि चुराने का झूठा आरोप लगा था। पारंपरिक रूप से इसी कहानी का हवाला दिया जाता है कि भक्त गणेश चतुर्थी पर चांद देखने से क्यों बचते हैं।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

पूरे भारत में भक्तों के लिए गणेश चतुर्थी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। कई भक्त किसी भी महत्वपूर्ण काम की शुरुआत गणेश जी का आशीर्वाद लेकर करते हैं, क्योंकि उन्हें 'विघ्नहर्ता' यानी बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।

इस त्योहार के दौरान पूजा-अर्चना, मूर्ति स्थापना, सांस्कृतिक कार्यक्रम, परिवार का मिलना-जुलना और सामूहिक उत्सव जैसे आयोजन होते हैं। देश के कई हिस्सों में, खासकर महाराष्ट्र में, बड़े पैमाने पर सार्वजनिक उत्सव और शोभायात्राएं इस त्योहार का अहम हिस्सा होती हैं।

गणेश चतुर्थी 2026 में धार्मिक रीति-रिवाज, पारिवारिक परंपराएं और सार्वजनिक उत्सव एक साथ देखने को मिलेंगे, जब भक्त भगवान गणेश का अपने घरों और समुदायों में स्वागत करेंगे। जो लोग यह त्योहार मना रहे हैं, उनके लिए 14 सितंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रमा को न देखने की पाबंदी जैसी बातें ध्यान में रखना ज़रूरी है।

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