26 अगस्त 2025 को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाएगा, जो इस बार विशेष योगों के कारण अत्यंत शुभ माना जा रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का प्रमुख अवसर है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और रातभर जागरण कर गौरी-शंकर का स्मरण करने से अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। इस साल हरतालिका तीज पर दुर्लभ नवपंचम योग बन रहा है, जिसके कारण ये दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत फलदायी साबित होगा।
नवपंचम योग से बढ़ेगा पर्व का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब दो ग्रह 120 डिग्री के अंतर पर आते हैं, तो यह योग बनता है, जो बेहद शुभ माना जाता है। इसके साथ ही चंद्रमा हस्त नक्षत्र में और शुक्र पुष्य नक्षत्र के द्वितीय चरण में रहेंगे। इन ग्रह स्थितियों के कारण यह दिन कई राशियों के लिए विशेष फलदायी साबित होगा।
इस शुभ दिन का सबसे ज्यादा फायदा मेष राशि के जातकों को मिलेगा। उनके रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है और उन्हें सुखद समाचार मिल सकते हैं। आर्थिक क्षेत्र में लाभ होगा और सभी प्रयास सफल होंगे। साथ ही परिवार का सहयोग और सम्मान भी प्राप्त होगा।
सिंह राशि वालों के लिए हरतालिका तीज बेहद मंगलकारी रहेगी। लंबे समय से रुके हुए कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे। करियर और व्यापार दोनों में तरक्की मिलेगी। आर्थिक क्षेत्र में मजबूती आएगी और धन संचय के नए अवसर हाथ लग सकते हैं। आर्थिक तंगी का दौर समाप्त हो सकता है।
मीन राशि वालों के लिए भी ये दिन अत्यंत शुभ रहेगा। कार्यक्षेत्र में उनका प्रभाव और स्थिति मजबूत होगी। प्रमोशन मिलने के प्रबल योग हैं और किसी विशेष उपलब्धि की खबर भी मिल सकती है। उनकी मेहनत का फल इस समय कई गुना बढ़कर मिलेगा।
क्यों खास है हरतालिका तीज का ये दिन
हरतालिका तीज को वैसे भी देवी पार्वती के अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का पर्व माना जाता है। लेकिन इस बार ग्रहों की अनुकूल स्थिति इसे और अधिक प्रभावशाली बना रही है। शुक्र और शनि के नवपंचम योग के साथ हस्त नक्षत्र का संयोग इसे दुर्लभ और फलदायी बना देता है।
इस प्रकार, यह तीज केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास है। मेष, सिंह और मीन राशि वालों को इसका सीधा लाभ मिलेगा, जबकि अन्य राशियों के लिए भी ये दिन सामान्य से बेहतर परिणाम देने वाला रहेगा। श्रद्धा और भक्ति से किया गया ये व्रत न केवल आध्यात्मिक संतोष देगा, बल्कि भाग्य को भी मजबूत करेगा।