Nag Panchami 2026: कैसे और कब करें नाग पंचमी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, विधि, नियम

Nag Panchami 2026: यहां नाग पंचमी 2026 के बारे में वे सभी बातें बताई गई हैं, जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है। इसकी तारीख, तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और ज्योतिषीय महत्व।

अपडेटेड Aug 16, 2026 पर 12:34 PM
यहां नाग पंचमी 2026 के बारे में जरूरी जानकारी दी गई है, जिसमें तारीख, तिथि, पूजा का शुभ समय (मुहूर्त), रीति-रिवाज़ और ज्योतिषीय महत्व शामिल हैं।

Nag Panchami 2026: हिंदू परंपरा में नाग देवता या सर्प देवताओं के सम्मान में हर साल नाग पंचमी मनाई जाती है। यह त्योहार श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है और कई भक्तों के लिए इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है।

इस साल नाग पंचमी सोमवार, 17 अगस्त को मनाई जाएगी। इस त्योहार के लिए खास तिथि और पूजा का समय तय है, जो जगह के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। यहां नाग पंचमी 2026 के बारे में जरूरी जानकारी दी गई है, जिसमें तारीख, तिथि, पूजा का शुभ समय (मुहूर्त), रीति-रिवाज़ और ज्योतिषीय महत्व शामिल हैं।

नाग पंचमी 2026 की तारीख और समय


पंचांग के अनुसार नाग पंचमी 17 अगस्त, 2026 को मनाई जाएगी। यह हिंदू महीने श्रावण के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ती है।

पंचमी तिथि शुरू- 16 अगस्त को शाम 4:52 बजे

पंचमी तिथि समाप्त- 17 अगस्त को शाम 5:00 बजे

पूजा का शुभ समय (मुहूर्त)- पूजा के लिए सुबह 5:51 बजे से 8:29 बजे तक का समय शुभ रहेगा

नाग पंचमी का ज्योतिषीय महत्व क्या है?

हिंदू परंपराओं में नाग पंचमी का नागों (सांपों) से गहरा संबंध है। इस त्योहार के दौरान भक्त नाग देवता की पूजा करते हैं और सुरक्षा, परिवार की भलाई और आध्यात्मिक शक्ति के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। वैदिक ज्योतिष में भी नाग का महत्वपूर्ण स्थान है। ज्योतिषीय परंपराएं नाग को चंद्र नोड्स (राहु और केतु) से जोड़ती हैं, हालांकि अलग-अलग मान्यताएं इस संबंध की व्याख्या अलग-अलग तरीकों से करती हैं।

कुछ ज्योतिषी नाग पूजा को 'काल सर्प दोष' से भी जोड़ते हैं। यह वैदिक ज्योतिष की एक ऐसी स्थिति है जो तब बनती है जब जन्म कुंडली में सात मुख्य ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। कुछ लोग नाग पंचमी को ग्रहों से जुड़ी ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रार्थना या पारंपरिक उपाय करने का एक अहम दिन मानते हैं।

नाग पंचमी की रस्में क्या हैं?

इस दिन भक्त पारंपरिक रूप से अलग-अलग नाग देवताओं की पूजा करते हैं। 'द्रिक पंचांग' में नाग पंचमी से जुड़े कई नाग देवताओं का ज़िक्र है, जिनमें अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिंगल शामिल हैं।

नाग देवता की पूजा-अर्चना करना

घर या मंदिर में पूजा करना

फूल और पूजा की पारंपरिक सामग्री चढ़ाना

नाग पूजा से जुड़े मंत्रों या प्रार्थनाओं का पाठ करना

अपने परिवार और इलाके की परंपराओं के अनुसार व्रत रखना

परिवार की भलाई और सुरक्षा के लिए आशीर्वाद मांगना

नाग पंचमी एक अहम त्योहार क्यों है?

बहुत से भक्तों के लिए, नाग पंचमी धार्मिक परंपरा, पौराणिक कथाओं और ज्योतिष का संगम है। यह त्योहार लोगों को नाग देवताओं का सम्मान करने और प्रकृति व आध्यात्मिक परंपराओं के साथ उनके जुड़ाव पर विचार करने का मौका देता है। 17 अगस्त को नाग पंचमी मनाने वाले भक्तों के लिए सबसे ज़रूरी बात स्थानीय पंचांग है। तिथि और पूजा का समय जगह के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है, इसलिए पूजा-पाठ शुरू करने से पहले अपने शहर के लिए सही समय ज़रूर देख लें।

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