वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में घर के मुख्य द्वार पर लगी नेम प्लेट को सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि सही दिशा, आकार और मटेरियल की नेम प्लेट घर में शुभता और खुशहाली लाने में सहायक होती है। इसलिए नेम प्लेट लगवाने से पहले कुछ जरूरी वास्तु नियमों का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है:
सही नेम प्लेट चुनना है जरूरी
वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार, नेम प्लेट ऐसे मटेरियल से बनवानी चाहिए जो मजबूत और प्राकृतिक हो। लकड़ी (wood) या पत्थर (stone) की नेम प्लेट को शुभ माना जाता है, क्योंकि इन्हें स्टेबिलिटी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं प्लास्टिक की नेम प्लेट लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही, नेम प्लेट को मेन गेट के दाईं ओर लगाना बेहतर माना जाता है।
नेम प्लेट पर केवल फैमिली हेड या फैमिली मेंबर का नाम और जरूरत हो तो उनका प्रोफेशन लिखवाना सही माना जाता है। बहुत ज्यादा जानकारी लिखने से बचना चाहिए। नाम को साफ, बड़े और आसानी से पढ़े जाने वाले अक्षरों में लिखवाएं। गोल्डन या ब्रास फिनिश वाले अक्षरों का यूज शुभ माना जाता है।
वास्तु के अनुसार, नेम प्लेट (nameplate) ऐसी जगह लगनी चाहिए जहां वह आसानी से दिखाई दे। यदि संभव हो तो इसे मेन गेट के पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। इस दिशा को सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) के आने का रास्ता माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शुभता का संचार होता है।
घर की नेम प्लेट हमेशा साफ दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए नेम प्लेट के ऊपर या पास में हल्की पीली रोशनी लगाई जा सकती है। माना जाता है कि इससे घर के एंट्रेंस गेट पर पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है और नेम प्लेट भी अट्रेक्टिव दिखती है।
नेम प्लेट पर धूल या गंदगी जमा नहीं होने देनी चाहिए। अगर नेम प्लेट पुरानी, टूटी या उसके अक्षर धुंधले हो जाएं, तो उसे बदल देना बेहतर माना जाता है। साफ और अच्छी स्थिति में रखी नेम प्लेट घर की सकारात्मक छवि को दर्शाती है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, नेम प्लेट पर देवी-देवताओं की आकृति बनवाने से बचना चाहिए। यदि शुभ प्रतीक लगाना चाहें, तो स्वास्तिक या 'ॐ' जैसे चिन्ह का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें शुभता और पाजिटिविटी का प्रतीक माना जाता है।