देश की सुरक्षा में चार साल का समय लगाने वाले अग्निवीरों को बेहतर भविष्य और उच्च शिक्षा में सहयोग और बेहतर मौके दिलाने के मकसद से मध्य प्रदेश की एक यूनिवर्सिटी ने खास पहल की है। यह विश्वविद्यालय इंदौर स्थित देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी है। इसने पूर्व अग्निवीरों को उच्च शिक्षा और बेहतर नौकरी के मौकों में मदद करने के लिए पूरी ट्यूशन फीस माफ करने का फैसला किया है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को इस फैसले की जानकारी दी है।
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. राकेश सिंघई ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि इस छूट के लिए कोई सीमा तय नहीं की गई है, और सभी योग्य पूर्व अग्निवीरों को इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सुविधा सिर्फ उन अग्निवीरों को मिलेगी, जिन्होंने चार साल की सेवा पूरी कर ली होगी। वे अग्निवीर इस सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगे, जो सेवा के दौरान नौकरी से निकाले गए हों या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना किया हो। बता दें, अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में अग्निपथ स्कीम के तहत भर्ती किया जाता है, जो आज की राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के लिए बनाई गई एक कम अवधि की नियुक्ति व्यवस्था है।
सिंघई ने कहा, " देश की रक्षा करते हुए सेना में अपने जीवन के चार सुनहरे साल बिताने वाले अग्निवीर अक्सर अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं। हम चाहते हैं कि वे सेना में सेवा देने के बाद अपनी उच्च शिक्षा पूरी करें, अच्छी नौकरी पाएं, और एक नई जिंदगी शुरू करें।" अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने तय किया है कि संस्थान के लगभग 200 कोर्स में से किसी में भी अगर पूर्व अग्निवीर प्रवेश लेने में कामयाब होते हैं, तो उन्हें 100% ट्यूशन फीस में छूट दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में, यूनिवर्सिटी पुराने अग्निवीरों को प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण देने पर विचार कर सकती है, और उनके लिए खास कोर्स भी बना सकती है।
वाइस चांसलर ने बताया कि सशस्त्र बलों के तीनों विंग्स के सेवारत कर्मचारियों के बच्चों को यूनिवर्सिटी की ट्यूशन फीस में पहले से ही 50% की छूट दी जाती है, जबकि शहीदों और रिटायर्ड सैनिकों के बच्चों को 100% छूट मिलती है। यूनिवर्सिटी की स्थापना मध्य प्रदेश सरकार ने 1964 में की थी।