Mirzapur First Review: 'मिर्जापुर: द मूवी' को तरण आदर्श ने दिए कितने स्टार? जानिए कैसी है कालीन भैया और गुड्डू पंडित की यह नई फिल्म
Mirzapur First Review: मशहूर फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिल्म का पहला रिव्यू शेयर करते हुए इसे WINNER बताया है। उन्होंने फिल्म की जमकर तारीफ की है।
तरण ने अपने रिव्यू में सबसे खास बात यह बताई है कि यह फिल्म सीरीज के किसी लंबे खींचे गए एपिसोड जैसी बिल्कुल महसूस नहीं होती।
Mirzapur First Review: भौकाल, भौकाल और सिर्फ भौकाल! जी हां, जिस रंगबाजी और थ्रिल का इंतजार दर्शक पिछले लंबे समय से कर रहे थे, वह अब सीधे बड़े पर्दे पर आ गया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपनी धाक जमाने के बाद मिर्जापुर अब सिनेमाघरों में धमाका करने उतर चुकी है। कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मुन्ना भैया के इस बड़े स्क्रीन अवतार मिर्जापुर: द मूवी (Mirzapur: The Movie) का पहला रिव्यू सामने आ चुका है। अगर आप भी थिएटर जाने का प्लान बना रहे हैं तो पहले यहां जान लीजिए कि फिल्म समीक्षकों और ट्रेड एनालिस्ट्स को यह प्रीक्वेल कैसी लगी है।
तरण आदर्श ने दिया WINNER का टैग, दी 4 स्टार रेटिंग
मशहूर फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिल्म का पहला रिव्यू शेयर करते हुए इसे WINNER बताया है। तरण आदर्श ने फिल्म को 4 स्टार रेटिंग देते हुए इसे पीक मास एंटरटेनर कहा है। तरण के मुताबिक इस आइकॉनिक वेब सीरीज को बड़ा स्क्रीन अपग्रेड मिला है और उनके शब्दों में यह एक श्योर-शॉट हिट है।
तरण ने अपने रिव्यू में सबसे खास बात यह बताई है कि यह फिल्म सीरीज के किसी लंबे खींचे गए एपिसोड जैसी बिल्कुल महसूस नहीं होती। तरण के मुताबिक यह पूरी तरह से एक फिल्म की तरह लगती है, ज्यादा बड़ी, ज्यादा लाउड और ज्यादा सिनेमैटिक। तरण ने लिखा है कि फिल्म में उस रॉ फ्लेवर, एटीट्यूड और खासियत को पूरी तरह बरकरार रखा है जिसने इस वेब सीरीज को एक ग्लोबल फिनोमिना बनाया था।
तरण आदर्श ने फिल्म की सबसे बड़ी ताकत पुनीत कृष्णा की राइटिंग को बताया है। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी बेहद पैनी है, राइटिंग क्रिस्पी और पंचलाइनों से भरी हुई है। सत्ता का संघर्ष, बदला, धोखा और भावनाएं सबकुछ को इतने स्मार्ट तरीके से बुना गया है कि मूवी का पूरा नैरेटिव शुरू से लेकर अंत तक अपनी पकड़ बनाए रखता है।
इस मूवी के हर टकराव में जबरदस्त तनाव है, बातचीत में एटीट्यूड है और कई डायलॉग्स यकीनन सिनेमाघर के बाहर निकलकर लोगों की जुबान पर चढ़ने वाले हैं। निर्देशक गुरमीत सिंह ने ड्रामा, एक्शन, ह्यूमर और इमोशन के बीच सही संतुलन बनाते हुए मिर्जापुर सीरीज के मूल डीएनए के साथ पूरा न्याय किया है।
फिल्म में एक्शन काफी रॉ, ब्रूटल और मासी है। बड़े पर्दे के ट्रीटमेंट ने इसके स्केल, तीव्रता और इम्पैक्ट को और बढ़ा दिया है। इसे देखते हुए हॉल में अगर सीटियां बज रही हों तो आपको चकित होने की जरूरत नहीं है।
म्यूजिक कम, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर है आउटस्टैंडिंग
इस रिव्यू के मुताबिक फिल्म में गानों के लिए ज्यादा स्कोप नहीं रखा गया है लेकिन जो थोड़े-बहुत गाने हैं (जिनमें 'सांसों की माला' शामिल है) वे कहानी के साथ सहजता से पिरोए गए हैं। फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर की तारीफ करते हुए तरण ने लिखा कि यह बियॉन्ड आउटस्टैंडिंग है। बीजीएम न सिर्फ अहम सीन्स के असर को बढ़ाता है बल्कि पूरे सिनेमैटिक अनुभव को काफी ऊपर लेकर जाता है।
जैसलमेर का रेगिस्तान, क्लाइमेक्स और सीक्वल का इशारा
सेकेंड हाफ की शुरुआत में फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ती है और इसे थोड़ा ट्रिम किया जा सकता था। जैसलमेर के खूबसूरत और विशाल रेत के टीलों के बीच शूट किया गया प्री-क्लाइमेक्स और क्लाइमेक्स का हिस्सा दर्शकों को हैरान कर देता है। हम कोई स्प्यॉलर नहीं देना चाहते लेकिन फिर भी बताते हैं कि गुड्डू पंडित (अली फजल) और मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदु) के बीच का एक सीन साफ संकेत देता है कि मिर्जापुर यूनिवर्स का नेक्स्ट चैप्टर पहले से ही पाइपलाइन में है।
फाइनल वर्ड: दर्शकों को लुभाने वाली राइड
पैनी राइटिंग, कातिलाना डायलॉग्स, शानदार परफॉर्मेंस, हाई-वोल्टेज ड्रामा और विस्फोटक एक्शन, ये सब मिर्जापुर: द मूवी को मिर्जापुर के फैंस के लिए एक बड़ी ट्रीट बनाते हैं। यह फिल्म उन लोगों के लिए भी उतनी ही मनोरंजक और क्राउड-प्लीजिंग राइड है, जिन्होंने ओटीटी पर यह सीरीज नहीं देखी है।