Films Based On Student Politics: रंग दे बसंती से लेकर युवा तक, देखें छात्र राजनीति पर बेस्ड बॉलीवुड की ये 7 फिल्में

Films Based On Student Politics: छात्र विरोध प्रदर्शन सुर्खियों में छाए हुए हैं। इस बीच हम आपको बॉलीवुड की उन फिल्मों के बारे में बताते हैं, जिनमें कैंपस की राजनीति, युवाओं की सक्रियता और छात्र आंदोलनों को दिखाया गया है।

अपडेटेड Jul 23, 2026 पर 1:00 PM
प्रोटेस्ट के बीच हम आपको छात्र राजनीति पर बेस्ड कुछ फिल्मों के बारे में बताते हैं। यहां देखिए लिस्ट...

Films Based On Student Politics: नीट पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर डटे छात्रों को बॉलीवुड एक्टर्स का भी साथ मिल रहा है। एक्ट्रेस हुमा कुरैशी, आलिया भट्ट, अनुपम खेर, आर माधवन, सलमान खान समेंत कई लोग स्टूडेंट्स के सपोर्ट में आए हैं। इस प्रोटेस्ट के बीच हम आपको छात्र राजनीति पर बेस्ड कुछ फिल्मों के बारे में बताते हैं।

राझणां

शुरुआत में तो राझणां एक छोटे शहर की प्रेम कहानी लगती है, लेकिन दूसरे हिस्से में यह दिल्ली के JNU जैसे कैंपस कल्चर पर आधारित एक पॉलिटिकल ड्रामा में बदल जाती है। इसमें एक स्टूडेंट-लीड पॉलिटिकल पार्टी की कहानी दिखाई गई है, जो सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर सड़क पर विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल करती है।


आरक्षण

प्रकाश झा की सामाजिक-राजनीतिक फिल्म भारत में जाति-आधारित आरक्षण पर गरमा-गरम बहस और शिक्षा के व्यवसायीकरण के मुद्दों को उठाती है। यह दिखाती है कि कैसे सुप्रीम कोर्ट का एक फ़ैसला आरक्षण के समर्थक और विरोधी छात्र गुटों के बीच हिंसक टकराव को भड़का देता है, जिससे कॉलेज कैंपस में भारी उथल-पुथल मच जाती है।

गुलाल

अनुराग कश्यप की यह दमदार ड्रामा फ़िल्म राजस्थान पर आधारित है और कैंपस चुनाव, छात्र संघ की राजनीति और हिंसक अलगाववादी आंदोलन की धुंधली दुनिया को दिखाती है।

रंग दे बसंती

इस विषय पर बनी सबसे मशहूर आधुनिक फिल्म। यह फ़िल्म यूनिवर्सिटी के कुछ बेफ़िक्र दोस्तों की कहानी है, जो तब सिस्टम के खिलाफ बागी बन जाते हैं, जब उनका एक दोस्त-जो फ़ाइटर पायलट था-सरकारी भ्रष्टाचार और एक खराब MiG विमान की वजह से मारा जाता है।

हजारों ख्वाहिशीन ऐसी

1970 के दशक पर आधारित सुधीर मिश्रा की यह फ़िल्म भारतीय आपातकाल के दौरान तीन कॉलेज छात्रों की उथल-पुथल भरी ज़िंदगी और राजनीतिक विचारधाराओं को दिखाती है।

युवा

मणि रत्नम की डायरेक्ट की हुई यह फ़िल्म अलग-अलग बैकग्राउंड वाले तीन नौजवानों की ज़िंदगी को एक साथ जोड़ती है। इसमें सेंट स्टीफ़ंस जैसे कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन लीडर पर खास तौर पर फ़ोकस किया गया है, जो सिस्टम को साफ़-सुथरा बनाने के लिए मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में आता है।

हासिल

तिग्मांशु धूलिया की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की अस्थिर और गैंग-आधारित स्टूडेंट पॉलिटिक्स की एक यथार्थवादी और स्थानीय तस्वीर पेश करती है।

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