Rajkumar Hirani: फिल्ममेकर राजकुमार हिरानी, जिन्हें '3 इडियट्स' और 'पीके' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए जाना जाता है, उन्होंने मणिपुर की फिल्म 'बूंग' की खूब सराहना की है। बता दें कि लक्ष्मी प्रिया देवी द्वारा निर्देशित यह फिल्म अपनी सच्ची कहानी, सांस्कृतिक रंग और भावनात्मक गहराई के लिए दर्शकों का दिल जीत रही है।
सोशल मीडिया पर हिरानी ने तारीफ करते हुए लिखा, "मैंने लक्ष्मी प्रिया देवी की 'बूंग' देखी, यह एक खूबसूरत मणिपुरी फिल्म है जिसने मुझे हँसाया, रुलाया, और नॉर्थ ईस्ट को उस तरह से दिखाया जैसा मैंने पहले कभी नहीं देखा था। यह प्योर सिनेमा है।"
फिल्म बूंग में नॉर्थ ईस्ट के ह्यूमर, इमोशंस और कल्चर को बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है। इसकी सच्चाई और सादगी के लिए दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया है।शुरुआत में, इसे कुछ ही शहरों में रिलीज किया गया था, लेकिन इसके टिकट जल्दी ही बिक गए। इसके बाद, फिल्म प्रेमियों ने इसे और शहरों में रिलीज करने की मांग की। दर्शकों की इस ज़बरदस्त पसंद को देखते हुए अब डिस्ट्रीब्यूटर्स ने बड़े शहरों के सिनेमाघरों में इसके और शो लगाने का ऐलान किया है।
कहना गलत नहीं होगा कि हिरानी की तारीफ बूंग की पहुंच को और बढ़ाएगी और साथ ही नॉर्थ ईस्ट की और भी क्षेत्रीय फिल्मों को पूरे देश में दर्शक दिलाने का रास्ता बनाएगी।
लक्ष्मीप्रिया देवी द्वारा लिखी और डायरेक्ट की गई बूंग का वर्ल्ड प्रीमियर 2024 टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जो मणिपुरी सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक पल रहा। यह फिल्म एक्सेल एंटरटेनमेंट, चॉकबोर्ड एंटरटेनमेंट और सूटेबल पिक्चर्स के साथ मिलकर बनाई गई है। बूंग 19 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।
फिल्म में प्रोफेशनल और नए कलाकारों का अनोखा मेल है, जो इसे बहुत मजबूत बनाता है और एक असली दुनिया से रूबरू कराता है। अपनी मजबूत कहानी, खूबसूरत विजुअल्स और मणिपुर के जीवन और संस्कृति को दिखाने के साथ, बूंग हंसी, उम्मीद और बचपन की मासूमियत के पल को भी दिखाती है। यह इंसानों के बीच के जुड़ाव की गहरी कहानी पर रोशनी डालती है।
फिल्म के रिलीज़ के बारे में बात करते हुए फिल्ममेकर लक्ष्मिप्रिया देवी ने कहा, “बूंग वह किताब है जिसे मैं अपनी खराब इंग्लिश की वजह से नहीं लिख पाई! यह फिल्म मेरी दादी की लोककथाओं से प्रेरित है, जिन्होंने बचपन में मुझे एक तरह की गर्मजोशी और सुकून दिया। यह मणिपुर के लोगों की हिम्मत को समर्पित है। मैं इस समय पूरी तरह से विश्वास न होने, खुशी और कृतज्ञता के बीच का अजीब सा मिश्रण महसूस कर रही हूं कि क्योंकि आखिरकार एक मणिपुरी फिल्म भारत के मेनलैंड तक पहुंच रही है! तो आइए और बूंग को हेलो कहिए!”