Ramayana Part 1 Review: राम के रोल में शानदार लगे रणबीर कपूर, यश ने फूंकी फिल्म में जान

Ramayana Part 1 Review: फिल्म का पहला पार्ट थोड़ा सा स्लो लगता है। म्यूजिक और बेहतरीन हो सकता था। लेकिन जटायु और रावण के सीन फिल्म में जान डाल देते हैं। आप ताली बजाए बिना नहीं रह सकते हैं।

अपडेटेड Nov 05, 2026 पर 11:43 AM
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सवाल ये है कि क्या नमित मल्होत्रा ​​की 'रामायण: पार्ट 1' में इसे बखूबी कर दिखाने का साहस है? तो जवाब है हां...पढ़िए इस रिव्यू में।

फिल्म-रामायण पार्ट 1

निर्देशक- नितेश तिवारी

कलाकार-रणबीर कपूर, यश, साई पल्लवी, सनी देओल, रवि दुबे और अन्य


रेटिंग-4/5

Ramayana Part 1 Review: शायद ही कोई भारतीय ऐसा होगा, जिसने रामायण के बारे में सुना न हो, इसे देखा न हो, स्कूल के किसी नाटक में इसमें अभिनय न किया हो। 39 साल पहले रामानंद सागर के टीवी रूपांतरण ने हर रविवार पूरे देश को मानो थाम सा दिया था। लोगों के मुताबिक रामानंद की रामायण देखने के लिए वे अपना सारा काम छोड़कर टीवी के सामने बैठ जाते थे। शो के प्रसारण के समय सड़कें लगभग सुनसान हो जाती थीं। इतनी बड़ी विरासत के बराबर कुछ पेश कर पाना एक बेहद कठिन काम है। अब सवाल ये है कि क्या नमित मल्होत्रा ​​की 'रामायण: पार्ट 1' में इसे बखूबी कर दिखाने का साहस है? तो जवाब है हां...पढ़िए इस रिव्यू में।

फिल्म की कहानी

फिल्म ‘रामायण’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी ऑरीजनल कहानी है। नितेश तिवारी ने दर्शकों को सिर्फ एक जानी-पहचानी कहानी नहीं दिखाई है, बल्कि इस महाकाव्य की आत्मा को छूने की पूरी कोशिश की है। फिल्म की शुरुआत देवताओं और राक्षसों के बीच संघर्ष से होती है, जिसे रावण (यश) के बचपन, उसकी कड़ी तपस्या और उसके अजेय बनने के सफर में शानदार तरीके से दिखाया गया है। इसके बाद कहानी को स्मूथली अयोध्या की तरफ शिफ्ट कर दिया जाता है, जहां राजा दशरथ (अरुण गोविल) के चार बेटों (राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न) के जन्म और शिक्षा को दिखाया जाता है। पार्ट वन मुख्य रूप से राम के इंसानी और दैवीय पहलुओं के बीच बैलेंस, विश्वामित्र के साथ आश्रम की उनकी यात्रा, ताड़का का वध, अहिल्या को बचाना और मिथिला में सीता के स्वयंवर को कवर करता है। आज की पीढ़ी के लिए ये एक शानदार फिल्म है।

एक्टिंग

रणबीर कपूर ने फिल्म भगवान राम का किरदार निभाया है। रणबीर कपूर की परफॉर्मेंस शानदार है। उन्होंने भगवान राम की मर्यादा, संयम, शांति, दया और साहस को बहुत गंभीरता और सेल्फ-कंट्रोल के साथ बैलेंस किया है। उनकी आंखों में चमक और नरमी साफ देखी जा सकती है। लड़ाई के सीन के दौरान उनकी बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी और शानदार हो सकती थी। कुछ सीन में आपको रणबीर के रोम-कोम किरदारों वाली झलक दिख जाती है।

यश ने फिल्म में जान फूंक दी है। यश ने रावण के किरदार में जबरदस्त एनर्जी भरी है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस बहुत दमदार है। हर सीन रॉयल दिखता है। अपनी गहरी आवाज और तीखे एक्सप्रेशन से यश ने रावण के घमंड, समझदारी और अजेयता को शानदार तरीके से दिखाया है। वहीं साई पल्लवी माता सीता के किरदार में बेहद खूबसूरत लग रही हैं। उन्होंने ने अपनी सादगी से किरदार में और निखार ला दिया है। जब रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में जच रहे हैं। दशरथ के रोल में अरुण गोविल की मौजूदगी पुरानी यादों को फिर से ताजा कर देती हैं।

फिल्म का निर्देशन

नितेश तिवारी की बड़ी चुनौती ये की उन्हें ऐसी कहानी को दिखाना था, जिसके बारे में दर्शक पहले से बहुत कुछ जानते हैं। रामायण के हर किरदार और घटना भारतीय लोगों में गहराई से बसी है। वहीं रामानंद सागर ने की रामायण के अलावा अभी तक कई फिल्में और सीरीज आईं, लेकिन उसके जैसा प्रभाव नहीं छोड़ सकी हैं। नितेश की फिल्म आज के टाइम के हिसाब से शानदार है। वहीं नया सिनेमाई अनुभव देना जरूरी था। तिवारी इस जिम्मेदारी को काफी हद तक पूरा किया है। कहीं-कहीं थोड़ी कमियां हैं, लेकिन फिल्म का आखिरी 1 घंटा हर कमी को पूरा कर देता है। रावण और जटायू युद्ध फिल्म की जान है।

संगीत में रह गई कसर

हॉलीवुड के दिग्गज हंस जिमर और भारतीय संगीत के महारथी ए.आर. रहमान का एक साथ आना काफी चर्चा में था, जिन्होंने फिल्म के लिए संगीत और बैकग्राउंड स्कोर तैयार किया है। हालांकि यह सुनने में अच्छा लगता है और कुछ सीन्स में काफी असरदार भी है, लेकिन लोगों की उम्मीदें इतनी ज्यादा थीं कि अंतिम परिणाम उन पर खरे नहीं उतरते। कभी-कभी तो गाने भी गैर-जरूरी लगते हैं।

हाई लाइट्स

फिल्म का सबसे बेहतरीन हिस्सा जटायु वाला सीन है, जिसमें वह रावण से सीता को बचाने की कोशिश करता है। फिल्म के क्लाइमैक्स में जटायु का किरदार, जिसे अनुपम खेर ने अपनी आवाज दी है. फिल्म के सबसे शानदार पलों में से एक है। संक्षेप में कहें तो भले ही रावण के दस सिर थे, लेकिन फिल्म निर्माताओं के सामने इससे भी बड़ी चुनौती है पूरे देश की उम्मीदों पर खरा उतरना।

'भाग 1' इस मुश्किल चुनौती को पार करने में सफल रहा है। इसने महाकाव्य की भावनाओं को बरकरार रखते हुए एक बेहद शानदार सीन अनुभव पेश किया है। असली रोमांच तो अगले भाग के लिए बचाकर रखा गया है। हनुमान के रूप में सनी देओल की एंट्री, संजीवनी बूटी वाला सीन और युद्ध - इन सबके साथ 'भाग 2' के लिए काम काफी बड़ा है। अच्छी खबर यह है कि फिल्म निर्माताओं को बखूबी पता है कि वे क्या कर रहे हैं। खैर हम सभी जानते हैं कि इसका अंत कैसे होता है।

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