Taapsee Pannu Birthday: जब कंटेंट-आधारित सिनेमा आज की तरह इंडस्ट्री का सबसे बड़ा ट्रेंड नहीं बना था, तब भी तापसी पन्नू अपनी फिल्मों का चुनाव ऐसी कहानियों के आधार पर कर रही थीं जो अलग सोच रखती थीं। उन्होंने आसान फॉर्मूले वाली फिल्मों के बजाय ऐसी स्क्रिप्ट्स चुनीं जो समाज से जुड़े सवाल उठाती थीं और मजबूत महिला किरदारों को कहानी के केंद्र में रखती थीं। उनके जन्मदिन पर आइए याद करें वे सात फिल्में, जिन्होंने साबित किया कि अच्छी कहानियां हमेशा ट्रेंड से आगे होती हैं।
1. पिंक (2016): सहमति को कहानी का सबसे बड़ा मुद्दा बनाया
उस समय कोर्टरूम ड्रामा फिल्मों में ज्यादातर पुरुष किरदार मुख्य भूमिका में होते थे, लेकिन पिंक ने तीन आम महिलाओं को कहानी के केंद्र में रखा। तापसी ने मीनल के किरदार को बहुत सादगी और मजबूती के साथ निभाया। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक फिल्मों में गिनी जाती है।
2. नाम शबाना (2017): जब महिला एक्शन हीरोइन अभी आम बात नहीं थी
महिला-प्रधान एक्शन फिल्मों का दौर शुरू होने से पहले ही तापसी ने नाम शबाना जैसी फिल्म की। उन्होंने साबित किया कि एक एक्शन थ्रिलर को भी एक महिला अपने दम पर आगे बढ़ा सकती है। फिल्म में ताकत, समझदारी और भावनात्मक गहराई, तीनों नजर आए।
3. बदला (2019): जब उन्होंने बड़े मसाले के बजाय मजबूत कहानी चुनी
जब मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्मों को सुरक्षित व्यावसायिक विकल्प नहीं माना जाता था, तब तापसी ने बदला जैसी फिल्म चुनी। यह फिल्म पूरी तरह कहानी और अभिनय पर टिकी थी, और उनके प्रदर्शन ने दर्शकों को आखिर तक बांधे रखा।
4. थप्पड़ (2020): एक थप्पड़ को पूरे देश की बहस बना दिया
कई लोगों को लगा कि सिर्फ एक थप्पड़ पर बनी फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आएगी, लेकिन थप्पड़ ने सबको गलत साबित कर दिया। तापसी के शांत और सच्चे अभिनय ने सम्मान, बराबरी और आत्मसम्मान जैसे मुद्दों पर देशभर में चर्चा शुरू कर दी।
5. रश्मि रॉकेट (2021): एक अनदेखे मुद्दे को मुख्यधारा तक पहुंचाया
रश्मि रॉकेट में तापसी ने खेलों में होने वाले जेंडर टेस्टिंग जैसे कम चर्चित विषय पर काम किया। कड़ी शारीरिक तैयारी और भावनात्मक अभिनय के साथ उन्होंने एक ऐसे मुद्दे को लोगों तक पहुंचाया जिस पर पहले बहुत कम बात होती थी।
6. हसीन दिलरुबा (2021): एक ऐसी नायिका जो पूरी तरह परफेक्ट नहीं थी
जब फिल्मों में महिला किरदारों से अक्सर आदर्श होने की उम्मीद की जाती थी, तब तापसी ने रानी जैसा किरदार निभाया। वह भावुक, जिद्दी, अप्रत्याशित और पूरी तरह इंसानी थी। फिल्म की सफलता ने दिखाया कि दर्शक ऐसे जटिल महिला किरदारों को भी पसंद करते हैं।
7. सांड की आंख (2019): उम्र और समाज की सीमाओं को चुनौती देने वाली कहानी
सांड की आंख में तापसी ने भारत की सबसे उम्रदराज निशानेबाजों में से एक, प्रकाशी तोमर का किरदार निभाया। यह फिल्म हिम्मत, मेहनत और जीवन के किसी भी पड़ाव पर सपने पूरे करने की प्रेरणा देने वाली कहानी थी। इसने दिखाया कि असाधारण कहानियां कहीं से भी आ सकती हैं।
सिनेमा के ट्रेंड बदलते रहते हैं, लेकिन अच्छी कहानियों का असर लंबे समय तक रहता है। तापसी पन्नू का करियर इसी बात का सबूत है। जब कंटेंट-आधारित फिल्में आज की तरह आम नहीं थीं, तब भी उन्होंने ऐसी स्क्रिप्ट्स चुनीं जिनमें गहराई थी, मजबूत किरदार थे और समाज से जुड़ी बात थी। अब जब गांधारी के साथ वह एक और अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाने जा रही हैं, तापसी एक बार फिर साबित करती हैं कि ट्रेंड के पीछे चलने से नहीं, बल्कि नया रास्ता बनाने से पहचान बनती है।