WHO Cancer Report 2026: हम सबमें हर एक शख्स पर जीवन में कम से कम एक बार पड़ेगा कैंसर का असर! इस नई रिपोर्ट के आंकड़े उड़ा देंगे होश
WHO Cancer Report 2026: कैंसर का बढ़ता खतरा पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बन चुका है। WHO की नई रिपोर्ट ने चेताया है कि आने वाले वर्षों में इसके मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। बदलती लाइफस्टाइल, प्रदूषण और अन्य कारणों के बीच समय पर जांच और इलाज की पहुंच अब सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है
Cancer: एशिया में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले और मौतें दर्ज की जा रही हैं
कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले सालों में कैंसर के मामलों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। अनुमान है कि साल 2050 तक दुनिया में हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या करीब 3.5 करोड़ तक पहुंच सकती है, जबकि वर्तमान में ये आंकड़ा लगभग 2.06 करोड़ प्रति वर्ष है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की बड़ी आबादी किसी न किसी रूप में कैंसर से प्रभावित होगी।
हर पांच में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर होने का खतरा है, जबकि परिवार के किसी करीबी सदस्य के प्रभावित होने के कारण लगभग 92 प्रतिशत लोग इस बीमारी के असर को महसूस कर सकते हैं।
हर दिन 26 हजार से ज्यादा मौतें, कैंसर बना बड़ी चुनौती
WHO और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) की संयुक्त रिपोर्ट में बताया गया है कि कैंसर अब भी दुनिया में मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। हर साल लगभग 2.06 करोड़ नए मामले सामने आते हैं और करीब 1 करोड़ लोगों की मौत कैंसर के कारण होती है। PTI कि रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर से हर दिन 26 हजार से ज्यादा लोगों की जान जाती है। बीमारी का असर सिर्फ मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों पर भी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ाता है।
अमीर देशों में बचने की संभावना ज्यादा
रिपोर्ट में कैंसर इलाज की पहुंच को लेकर गंभीर असमानता सामने आई है। उच्च आय वाले देशों में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित लगभग 87 प्रतिशत महिलाएं पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रहती हैं, जबकि कम आय वाले देशों में यह आंकड़ा घटकर करीब 42 प्रतिशत रह जाता है।
WHO के अनुसार, अभी दुनिया के एक तिहाई से भी कम देश अपनी यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज योजनाओं में कैंसर देखभाल को पूरी तरह शामिल करते हैं। इसके कारण कई मरीजों को समय पर जांच, इलाज और जरूरी सहायता नहीं मिल पाती।
कैंसर की दवाइयां भी कई देशों में पहुंच से बाहर
रिपोर्ट में बताया गया कि कैंसर की जरूरी 20 प्रमुख दवाओं की उपलब्धता में भी बड़ा अंतर है। निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में इन दवाओं की उपलब्धता केवल 9 से 54 प्रतिशत तक है, जबकि अमीर देशों में यह आंकड़ा 68 से 94 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नई तकनीक और इलाज के विकास के बावजूद अगर मरीजों तक सुविधाएं नहीं पहुंचतीं, तो बीमारी से लड़ाई अधूरी रह जाएगी।
क्यों बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले?
विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़े कारण जिम्मेदार हैं।
मुख्य कारण:
बढ़ता मोटापा
शारीरिक गतिविधि की कमी
असंतुलित खान-पान
वायु प्रदूषण
तंबाकू और शराब का सेवन
इसके अलावा बढ़ती उम्र और बदलती जीवनशैली भी कैंसर के मामलों में वृद्धि का कारण बन रही है।
भारत में भी बढ़ रहा कैंसर का बोझ
एशिया में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले और मौतें दर्ज की जा रही हैं, जिसमें भारत भी प्रमुख रूप से प्रभावित देशों में शामिल है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुमान के अनुसार:
भारत में हर साल करीब 14.6 से 15 लाख नए कैंसर मामले सामने आते हैं।
देश में लगभग 25 लाख लोग कैंसर के साथ जी रहे हैं।
2050 तक भारत में सालाना कैंसर मामलों की संख्या करीब 28 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
पुरुषों और महिलाओं में कौन से कैंसर ज्यादा आम?
पुरुषों में प्रमुख कैंसर:
फेफड़ों का कैंसर
प्रोस्टेट कैंसर
आंत का कैंसर
पेट का कैंसर
लीवर कैंसर
महिलाओं में प्रमुख कैंसर:
ब्रेस्ट कैंसर
फेफड़ों का कैंसर
आंत का कैंसर
थायरॉयड कैंसर
सर्वाइकल कैंसर
रोकथाम में हुई प्रगति
WHO रिपोर्ट में कहा गया है कि तंबाकू नियंत्रण, वैक्सीनेशन और कैंसर रोकथाम के क्षेत्र में सुधार हुआ है। कई देशों ने राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण योजनाएं भी शुरू की हैं। इसके बावजूद यह प्रगति इतनी तेज नहीं है कि हर मरीज तक समय पर जीवनरक्षक इलाज पहुंच सके।
रिपोर्ट में सरकारों, स्वास्थ्य संस्थानों और वैश्विक संगठनों से अपील की गई है कि कैंसर देखभाल को स्वास्थ्य योजनाओं का अहम हिस्सा बनाया जाए और मरीजों को बेहतर, सस्ता और समान इलाज उपलब्ध कराया जाए।