AI सैनिकों को नहीं करेगा रिप्लेस लेकिन बदल देगा युद्ध का तरीका... लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा ने बताया कैसा होगा फ्यूचर सोल्जर
आज के समय में AI केवल कॉर्पोरेट कंपनियों तक सिमित नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल इंडियन डिफेंस फोर्स में भी बढ़ता जा रहा है, जो युद्ध के दौरान सैनिकों की मदद के लिए रामबाण साबित हो सकता है। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि क्या AI के इस्तेमाल से मशीनें सैनिकों की जगह तो नहीं ले लेंगी?
AI सैनिकों को नहीं करेगा रिप्लेस... लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा ने बताया कैसा होगा फ्यूचर सोल्जर
आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल कॉर्पोरेट कंपनियों तक सिमित नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल इंडियन डिफेंस फोर्स में भी बढ़ता जा रहा है, जो युद्ध के दौरान सैनिकों की मदद के लिए रामबाण साबित हो सकता है। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि क्या AI के ज्यादा इस्तेमाल से मशीनें सैनिकों की जगह तो नहीं ले लेंगी? इन्हीं सवालों का जवाबों का देते हुए आर्मी हेडक्वार्टर में स्ट्रैटेजिक प्लानिंग के डायरेक्टर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा (AVSM, SM, VSM) ने कहा कि AI सैनिकों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनके लड़ने के तरीके और उनकी क्षमताओं में बुनियादी बदलाव लाएगा।
उन्होंने यह बात News18 के DEFCON 2026 कार्यक्रम में कही। लेफ्टिनेंट जनरल आहूजा ने कहा कि भारत भविष्य की लड़ाइयों में अचानक किसी हमले या स्थिति से हैरान नहीं रह सकता। उन्होंने भविष्य की जंगों के लिए भारतीय सेना को तैयार करने के मकसद से उसमें बदलाव लाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, "हम जिन सबसे अहम बदलावों का फायदा उठाना चाहते हैं, उनमें से एक है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: जैसे टारगेट का पता लगाना, निगरानी, टारगेट की पहचान, लॉजिस्टिक्स और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, सटीक सपोर्ट, बहुत बड़े डेटा को प्रोसेस करना और निश्चित रूप से साइबर डिफेंस।"
"लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि AI सैनिक की जगह नहीं लेगा। बल्कि यह सैनिक के लड़ने के तरीके और उसकी क्षमताओं को बदल देगा।"
उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में सैनिक एक साथ कई मानवरहित सिस्टम को कंट्रोल करते नजर आ सकते हैं। वहीं, निगरानी और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पहले से शुरू हो चुका है। लॉजिस्टिक्स से जुड़े कामों में रोबोट का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
लेफ्टिनेंट जनरल आहूजा ने कहा, "AI पहले से ही ऐसे पैटर्न या पैटर्न में बदलाव की पहचान कर रहा है, जिन्हें पहचानने और पता लगाने में हमें पहले शायद कई दिन या महीने लग जाते। भविष्य में यही 'ह्यूमन-मशीन टीमिंग' (इंसान और मशीन की मिलकर काम करने की प्रक्रिया) होगी।"
‘तैयारी कोई एक घटना नहीं हो सकती, इसे एक संस्कृति बनना होगा’
लेफ्टिनेंट जनरल आहूजा ने कहा कि दुनिया लगातार संघर्षों के दौर से गुजर रही है और चेतावनी दी कि भविष्य की लड़ाइयां जरूरी नहीं कि पारंपरिक तरीकों से ही लड़ी जाएं।
उन्होंने कहा, "हम भविष्य में अचानक सामने आने वाली किसी भी चुनौती के लिए तैयार न होने का जोखिम नहीं उठा सकते। यह जरूरी नहीं कि चुनौती सिर्फ सेना की गतिविधियों से जुड़ी हो; यह टेक्नोलॉजी और बदलते रणनीतिक माहौल से भी पैदा हो सकती है।"
उन्होंने कहा कि आज सतर्कता का मतलब सिर्फ सीमाओं पर हो रही गतिविधियों पर नजर रखना नहीं है, बल्कि भारत को नई उभरती टेक्नोलॉजी और बदलते खतरों पर भी नजर रखने की जरूरत है।
आहूजा ने कहा, "इसलिए आज हमारे लिए सतर्कता का मतलब सिर्फ सीमाओं पर नजर रखना नहीं है। इसका मतलब टेक्नोलॉजी के ट्रेंड्स, साइबर खतरों, अंतरिक्ष में हो रहे विकास, नई उभरती टेक्नोलॉजी और ऑटोनॉमस सिस्टम पर भी नजर रखना है। साथ ही, इसका मतलब जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाब देने की क्षमता बनाए रखना भी है।"
उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारे लिए तैयारी कोई एक दिन का काम नहीं हो सकती, इसे हमारी कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा।”
‘भविष्य की लड़ाइयां शायद पारंपरिक मिसाइल हमले से शुरू न हों’
लेफ्टिनेंट जनरल आहूजा ने कहा कि भविष्य की लड़ाइयां पारंपरिक काइनेटिक युद्ध (हथियारों से लड़े जाने वाले युद्ध) के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी शुरू हो सकती हैं।
उन्होंने कहा, "भविष्य की लड़ाई शायद पारंपरिक मिसाइल हमले से शुरू न हो। यह साइबर हमले, सैटेलाइट को बाधित करने, हमारे कम्युनिकेशन सिस्टम को ठप करने और निश्चित रूप से कॉग्निटिव डोमेन (सोच-समझ और जानकारी के दायरे) में हेरफेर करने से शुरू हो सकती है।"
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य की लड़ाइयों में सैनिकों को एक ही समय में कई क्षेत्रों में खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
लेफ्टिनेंट जनरल आहूजा ने कहा, "भविष्य के सैनिक को एक ही समय में काइनेटिक हमलों, ड्रोन से निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, GPS में रुकावट, साइबर हमलों और निश्चित रूप से ऑटोनॉमस सिस्टम का सामना करना होगा।"
उन्होंने अंत में कहा कि "युद्ध का मैदान अब मल्टी-डोमेन वाला, तकनीक से जुड़ा और बेहद तेज होता जा रहा है। जो पक्ष तेज़ी से चीजों को भांप सकेगा, समझ सकेगा, फैसला ले सकेगा और कार्रवाई कर सकेगा, उसे दुश्मन पर साफ बढ़त हासिल होगी।"