NALSAR CJI Invite Row: नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के विरोध से जुड़ा विवाद गहराता जा रहा है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा विश्वविद्यालय के 2026 बैच के पास आउट छात्रों के वकालत नामांकन पर रोक लगाने और फिर कुछ ही घंटों में उस आदेश को वापस लेने के बाद अब NALSAR के कुलपति (VC) श्रीकृष्ण देव राव का बड़ा बयान सामने आया है।
यूनिवर्सिटी के कुलपति श्रीकृष्ण देव राव ने गुरुवार देर रात जारी एक बयान में कहा कि विश्वविद्यालय आगामी दीक्षांत समारोह से जुड़े हालिया घटनाक्रमों में शामिल व्यक्तियों की जांच करने के बीसीआई के अनुरोध को अपनी कार्यकारी परिषद के समक्ष रखेगा। कार्यकारी परिषद नालसार यूनिवर्सिटी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
BCI ने पहले भेजा था छात्रों पर बैन और जांच का पत्र, फिर बदला फैसला
कुलपति श्रीकृष्ण देव राव ने बताया कि उन्हें गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से एक पत्र मिला था। इस पत्र में वर्ष 2026 बैच के स्नातक बीए और एलएलबी (ऑनर्स) के सभी छात्रों के वकालत नामांकन को नामंजूर करने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही बीसीआई ने दीक्षांत समारोह से जुड़े घटनाक्रमों में शामिल व्यक्तियों पर एक जांच रिपोर्ट भी मांगी थी। इस शुरुआती पत्र के बाद बीसीआई की तरफ से एक दूसरा पत्र भी मिला। इस दूसरे लेटर में राज्य बार कौंसिलों को दिए गए उस निर्देश को पलट दिया गया जिसके तहत स्नातक छात्रों के नामांकन पर रोक लगाई गई थी। वीसी के मुताबिक इस नए लेटर में भी बीसीआई ने यह शर्त बरकरार रखी है कि कुलपति इसमें शामिल व्यक्तियों की जांच रिपोर्ट सौंपेंगे।
क्या जांच कराना संवैधानिक है? कार्यकारी परिषद लेगी फैसला
बीसीआई की ओर से मांगी गई जांच रिपोर्ट पर कुलपति श्रीकृष्ण देव राव ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय की सहायता करने और यह आकलन करने के लिए कि क्या इस तरह की जांच करना संवैधानिक होगा और विश्वविद्यालय के शासन नियमों के तहत स्वीकार्य होगा या नहीं, इस मामले को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के समक्ष रखा जाएगा। कुलपति ने आगे कहा कि जैसे ही कार्यकारी परिषद के साथ परामर्श की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, इसके बारे में बीसीआई को सूचित कर दिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर बवाल के बाद BCI ने कुछ ही घंटों में वापस लिया बैन
इससे पहले गुरुवार को दिन में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक कड़ा निर्देश जारी करते हुए देश की सभी राज्य बार कौंसिलों को आदेश दिया था कि वे अगले आदेश तक NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 के किसी भी स्नातक को वकील के रूप में नामांकित न करें। बीसीआई ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करते हुए एक रिपोर्ट भी मांगी थी। इस कड़े कदम के बाद सोशल मीडिया पर भारी बवाल मच गया। चौतरफा विरोध और आक्रोश को देखते हुए बीसीआई ने कुछ ही घंटों के भीतर इस फैसले को वापस ले लिया। वकीलों की इस शीर्ष वैधानिक संस्था ने कहा कि वह इस मामले में सामने रखे गए तथ्यों पर विचार करने के बाद 19 अगस्त को अंतिम फैसला लेगी।
जानिए क्या है पूरा विवाद?
हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के एक वर्ग ने इस वर्ष जुलाई (में विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में छात्रों ने संस्थान के आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया था। हालांकि नालसार यूनिवर्सिटी के इस दीक्षांत समारोह की तारीख की घोषणा अभी तक नहीं की गई है।