Azamgarh Triple Murder: पत्नी और 2 पुजारियों को गोलियों से भूना, फिर 3 मासूम बच्चों को बनाया बंधक… आजमगढ़ में अरविंद का 7 घंटे का खौफनाक ड्रामा!

Azamgarh Triple Murder: आजमगढ़ में मंगलवार (22 सितंबर) शाम एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान ऐसी खौफनाक वारदात हुई, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया है। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी और दो पुजारियों को गोली मार दी। घटना के बाद वह अपने तीन बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया

अपडेटेड Sep 23, 2026 पर 1:06 PM
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Azamgarh Triple Murder: आजमगढ़ जिले में पत्नी और दो पुजारियों की हत्या का आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया है

Azamgarh Triple Murder: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार (22 सितंबर) शाम पूजा के दौरान हुए विवाद के बाद तीन लोगों की हत्या के आरोपी अरविंद सिंह को आजमगढ़ की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और ATS की संयुक्त टीम ने देर रात मुठभेड़ में मार गिराया। आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि रात्रि साढ़े तीन बजे मुठभेड़ में घायल अहरौला पुलिस थाना अंतर्गत शंभूपुर गांव निवासी अरविंद सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई।

पत्नी और दो पूजारियों की हत्या

आजमगढ़ पुलिस के मुताबिक, अरविंद सिंह मंगलवार शाम छह बजे घर लौटा। उस समय, उसकी पत्नी बबिता सिंह (32) दो पंडितों से पूजा-पाठ करवा रही थी। घर में धार्मिक अनुष्ठान होता देख अरविंद भड़क गया। फिर नाराज अरविंद ने अपनी पत्नी एवं दो पंडितों को गाली देना शुरू कर दिया। पत्नी की आपत्ति पर विवाद बढ़ गया। इस बीच, अरविंद ने अपनी लाइसेंसी बंदूक निकाली और कथित तौर पर पत्नी बबिता सिंह को गोली मार दी। इसके बाद दोनों पंडितों को भी गोली मार दी। पंडितों की पहचान महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (50) के रूप में की गई है।


तीन बच्चों को बनाया बंधक

इस घटना के बाद उसने खुद को घर के भीतर बंद कर लिया। मामले की सूचना मिलने पर कई थानों से पुलिस टीमें मौके पर पहुंची और घर को चारों तरफ से घेर लिया। डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि तीन हत्याओं के आरोपी ने तीन बच्चों के साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया था। इस दौरान वह लगातार उन बच्चों को मारने की धमकी दे रहा था। आरोपी द्वारा चलाई गई गोली से एक बच्चे को भी गोली लगी है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घायल बेटे ने भी तोड़ा दम, दो बेटियां बचाई गईं

पुलिस ने सबसे पहले घायल बेटे को कमरे से बाहर निकाला। 'दैनिक जागरण' की रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी पहचान आठ वर्षीय शौर्य के रूप में हुई। उसे गोली लगी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने अरविंद की दोनों बेटियों को सुरक्षित बाहर निकाला। दोनों बच्चियां सदमे में थीं। पुलिस के मुताबिक उनमें पानी और भोजन की कमी के संकेत दिखाई दिए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

पुलिस पर की फायरिंग

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी को गोली लगी। मंगलवार रात साढ़े तीन बजे आरोपी की इलाज के दौरान मौत हो गई। जबकि दो बच्चे खतरे से बाहर हैं। डॉक्टर अनिल कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि आरोपी को लगभग सात घंटे तक समझाने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही रिश्तेदारों और परिजनों को बुलाकर भी प्रयास किया गया। लेकिन वह लगातार बच्चों को मारने की धमकी दे रहा था।

भूत प्रेत और आत्मा के साए!

गांव के लोगों ने बताया कि आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसलिए भूत प्रेत और आत्मा के साए की बात को लेकर उसके घर में पूजा पाठ का आयोजन किया गया था। इसी बात से आरोपी नाराज था। वाराणसी के एडीजी नवीन अरोड़ा का कहना है कि लगातार सात घंटे के प्रयास के बाद भी आरोपी बाहर नहीं निकला। इसी बीच फायरिंग की आवाज आई जिसके बाद हमारे पास कोई विकल्प नहीं था।

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स्टन ग्रेनेड और टियर गैस ग्रेनेड का प्रयोग करके दरवाजा तोड़ा गया। इसके बाद डॉक्टर अनिल कुमार एसओजी टीम के साथ अंदर गए। उन्होंने बताया कि अंदर जाते ही लगातार आरोपी फायरिंग करने लगा। अधिकारियों ने बताया कि उसने पांच राउंड फायर किया। इसी दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी को गोली लगी। इस मुठभेड़ में आरोपी की मौत हो गई है।

5 मौतों से दहला आजमगढ़

इस पूरी वारदात में कुल पांच लोगों की मौत हुई। इनमें अरविंद सिंह, उसकी पत्नी बाबिता सिंह, दो पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा तथा उसका आठ वर्षीय बेटा शौर्य शामिल है। इस हत्याकांड के बाद पूरे जिले में दहशत का माहौल है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। धार्मिक अनुष्ठान से शुरू हुए विवाद से लेकर गोलीबारी, बच्चों को कमरे में बंद करने और सात घंटे बाद पुलिस कार्रवाई तक की पूरी घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

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