Azamgarh News: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी अरविंद सिंह को करीब सात घंटे चले गतिरोध के बाद पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। आरोपी ने खुद को एक कमरे में बंद कर तीन बच्चों को भी बंधक बना लिया था। इसके बाद वह पुलिस पर लगातार गोली चलाने की धमकी दे रहा था। पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान तीनों बच्चों को कमरे से सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि, आरोपी के बेटे को गोली लगी थी।इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बाकी दो बच्चों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया।
पूजा के दौरान शुरू हुआ विवाद
आजमगढ़ के SSP डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, स्थानीय निवासी अरविंद सिंह मंगलवार शाम करीब छह बजे घर लौटा। इस दौरान उसने अपनी पत्नी बबीता सिंह (32) को दो पुजारियों महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (50) के साथ धार्मिक अनुष्ठान करते देखा। सूत्रों के अनुसार, धार्मिक कार्यक्रम देखकर अरविंद कथित रूप से गुस्से में आ गया। उसने पत्नी तथा दोनों पुजारियों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। पत्नी के विरोध करने पर विवाद बढ़ गया।
इसके बाद अरविंद ने कथित रूप से अपना लाइसेंसी हथियार निकाला और सबसे पहले पत्नी बबीता सिंह को गोली मारी। इसके बाद उसने दोनों पुजारियों को भी गोली मार दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना के बाद आरोपी घर के अंदर बंद हो गया। बताया जा रहा है परिवार को शक था कि अरविंद किसी 'बुरी आत्मा' के प्रभाव में है।
इसी वजह से उसकी मां और पत्नी ने पूजा का आयोजन कराया था। पुलिस के मुताबिक, अरविंद पूजा से नाराज था। इसी दौरान उसकी पत्नी ने कथित तौर पर उसे पुजारी का अपमान करने से रोका, जिसके बाद वह गुस्से में आ गया। इस दौरान उसने गोली चला दी। इस दौरान तीन लोग वहां से भागने में सफल रहे। सूचना मिलने पर कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे घर को घेर लिया।
बच्चों को कमरे में बंद कर पुलिस को दी चुनौती
घटना के बाद अरविंद ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। उसके साथ उसके दो बच्चे और उसकी साली का एक बच्चा भी कमरे के अंदर था। पुलिस ने पहले बातचीत के जरिए उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मनाने की कोशिश की। परिवार के सदस्यों को भी बातचीत में शामिल किया गया। हालांकि, पुलिस के मुताबिक अरविंद ने पुलिसकर्मियों और परिवार के लोगों को गोली मारने की धमकी दी। उसने बच्चों को भी जान से मारने की धमकी दी। सुबह तक पुलिस को इंतजार करने के लिए कहा।
सात घंटे बाद पुलिस ने तोड़ा दरवाजा
वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा के मुताबिक, पुलिस ने शुरुआती दौर में काफी संयम बरता। करीब सात घंटे तक आरोपी से बातचीत के जरिए बच्चों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई। लेकिन जब आरोपी ने अंदर से पुलिस पर गोली चला दी, तो एसएसपी और SOG टीम के कुछ सदस्यों को दरवाजा तोड़कर अंदर जाना पड़ा।
पुलिस ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया। कमरे के अंदर पहुंचने के बाद पुलिस टीम पर फिर गोली चलाई गई। इसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के लिए गोलीबारी की, जिसमें अरविंद घायल हो गया।
पुलिस ने सबसे पहले अरविंद के बेटे को बाहर निकाला। इसके बाद दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर लाया गया। पुलिस को पता चला कि बेटे को गोली लगी हुई थी। तीनों बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन अरविंद के बेटे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, पुलिस की गोली लगने से घायल अरविंद की भी अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, दोनों बच्चियां काफी डरी हुई थीं। उन्हें भोजन-पानी की कमी के साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा था।
परिवार ने पहले भी की थी शिकायत
SSP के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि अरविंद सिंह का व्यवहार परिवार के प्रति आक्रामक रहता था। उसकी मां और पत्नी ने कथित तौर पर उसके द्वारा परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट और आक्रामक व्यवहार की शिकायत की थी। पुलिस ने घटना के संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति कंट्रोल में है।