पटना-पूर्णिया NH-27 पर बनेगा बिहार का पहला हाईटेक मोटल! मार्च 2027 तक तैयार होगा प्रोजेक्ट, मिलेंगी होटल जैसी सुविधाएं

बिहार में सड़क मार्ग के यात्रियों के लिए जल्द ही एनएच-27 पर राज्य का पहला हाईटेक मोटल बनाया जाएगा। पटना-पूर्णिया मार्ग पर बनने वाला यह मोटल मार्च 2027 बनकर तैयार हो सकता है। इसमें यात्रियों को किफायती भोजन के साथ आधुनिक सुविधाओं से लैस कमरों में ठहरने का विकल्प भी मिलेगा।

अपडेटेड Oct 21, 2026 पर 12:20 PM
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पटना से पूर्णिया जाने वाले NH-27 पर सुपौल जिले में बिहार का पहला हाईटेक मोटल आकार ले रहा है।

लंबी सड़क यात्रा के दौरान खाने-पीने के लिए अच्छा ठिकाना ढूंढना हो या थकान मिटाने के लिए कुछ घंटे आराम करना हो, अब बिहार में यात्रियों की ये परेशानियां जल्द दूर होने वाली हैं। पटना से पूर्णिया जाने वाले NH-27 पर सुपौल जिले में बिहार का पहला हाईटेक मोटल आकार ले रहा है। यहां यात्रियों को किफायती भोजन के साथ आधुनिक सुविधाओं से लैस कमरों में ठहरने का विल्प भी मिलेगा। खास बात यह है कि इस मोटल में भोजन और कमरे का शुल्क आम होटल और रेस्टोरेंट के मुकाबले कम रखने की योजना है।

इसका निर्माण बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से सुपौल के किशनपुर प्रखंड स्थित आसनपुर कुपहा में कोसी महासेतु के समीप कराया जा रहा है। करीब 24.05 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस मिड-वे सर्विस प्लाजा का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सफर के बीच मिलेगा भोजन, आराम और ठहरने का इंतजाम

इस मोटल का उद्देश्य लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को सड़क किनारे सुविधाजनक और भरोसेमंद ठिकाना उपलब्ध कराना है। यहां यात्री खाने-पीने की सामग्री प्राप्त करने के साथ कुछ घंटे या एक रात तक रुक सकेंगे। सरकार की ओर से प्रमाणित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल होगी। इससे पटना से पूर्णिया और उत्तर बिहार के दूसरे इलाकों की ओर जाने वाले यात्रियों को सफर के बीच भोजन और विश्राम के लिए बेहतर विकल्प मिलने की उम्मीद है। यहां रिटेल और सेवियर शॉप का भी निर्माण होगा। इनडोर गेम्स, एंटरटेनमेंट जोन, फूड कोर्ट, मल्टी कुजीन रेस्टुरेंट जैसी सुविधाएं भी मौजूद होंगी।

आखिर होटल से कितना अलग होता है मोटल?

मोटल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सड़क यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। आमतौर पर इसके कमरे पार्किंग स्थल के नजदीक होते हैं, जिससे यात्रियों को गाड़ी से सामान उतारकर कमरे तक ले जाने में आसानी होती है। होटल की तुलना में मोटल का ढांचा अलग होता है। इसमें जरूरी सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। यही वजह है कि मोटल अक्सर लंबी दूरी के यात्रियों के लिए किफायती ठहराव का विकल्प बनते हैं। भारत के कई राज्यों में मोटल की सुविधा पहले से उपलब्ध है लेकिन बिहार का यह पहला माना जा रहा है। पहले चरण के तहत बिल्डिंग का ढांचा लगभग तैयार हो गया है।


दूसरे चरण में बनेगा पार्क और EV चार्जिंग स्टेशन

इस परियोजना की योजना केवल भोजन और ठहरने की सुविधा तक सीमित नहीं है। दूसरे चरण में यहां पार्क और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए EV चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना भी शामिल है। इससे भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहन से सफर करने वाले लोगों को भी सुविधा मिल सकती है।

पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

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