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इस राज्य के स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील में मिलेगी मछली! जानिए क्या है पूरी तैयारी

पुडुचेरी के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को मिड-डे मील में मछली से बनी डिश खाने का मौका मिल सकता है। इस फैसले को लागू करने वाला यह तीसरा राज्य होगा, जहां छात्रों को मिड डे मील में नॉन-वेज परोसा जाएगा। राज्य सरकार शुरू में इसमें पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ क्षेत्रों में शुरू करेगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 26, 2026 पर 2:32 PM
इस राज्य के स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील में मिलेगी मछली! जानिए क्या है पूरी तैयारी
छात्रों को मिड डे मील में नॉनवेज परोसने वाला लक्षद्वीप और केरल के बाद पुडुचेरी तीसरा राज्य होगा।

दक्षिण भारत के केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी के सरकारी स्कूल के छात्रों को मिड-डे मील में मछली से बनी डिश खाने को मिल सकती है। राज्य सरकार के मत्स्य पालन मंत्रालय ने मछली परोसने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया है। सरकारी स्कूल के छात्रों को मिड डे मील में नॉनवेज परोसने वाला लक्षद्वीप और केरल के बाद पुडुचेरी तीसरा राज्य होगा। यह योजना शुरुआत में राज्य के कुछ क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की जाएगी।

पुडुचेरी के मत्स्य पालन मंत्री के कार्यालय से जारी एक रिलीज में इस प्रस्ताव के बारे बताया गया है। यह प्रस्ताव विधानसभा में एक बैठक के दौरान रखा गया, जिसकी अध्यक्षता पब्लिक वर्क्स मिनिस्टर मल्लाडी कृष्ण राव ने की, जिनके पास फिशरीज और मछुआरों के कल्याण का भी पोर्टफोलियो है। इस बैठक में मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) के अध्यक्ष पी जवाहर और दूसरे लोग भी मौजूद थे। राव ने कहा कि यह पहल शुरू में पुडुचेरी और यनम इलाकों के कुछ स्कूलों में पायलट बेसिस पर शुरू की जाएगी।

केरल और लक्षद्वीप के बाद तीसरा राज्य होगा पुडुचेरी

पुडुचेरी ने 1930 में फ्रांसीसी प्रशासन के तहत स्कूलों में मिड-डे मील स्कीम शुरू की थी। छात्रों को अब तक अंडे दिए गए हैं, और इस केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी स्कूलों के मेन्यू में मछली पहली नॉन-वेज डिश होगी। पुडुचेरी के अलावा लक्षद्वीप में छात्रों को नियमित मिड डे मील में मछली परोसी जाती है। वहीं, केरल में कुछ स्कूलों में मछली और चिकन परोसा जाता है।

PM POSHAN स्कीम में 65,856 छात्र शामिल

आज, PM POSHAN स्कीम में प्री-प्राइमरी बच्चों के अलावा 438 सरकारी/सरकारी मदद वाले और प्राइवेट स्कूलों में एलकेजी से कक्षा 12 तक के 65,856 छात्र शामिल हैं। केंद्र सरकार कक्षा 8 तक के खर्च का 60% देती है, जबकि राज्य बाकी हिस्सा देता है। वरिष्ठ कक्षाओं के लिए, राज्य पूरा खर्च उठाता है।

बैठक में कई प्रस्ताव पेश किए गए

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