AI-Proof प्रोफेशन्स की पहचान करेगा वाणिज्य मंत्रालय, पीयूष गोयल ने जो कहा उसके मायने समझिए
AI-proof professions: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि मोदी सरकार ऐसे प्रोफेशन्स की पहचान कर रही है जिन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कम असर पड़ेगा। इसमें उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां तकनीक इंसानों की जगह लिए बिना उनकी कार्यक्षमता बढ़ा सकती है
AI-proof professions: पीयूष गोयल ने वाणिज्य मंत्रालय से ऐसे पेशों की पहचान करने को कहा है जिन पर AI का असर नहीं पड़ेगा
AI-proof professions: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारत सरकार भविष्य के रोजगार और कौशल की जरूरतों को ध्यान में रखकर नई रणनीति तैयार करने की दिशा में अहम काम कर रही है। मोदी सरकार ऐसे प्रोफेशन्स की पहचान कर रही है जिन पर AI का कम असर पड़ेगा। इसमें उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां टेक्नोलॉजी इंसानों की जगह लिए बिना उनकी कार्यक्षमता बढ़ा सकती है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि उन्होंने अपने मंत्रालय से ऐसे पेशों और क्षेत्रों की पहचान करने को कहा है, जो AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद मानव श्रम, रचनात्मकता और पारंपरिक कौशल के कारण प्रासंगिक बने रह सकते हैं।
मंत्री ने बताया कि भारत की विशाल आबादी और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए इस पहल का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान देना है, जहां तकनीक इंसानों को पूरी तरह विस्थापित करने के बजाय उनकी उत्पादकता बढ़ाने में मदद करे। जर्मनी में भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं और छात्रों को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत को उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जहां उसकी मानव कौशल उसे वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिला सकते हैं। उन्होंने हस्तशिल्प, हथकरघा, पाक-कला और पर्यटन जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इन क्षेत्रों में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
AI से नौकरियों पर असर के बीच सरकार की तैयारी
AI के विस्तार से दुनिया भर में रोजगार के स्वरूप में बदलाव की आशंका जताई जा रही है। कई कामों में स्वचालन बढ़ रहा है। वहीं नए तकनीकी कौशल और रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। ऐसे में भारत जैसे बड़ी श्रमशक्ति वाले देश के लिए यह समझना महत्वपूर्ण हो गया है कि किन क्षेत्रों में मानव भागीदारी लंबे समय तक अहम बनी रह सकती है। पीयूष गोयल ने कहा कि उन्होंने अपने मंत्रालय से 'AI-प्रूफ प्रोफेशन' यानी ऐसे पेशों की पहचान करने को कहा है, जो AI के कारण पूरी तरह अप्रासंगिक होने की आशंका से अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकते हैं।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक उन्होंने कहा, "आखिरकार, हमें एक राष्ट्र के रूप में करोड़ों लोगों के भविष्य की योजना बनानी है। ऐसे कौन-से क्षेत्र हैं, जहां AI अधिकतम कार्यक्षमता बढ़ा सकता है। लेकिन जरूरी नहीं कि वह मानव कार्यबल की जगह ले।" मंत्री के इस बयान का व्यापक अर्थ यह है कि भारत को भविष्य की रोजगार नीति बनाते समय केवल नई टेक्नोलॉजी को अपनाने पर ही नहीं, बल्कि मानव कौशल की रक्षा और विकास पर भी ध्यान देना होगा।
हस्तशिल्प और हथकरघा में भारत देख रहा वैश्विक नेतृत्व की संभावना
गोयल ने भारत की पारंपरिक कला और कौशल को भविष्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान देने की बात कही। उनके मुताबिक, हस्तशिल्प और हथकरघा जैसे क्षेत्रों में भारतीय कारीगरों का अनुभव, सांस्कृतिक विरासत और रचनात्मकता देश की विशेष ताकत हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पारंपरिक कौशल को AI पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकता।
भारत में हस्तशिल्प और हथकरघा केवल सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा नहीं हैं। बल्कि अनेक कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों की आजीविका से भी जुड़े हैं। इन क्षेत्रों में डिजाइन, बुनाई, कढ़ाई, लकड़ी का काम, मिट्टी की कला और अन्य पारंपरिक तकनीकों का विशेष महत्व है।
AI का इस्तेमाल इन उद्योगों में डिजाइन तैयार करने, बाजार के रुझानों को समझने, उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री और ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने में किया जा सकता है। वहीं, उत्पादों के निर्माण में मानवीय कौशल, स्थानीय पहचान और विशिष्ट कलात्मकता की भूमिका बनी रह सकती है।
कला और पर्यटन में भी भारत के लिए बड़े अवसर
वाणिज्य मंत्री ने कला और पर्यटन को भी ऐसे क्षेत्रों में शामिल किया, जहां भारत अपनी विशेष क्षमताओं के आधार पर वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ सकता है। भारत की क्षेत्रीय खाद्य परंपराएं, स्थानीय व्यंजन, सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक स्थल और पारंपरिक आतिथ्य पर्यटन उद्योग को विशिष्ट पहचान देते हैं। इन क्षेत्रों में मानवीय संपर्क, स्थानीय अनुभव और सांस्कृतिक समझ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
AI पर्यटन स्थलों के प्रचार, यात्रा की योजना बनाने, ग्राहकों की पसंद समझने और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन स्थानीय संस्कृति का अनुभव और पारंपरिक भोजन की खासियत जैसे पहलुओं में मानवीय भागीदारी अब भी महत्वपूर्ण रह सकती है। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह इन पारंपरिक क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़े, ताकि रोजगार के अवसर बढ़ें और स्थानीय उद्यमियों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिल सके।
140 करोड़ लोगों के बेहतर भविष्य पर जोर
गोयल ने कहा कि भारत के पास ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां देश की विशिष्ट ताकतों को विकसित करके लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे क्षेत्रों पर एक साथ ध्यान देगी, जिनमें भारत की विशेष क्षमताएं हैं, जो देश की लगभग 1.4 अरब आबादी के बेहतर भविष्य में योगदान दे सकते हैं। इस दृष्टिकोण में रोजगार सृजन, कौशल विकास, छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन और तकनीकी बदलावों के अनुरूप आर्थिक अवसर तैयार करना शामिल है। भारत की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए यह भी जरूरी होगा कि शिक्षा और ट्रेनिंग व्यवस्था को उद्योगों की बदलती मांग के साथ जोड़ा जाए।
AI से मुकाबले में सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर करेंगे काम
जब गोयल से पूछा गया कि इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए क्या विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे? इस पर उन्होंने कहा कि इसके लिए भारत सरकार, निजी क्षेत्र और अन्य पक्षों की भागीदारी से अलग-अलग पहल की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रयास केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं होगा। कुछ पहल प्राइवेट सेक्टर के नेतृत्व में होंगी। वहीं, कुछ सरकार की ओर से संचालित की जाएंगी। जबकि अन्य अवसरों और लोगों की भागीदारी के आधार पर आगे बढ़ेंगी।
उनके मुताबिक AI के दौर में रोजगार से जुड़ी चुनौतियों का समाधान केवल एक नीति या एक योजना से नहीं निकलेगा। इसके लिए उद्योगों, शिक्षण संस्थानों, स्कील ट्रेनिंग सेंटर और सरकार के बीच समन्वय की जरूरत होगी। यदि ऐसे प्रयास प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो पारंपरिक उद्योगों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाते हुए रोजगार के मौजूदा अवसरों को मजबूत करने और नए काम पैदा करने की संभावनाएं बन सकती हैं।
विदेशों में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों को वापस लाने की पहल
गोयल ने जर्मनी में मौजूद भारतीय शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को भारत लौटकर देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने वहां भारतीय शोधकर्ताओं और छात्रों से पूछा है कि भारत में काम करने पर विचार करने के लिए उन्हें किस प्रकार की सहायता और सुविधाओं की आवश्यकता होगी।
मंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रतिभाशाली युवा शोधकर्ताओं, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों से यह बताने को कहा है कि सरकार किस तरह उन्हें भारत में काम करने और देश की सेवा करने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकती है। विदेशों में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों का अनुभव, तकनीकी ज्ञान और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों से जुड़ाव भारत के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
प्रतिभा की वापसी के लिए बेहतर रिसर्च इकोसिस्टम जरूरी
गोयल ने कहा कि प्रतिभाशाली पेशेवरों को भारत वापस लाने का मामला केवल सैलरी या आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। इसके लिए ऐसा माहौल तैयार करना जरूरी है, जहां शोधकर्ताओं को अच्छी सुविधाएं, संस्थागत सहयोग और इनोवेशन के पर्याप्त अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि उन्हें यह समझ में आया है कि मामला केवल पैसे का नहीं, बल्कि सक्षम वातावरण और सहयोगी इकोसिस्टम का भी है।
गोयल ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों, एकेडमिक वर्ल्ड, प्रमुख शोध संस्थानों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि शोधकर्ताओं और उद्योगों के बीच साझेदारी को किस प्रकार मजबूत किया जा सकता है। भारत में शोध के अवसर बढ़ने से न केवल विदेशों में मौजूद प्रतिभाओं को वापस लाने में मदद मिल सकती है। बल्कि देश में पढ़ रहे छात्रों के लिए भी हाईटेक रिसर्च और इनोवेशन के नए रास्ते खुल सकते हैं।
'जर्मनी में भारतीय स्टूडेंट भारत की विकास यात्रा से जुड़ने को उत्सुक'
गोयल ने जर्मनी में पढ़ रहे भारतीय स्टूडेंट्स का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें से कई भारत लौटकर देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देने को लेकर उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टूडेंट्स का एक बड़ा समुदाय अपने अनुभव और एजुकेशन को भारत वापस लाने के लिए उत्सुक है। उनके मुताबिक, अब कुछ छात्र केवल जर्मनी में नौकरी पाने के बजाय भारत लौटकर देश की विकास यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं। आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में भारतीय मूल के लगभग 3.3 लाख लोग रहते हैं। इसके अलावा वहां भारतीय स्टूडेंट की संख्या करीब 60,000 से 70,000 बताई जाती है।