रक्षा निर्यात में भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड, यूरोप में भारतीय गोला-बारूद की मांग में 1,600% की उछाल, 28वें से दूसरे नंबर पर पहुंचा India

India arms exports to Europe: भारत यूरोपीय देशों के लिए हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत पूर्वी यूरोप में गोला-बारूद के प्रमुख एक्सपोर्टर में से एक बनकर उभरा है। डिफेंस सेक्टर में भारत से तोप के गोले, मोर्टार के गोले, प्रोपेलेंट और विस्फोटकों की आपूर्ति में भारी उछाल आया है

अपडेटेड Oct 24, 2026 पर 2:31 PM
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India arms exports to Europe: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार खोल दिया गया है

India arms exports to Europe: यूरोप के रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती मौजूदगी देश के उभरते डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की नई तस्वीर पेश कर रही है। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुए घातक युद्ध के बाद पूर्वी और मध्य यूरोप के कई देशों में गोला-बारूद की मांग तेजी से बढ़ी है। इस मांग के बीच भारतीय डिफेंस कंपनियों ने भी अपनी पहुंच का विस्तार किया है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय देशों को भारत से होने वाले चुनिंदा गोला-बारूद और संबंधित उत्पादों के निर्यात में चार साल के भीतर 1,600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान भारत इन उत्पादों के आपूर्तिकर्ताओं की लिस्ट में 28वें स्थान से दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

4 साल में 49.2 मिलियन डॉलर से बढ़कर 872 मिलियन डॉलर हुआ निर्यात

ब्लूमबर्ग न्यूज (Bloomberg) की रिपोर्ट में ट्रेड डेटा मॉनिटर के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद के चार वर्षों में भारतीय कंपनियों ने यूरोपीय देशों को कम से कम 872 मिलियन डॉलर यानी लगभग 87.2 करोड़ डॉलर के संबंधित उत्पादों का निर्यात किया। इससे पहले के चार वर्षों में यह आंकड़ा 49.2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4.92 करोड़ डॉलर था।


इस तरह दोनों अवधियों के बीच निर्यात मूल्य में 1,600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह आंकड़ा भारत के संपूर्ण रक्षा निर्यात का नहीं। बल्कि चुनिंदा कैटेगरी के गोला-बारूद और उनसे जुड़े उत्पादों के व्यापार का है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब पूर्वी और मध्य यूरोप के 13 देशों को इन उत्पादों की आपूर्ति करने वाले देशों में दक्षिण कोरिया के बाद दूसरे स्थान पर है। इस ग्रुप में पोलैंड, रोमानिया, बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य और बाल्टिक क्षेत्र के देश शामिल हैं।

किन रक्षा उत्पादों की बढ़ी मांग?

भारत से यूरोप जाने वाले उत्पादों में मुख्य रूप से तोपों के गोले, मोर्टार गोला-बारूद और विस्फोटक शामिल हैं। ये सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होने वाली बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण आपूर्तियां हैं। युद्ध के लंबे खिंचने के कारण यूरोप के कई देशों को अपने सैन्य भंडार की भरपाई करनी पड़ रही है। यूक्रेन को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने में भी इस क्षेत्र के कुछ देशों की भूमिका रही है। ऐसे में उनकी अपनी घटती आपूर्ति को दोबारा बढ़ाने की जरूरत ने यूरोप के बाहर के निर्माताओं के लिए भी अवसर पैदा किए हैं।

भारत के रक्षा उद्योग के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

भारत लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अब घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों में बढ़ते अवसर भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए अतिरिक्त कारोबार का रास्ता खोल रहे हैं।

यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी के कई संभावित आर्थिक प्रभाव हैं। इनमें रक्षा कारखानों की उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के अवसर, सप्लाई चैन का विस्तार और भारतीय कंपनियों को इंटरनेशनल ग्राहकों के साथ काम करने का अनुभव मिलना शामिल है।

वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात का नया रिकॉर्ड

यूरोप में गोला-बारूद की बढ़ती मांग के बीच भारत के समग्र रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 23,622 करोड़ रुपये था। इस प्रकार सालाना आधार पर रक्षा निर्यात में 62.66 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों यानी डिफेंस पीएसयू का निर्यात 21,071 करोड़ रुपये रहा। जबकि प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने 17,353 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात किया। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों के निर्यात में 151 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि प्राइवेट क्षेत्र की वृद्धि दर 14 प्रतिशत रही। इसी अवधि में भारत ने 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात किया।

सरकारी कंपनियों की बढ़ी भूमिका, प्राइवेट सेक्टर के लिए भी अवसर

भारत के रक्षा निर्यात विस्तार में सरकारी रक्षा कंपनियों की अहम भूमिका रही है। गोला-बारूद के उत्पादन में म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इसका गठन 2021 में तत्कालीन आयुध निर्माणी बोर्ड के पुनर्गठन के बाद हुआ था। इस सुधार के तहत बोर्ड के 41 कारखानों के नेटवर्क को अलग-अलग रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विभाजित किया गया। इसका उद्देश्य उत्पादन व्यवस्था में दक्षता बढ़ाना, कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाना और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना था।

इसके बाद म्यूनिशन्स इंडिया जैसी कंपनियों ने घरेलू सैन्य जरूरतों के अलावा विदेशी बाजारों में भी ग्राहकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। दूसरी ओर, निजी रक्षा कंपनियों की भागीदारी भी भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को व्यापक बना रही है। सरकारी और निजी कंपनियों की संयुक्त क्षमता भारत को रक्षा उत्पादन के अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर देती है।

'मेक इन इंडिया' से ग्लोबल डिफेंस मार्केट तक

भारत सरकार ने 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य घरेलू सशस्त्र बलों की जरूरतों को देश के भीतर पूरा करने की क्षमता विकसित करना और विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।

रक्षा निर्यात में वृद्धि से कंपनियों को घरेलू ऑर्डर के अलावा नए बाजारों से भी मांग मिल सकती है। इससे उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने और उद्योग के विस्तार में मदद मिल सकती है। बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के कई देशों ने अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत किया है। उन्होंने यूक्रेन को सैन्य सहायता दी है। ऐसे में इन देशों को भारतीय गोला-बारूद की आपूर्ति और रूस के साथ भारत के पारंपरिक संबंधों के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इन लेनदेन को व्यावसायिक पहलुओं से प्रेरित बताया। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपने रक्षा निर्यात बाजार का विस्तार करते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों, अंतिम उपयोगकर्ता संबंधी प्रतिबद्धताओं और प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंधों का संतुलन बनाए रखे।

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