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धर्म परिवर्तन से अपने आप खत्म नहीं होता ST का दर्जा, इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, बताया किस आधार पर तय होगी आदिवासी पहचान

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला दिया है। अदालत ने एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल दूसरे धर्म में परिवर्तन (Conversion) करने से ही किसी व्यक्ति का अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा अपने आप समाप्त नहीं होता

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Sep 24, 2026 पर 10:53 AM
धर्म परिवर्तन से अपने आप खत्म नहीं होता ST का दर्जा, इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, बताया किस आधार पर तय होगी आदिवासी पहचान
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि धर्म परिवर्तन से अपने आप खत्म नहीं होता ST दर्जा

Allahabad High Court: धर्म परिवर्तन करने मात्र से किसी व्यक्ति का अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe-ST) का दर्जा अपने आप समाप्त नहीं हो जाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक अहम टिप्पणी में कहा है कि किसी व्यक्ति का ST दर्जा जारी रहेगा या नहीं, इसका फैसला केवल उसके धर्म के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए यह देखना होगा कि वह व्यक्ति अपनी जनजातीय पहचान, परंपराओं, सामाजिक व्यवस्था और संबंधित जनजातीय समुदाय से जुड़ाव को अब भी बनाए हुए है या नहीं।

जस्टिस अरुण कुमार की पीठ ने यह टिप्पणी चिंताद आनंद बनाम आंध्र प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2026 के फैसले पर भरोसा करते हुए की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ST दर्जे का सवाल इस बात से जुड़ा है कि संबंधित व्यक्ति अपनी जनजातीय पहचान को लगातार बनाए हुए है या नहीं।

क्या है पूरा मामला?

हाईकोर्ट में निन्हकी उर्फ नैमुनिशा की ओर से याचिकाएं दाखिल की गई थीं। निन्हकी ने खुद को भुइयां (Bhuiya) अनुसूचित जनजाति समुदाय का सदस्य बताया था। मामला सोनभद्र के डिप्टी कलेक्टर की ओर से जारी तीन आदेशों से जुड़ा था, जिनमें उनके पक्ष में हुई जमीन की तीन बिक्री को अमान्य घोषित कर दिया गया था।

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