Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में मृतकों की संख्या 6 हुई! भरभराकर गिरी इमारत, CCTV में दिखा खौफनाक मंजर

Delhi Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में लड़कों के पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में इस्तेमाल हो रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार को ढह गई। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई। जबकि मलबे में फंसे करीब 15-20 और लोगों को निकालने के लिए रात तक कई एजेंसियों का बचाव अभियान जारी रहा

अपडेटेड Sep 07, 2026 पर 8:08 AM
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Delhi Building Collapse: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से 6 की मौत हो चुकी है

Delhi Building Collapse: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार (6 सितंबर) को गिरी इमारत के हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। हादसे के बाद सामने आए CCTV फुटेज में इमारत के अचानक भरभराकर गिरने के बाद सड़क पर धूल का गुबार छा जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है। घटनास्थल पर अब भी राहत और बचाव अभियान जारी है। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में लड़कों के पेइंग गेस्ट (PG) के रूप में इस्तेमाल हो रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला बिल्डिंग रविवार दोपहर में अचानक से ढह गई। जबकि मलबे में फंसे करीब 15-20 और लोगों को निकालने के लिए रात तक कई एजेंसियों का बचाव अभियान जारी रहा।

देर रात चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान एक और शव बरामद किया गया, जिसके बाद मृतकों की संख्या छह हो गई। भारी मलबे के बीच किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें लगातार मलबा हटाने और तलाशी अभियान में जुटी रहीं।

दोपहर करीब 1:30 बजे मिली थी इमारत गिरने की सूचना


पुलिस के मुताबिक, सत्य निकेतन में इमारत गिरने की सूचना दिल्ली फायर सर्विस को रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे मिली थी। सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवाओं और बचाव दलों को मौके पर भेजा गया। रेस्क्यू टीमों ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए अभियान शुरू किया। पुलिस ने इससे पहले बताया था कि 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। हादसे के मामले में कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है।

अवैध निर्माण पर MCD का बड़ा एक्शन

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। खासतौर पर ऐसे इलाकों में रहने वाले छात्रों और PG में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। हादसे के बाद MCD ने चार मंजिल से अधिक वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील करने का आदेश दिया है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि इमारत के निर्माण की अनुमति देने में यदि कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सत्य निकेतन हादसे के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। चार मंजिल से अधिक वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल हटाया जाएगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने एक बयान में कहा कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में 10 घायल लोगों को लाया गया है।

पूर्व मुख्य सचिव ने उठाए निर्माण व्यवस्था पर सवाल

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव ओमेश सहगल ने कहा कि सत्य निकेतन की घटना को महज एक अकेली घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली के कई इलाकों में कथित अनधिकृत निर्माण पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कुछ इमारतों में स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण, बाद में अतिरिक्त मंजिलें जोड़ने और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। उन्होंने ऐसे इलाकों में नए निर्माण पर रोक लगाने की जरूरत भी बताई, जहां पहले से ही आबादी और निर्माण का दबाव बहुत अधिक है।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक घमासान

सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र और PG में रहने वाले युवा रहते हैं। हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। कांग्रेस नेता और AICC उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने दिल्ली की BJP सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली में अपने भविष्य के सपने लेकर आने वाले छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में एक तरह का माफिया काम कर रहा है। ऐसी घटनाओं में सबसे ज्यादा नुकसान उन परिवारों का होता है, जिनके बच्चे भविष्य बनाने के लिए राजधानी आते हैं।

NSUI ने रेस्क्यू ऑपरेशन पर उठाए सवाल

NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने दावा किया कि मलबे से निकाले गए कई छात्र मृत थे और उनके संगठन के कुछ साथियों को भी अभियान के दौरान गंभीर चोटें आई हैं। जाखड़ ने कहा कि बचाव अभियान मुश्किल परिस्थितियों में चलाया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेडिकल टीम, पुलिस और दमकल विभाग को घटनास्थल पर तेजी से पहुंचना चाहिए था और शुरुआती प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, बचाव अभियान में शामिल एजेंसियां लगातार मलबा हटाने और संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश में जुटी रहीं।

BJP युवा मोर्चा ने भी जताई चिंता

दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत चौधरी ने भी स्थिति को गंभीर बताया और राहत एवं बचाव अभियान में तेजी लाने की अपील की। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि इमारत का निर्माण किन नियमों के तहत हुआ था और क्या इसमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। FIR और जांच के बाद ही हादसे की पूरी जिम्मेदारी और लापरवाही की तस्वीर साफ हो सकेगी।

मकान मालिक पर केस दर्ज

पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और अन्य लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया, "यह इमारत पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। आरोप है कि ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम हो रहा था जिसके कारण इमारत ढह गई। आरोपित लोगों की तलाश के लिए कई टीम गठित की गई हैं।" जब बचाव दल मलबे को हटाकर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे थे तो स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शी भी इस मुश्किल प्रयास में उनके साथ शामिल हो गए। उन्होंने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की।

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