दिल्ली में पानी और सीवर व्यवस्था बदलने की बड़ी तैयारी! बिछेगा 1,034 KM लंबा सीवर नेटवर्क, 113 गांवों समेत 358 कॉलोनियों को मिलेगा फायदा
Delhi Water-Sewer News: दिल्ली के बाहरी इलाकों में सीवर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 3,113.67 करोड़ रुपये की लागत से 29 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज पंपिंग स्टेशन बनाए जाने हैं। इस परियोजना के तहत 358 अवैध कॉलोनियों और 113 गांवों को सीवरेज सुविधाओं से जोड़ने का लक्ष्य है
Delhi Water-Sewer News: दिल्ली में पानी की सप्लाई बेहतर करने के लिए चंद्रावल में नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया गया है (फोटो- AI)
Delhi Water-Sewer News: दिल्ली में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने, सीवर व्यवस्था को मजबूत करने और यमुना नदी में बिना ट्रीटमेंट वाला गंदा पानी जाने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं बनाई गई हैं। इस क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज यानी 22 अक्टूबर को दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने वाले हैं। इन परियोजनाओं पर कुल 8,941.22 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है। इनमें नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाने से लेकर पुरानी सुविधाओं को अपग्रेड करने, नई सीवर लाइनें बिछाने और घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने तक के काम शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दिल्ली के लोगों को बेहतर जल आपूर्ति और सीवरेज सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ यमुना में प्रदूषण कम करना है।
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर को राजधानी में 8,941 करोड़ रुपये की सीवर परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। नजफगढ़ इलाके से शुरू होने वाली इन परियोजनाओं में एक नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और नई सीवर लाइनें शामिल हैं।
चंद्रावल में 477 MLD क्षमता का नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
हमारे सहयोगी न्यूज 18 के मुताबिक, दिल्ली में पानी की आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए चंद्रावल में 298.3 करोड़ रुपये की लागत से 477 एमएलडी क्षमता का नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया गया है। एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन, पानी के प्यूरिफिकेशन की क्षमता मापने की इकाई है। इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 47.7 करोड़ लीटर पानी को ट्रीट करने की है।
यह नया प्लांट चंद्रावल-I और चंद्रावल-II की पुरानी इकाइयों की जगह लेगा। ये दोनों प्लांट क्रमशः 1935 और 1955 में स्थापित किए गए थे। नई सुविधा से राजधानी के लगभग 22 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इन इलाकों के लोगों को होगा फायदा
इस परियोजना से सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल, बल्लीमारान, करोल बाग, पटेल नगर, राजेंद्र नगर और नई दिल्ली समेत कई इलाकों में जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। पुरानी इकाइयों के स्थान पर नई तकनीक और बेहतर क्षमता वाली व्यवस्था स्थापित होने से पानी के शोधन की प्रक्रिया को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा, बवाना में 13.48 करोड़ रुपये की लागत से 2 एमजीडी क्षमता का वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट भी स्थापित किया गया है। इससे उपलब्ध जल संसाधनों का दोबारा उपयोग करने में मदद मिलेगी। इस परियोजना से करीब 67 हजार लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
यमुना की सफाई के लिए आठ STP की क्षमता बढ़ाई जाएगी
दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। परियोजना के तहत आठ मौजूदा STP को अपग्रेड करने के लिए करीब 1,041 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन प्लांटों की कुल सीवेज शोधन क्षमता को 78.2 एमजीडी से बढ़ाकर 140.8 एमजीडी करने की योजना है। एमजीडी का मतलब मिलियन गैलन प्रतिदिन है। क्षमता बढ़ने से अधिक मात्रा में गंदे पानी का प्यूरिफिकेशन किया जा सकेगा। इस काम से लगभग 78.5 लाख लोगों को लाभ मिलने का अनुमान है।
इसके साथ ही ओखला में 1,161 करोड़ रुपये की लागत से 124 एमजीडी क्षमता वाला नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना भी शामिल है। रिठाला फेज-I और कोंडली फेज-I, II और III के STP को भी अपग्रेड किया जाएगा। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सीवेज को बिना प्यूरिफिकेशन के नदियों और नालों में जाने से रोकना है। सीवेज का उचित ट्रीटमेंट होने से यमुना में प्रदूषण का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, नदी की वास्तविक स्थिति में सुधार इस बात पर भी निर्भर करेगा कि सीवेज नेटवर्क का संचालन और रखरखाव कितना प्रभावी रहता है।
358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों तक पहुंचेगी सीवर सुविधा
दिल्ली के बाहरी इलाकों में सीवर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 3,113.67 करोड़ रुपये की लागत से 29 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज पंपिंग स्टेशन बनाए जाने हैं। इस परियोजना के तहत 358 अवैध कॉलोनियों और 113 गांवों को सीवरेज सुविधाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे लगभग 36.29 लाख लोगों को लाभ मिलने का अनुमान है।
इन इलाकों में सीवर नेटवर्क की कमी के कारण गंदे पानी के निपटान की समस्या सामने आती है। नई परियोजनाओं के माध्यम से सीवेज को व्यवस्थित तरीके से एकत्र कर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके अलावा, करीब 1,691 करोड़ रुपये की लागत से 12 सीवर लाइनों और घरेलू सीवर कनेक्शन से जुड़ी परियोजनाओं के तहत कुल 1,034 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बिछाया जाएगा। इस नेटवर्क से लगभग 25.82 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
गोकलपुर और रन्होला में सीवर कनेक्शन का काम
दिल्ली के कुछ इलाकों में सीवर नेटवर्क से घरों को जोड़ने का काम भी किया गया है। गोकलपुर में 13 कॉलोनियों के 18,768 घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे करीब 1.07 लाख लोगों को फायदा पहुंचने का अनुमान है। वहीं, रन्होला की 48 अनधिकृत कॉलोनियों में लगभग 210 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनें बिछाई गई हैं। इस परियोजना से करीब 3.31 लाख लोगों को सीवरेज सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
इन कार्यों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि केवल मुख्य सीवर लाइन बिछाना पर्याप्त नहीं होता। घरों को नेटवर्क से जोड़ना और सीवेज को संबंधित ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाना भी जरूरी है। इससे खुले में गंदा पानी बहने और नालों में सीवेज पहुंचने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
नरेला और बवाना में भी बिछेंगी सीवर लाइनें
सीवरेज नेटवर्क के विस्तार की योजना में नरेला के पल्ला और खेड़ा खुर्द इलाके भी शामिल हैं। यहां लगभग 86 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनें बिछाने और 19,500 घरेलू सीवर कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा, बवाना के बाजितपुर ठाकरान और औचंदी क्षेत्रों में भी सीवर नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इस परियोजना में लगभग 173 किलोमीटर सीवर लाइनें बिछाने और 57,606 घरों को सीवर कनेक्शन देने का प्रस्ताव है।
दिल्ली के लोगों को क्या होगा फायदा?
इन परियोजनाओं का असर दिल्ली में पानी की आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था और पर्यावरण प्रबंधन पर पड़ने की उम्मीद है। इनके प्रमुख संभावित लाभ इस प्रकार हैं:-
पेयजल आपूर्ति में सुधार: चंद्रावल के नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से कई प्रमुख इलाकों को लाभ मिल सकता है।
सीवर नेटवर्क का विस्तार: 1,034 किलोमीटर नई सीवर लाइनें बिछाने से अधिक घरों को नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।
गांवों और कॉलोनियों को सुविधा: 113 गांवों और 358 अनधिकृत कॉलोनियों तक सीवरेज सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य है।
सीवेज प्यूरिफिकेशन क्षमता में बढ़ोतरी: पुराने STP को अपग्रेड करने और नया प्लांट बनाने से अधिक गंदे पानी का शुद्धिकरण संभव होगा।
यमुना प्रदूषण कम करने की कोशिश: नालों से सीवेज को रोककर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने से नदी में बिना शुद्धिकरण वाला पानी जाने की मात्रा घटाने में मदद मिल सकती है।