Race Course Mosque Case: दिल्ली वक्फ बोर्ड ने 300 साल पुरानी रेस कोर्स मस्जिद की सुरक्षा की मांग! बिजली और पानी कनेक्शन कटने पर बवाल

Race Course Mosque Case: दिल्ली में 'रेस कोर्स मस्जिद' को खाली करने का नोटिस देने और उसकी पानी एवं बिजली की आपूर्ति बंद किये जाने बाद अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि ध्वस्तीकरण अभियान के तहत मस्जिद के आसपास के इलाके में भी बिजली-पानी की सुविधाएं बंद कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, इलाके के निवासियों को परिसर खाली करने के लिए कहा गया है

अपडेटेड Oct 22, 2026 पर 10:02 AM
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Race Course Mosque Case: रेस कोर्स रोड इलाके में जारी ध्वस्तीकरण अभियान के कारण करीब 700 परिवारों के विस्थापित होने की आशंका है

Race Course Mosque Case: राजधानी दिल्ली के रेस कोर्स रोड इलाके में स्थित करीब 300 साल पुरानी मस्जिद को लेकर एक नया बड़ा विवाद सामने आया है। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने मस्जिद की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वहां बिजली-पानी की आपूर्ति बहाल कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। बोर्ड का आरोप है कि 7 अक्टूबर को झुग्गियों को हटाने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति भी काट दी गई। इसके अलावा, बोर्ड ने दावा किया है कि कुछ लोग खुद को भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) का अधिकारी बताकर मस्जिद पहुंचे और इमाम को तीन दिन के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अधिकारियों को लिखा पत्र

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) तनवीर अहमद ने 19 अक्टूबर को संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह पत्र अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली जिले के संभागीय आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेट को भी भेजा गया।


पत्र में बोर्ड ने मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान को वक्फ संपत्ति बताते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। बोर्ड के मुताबिक, मस्जिद और कब्रिस्तान करीब दो बीघा क्षेत्र में फैले हुए हैं। इन्हें 8 सितंबर 1977 को दिल्ली प्रशासन की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना के तहत वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचित किया गया था।

बोर्ड का कहना है कि मस्जिद का प्रत्यक्ष मैनेजमेंट और नियंत्रण दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास है। यहां बोर्ड द्वारा नियुक्त इमाम पांचों वक्त की नमाज अदा कराते हैं। इसी आधार पर बोर्ड ने अधिकारियों से मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखने और धार्मिक स्थल की स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है।

मस्जिद में बिजली-पानी काटने का आरोप

वक्फ बोर्ड की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, 7 अक्टूबर को रेस कोर्स रोड इलाके में झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई के दौरान मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। रेस कोर्स मस्जिद को खाली करने का नोटिस देने और उसकी पानी एवं बिजली की आपूर्ति बंद किए जाने बाद अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि ध्वस्तीकरण अभियान के तहत मस्जिद के आसपास के इलाके में भी बिजली-पानी की सुविधाएं बंद कर दी गई हैं।

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि यह कार्रवाई प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित मस्जिद तक ही सीमित नहीं है। बल्कि आसपास के इलाके में रहने वाले कई परिवार भी इससे प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, मस्जिद प्रबंधन को 19 अक्टूबर के आसपास परिसर खाली करने का नोटिस दिया गया था। इसके लिए छह दिन का समय दिया गया।

अवैध कब्जे को लेकर चेतावनी!

नोटिस में कहा गया था कि यह जमीन केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (LDO) की है। इसमें अवैध कब्जे और निर्माण के खिलाफ चेतावनी भी दी गई थी। बताया जाता है कि एनडीएमसी ने सात अक्टूबर को मस्जिद की पानी और बिजली की आपूर्ति काट दी थी।

एनडीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अदालत के आदेश पर इलाके में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा है। एलडीओ के आदेश के बाद मस्जिद समेत कई संपत्तियों के पानी और बिजली के कनेक्शन काट दिए गए हैं।" आजादी से पहले बनी यह मस्जिद एनडीएमसी की विरासत सूची में ग्रेड-2 स्मारक के रूप में दर्ज है। हालांकि, एलडीओ का कहना है कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर बना है और इसे अतिक्रमण मानता है।

700 परिवारों के विस्थापित होने की आशंका

रेस कोर्स रोड इलाके में जारी ध्वस्तीकरण अभियान के कारण करीब 700 परिवारों के विस्थापित होने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके के निवासियों को परिसर खाली करने के लिए कहा गया है। उन्हें कुछ किलोमीटर दूर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए गए हैं। बोर्ड ने अपने पत्र में कहा कि यह कार्रवाई कथित तौर पर बिना किसी पूर्व सूचना और स्पष्ट वैध कारण के की गई। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि मस्जिद में वर्ष 1976 से बिजली का वैध कनेक्शन मौजूद था।

बोर्ड के मुताबिक, मस्जिद नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की विरासत सूची में 22वें क्रम पर दर्ज है। साथ ही, इसे UMEED पोर्टल पर भी रजिस्ट्रेशन बताया गया है। वक्फ बोर्ड ने अधिकारियों से मांग की है कि बिजली और पानी की आपूर्ति बंद किए जाने के कारणों की जांच की जाए और आवश्यक कार्रवाई करते हुए दोनों सुविधाएं बहाल कराई जाएं।

इमाम को तीन दिन में परिसर खाली करने के निर्देश देने का दावा

मामले में एक और महत्वपूर्ण आरोप सामने आया है। वक्फ बोर्ड के पत्र के अनुसार, 17 अक्टूबर को कुछ लोग मस्जिद पहुंचे और उन्होंने खुद को भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) का अधिकारी बताया। बोर्ड का आरोप है कि इन लोगों ने मस्जिद के इमाम को तीन दिन के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया। कथित तौर पर यह भी कहा गया कि इसके बाद मस्जिद को हटाया जाएगा।

हालांकि, वक्फ बोर्ड के CEO तनवीर अहमद ने पुष्टि की है कि मस्जिद को गिराने के संबंध में कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला था। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने भी कहा कि L&DO ने मस्जिद को लेकर कोई नोटिस जारी नहीं किया था। इसलिए, मस्जिद को खाली कराने या हटाने के कथित निर्देशों की आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। वक्फ बोर्ड ने इसी मामले में अधिकारियों से हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

मस्जिद तक पहुंचने पर प्रतिबंध, पुलिसकर्मी तैनात

मस्जिद से जुड़े विवाद के बीच इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी दिखाई दी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को मौके का दौरा करने पर मस्जिद के एंट्री गेट पर प्रतिबंध नजर आया। परिसर के आसपास पुलिसकर्मी तैनात थे। एंट्री गेट बंद था। रिपोर्ट में बताया गया कि बंद गेट के पास हटाई गई झुग्गियों का मलबा और उनके अवशेष दिखाई दे रहे थे। मस्जिद से जुड़े मौलाना एमएम हारून राही ने कहा कि लोगों को नमाज अदा करने के लिए इलाके में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।

वहीं, एक सूत्र ने अखबार को बताया कि इलाके में प्रवेश पर रोक लगाने का उद्देश्य अतिक्रमण करने वालों को दोबारा वहां आने से रोकना था। सूत्रों के मुताबिक, झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई कुछ दिन पहले हुई थी। उसका मलबा अभी तक हटाया नहीं गया था। इस प्रकार, एक ओर वक्फ बोर्ड मस्जिद तक पहुंच और उसकी बुनियादी सुविधाएं बहाल कराने की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासनिक सूत्रों ने इलाके में प्रवेश प्रतिबंधित करने को अतिक्रमण रोकने की कार्रवाई से जोड़ा है।

53.2 एकड़ जमीन L&DO के पास, CPWD को रखरखाव की जिम्मेदारी

रेस कोर्स रोड इलाके की जमीन को लेकर भी इस मामले में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित क्षेत्र की कुल 53.2 एकड़ जमीन भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) की है। इस जमीन का रखरखाव और विकास केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) को सौंपा गया है। इसी इलाके में झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई की गई थी।

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हालांकि, जमीन के स्वामित्व और रखरखाव की जिम्मेदारी से जुड़े इन तथ्यों के बावजूद मस्जिद की कानूनी स्थिति, बिजली-पानी के कनेक्शन और वहां धार्मिक गतिविधियां जारी रखने से जुड़े सवालों पर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि मस्जिद और उससे लगा कब्रिस्तान अधिसूचित वक्फ संपत्ति हैं। दूसरी ओर, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के संदर्भ में प्रशासनिक सूत्रों ने परिसर तक पहुंच सीमित किए जाने की बात कही है।

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