दिल्ली की हवा में तैर रहे ड्रग-रेसिस्टेंट सुपरबग्स! जेएनयू की रिसर्च में इस डरावनी बात का खुलासा

इस शोध के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों से हवा के नमूने लिए गए। जांच के दौरान जब शोधकर्ताओं ने शुद्ध बैक्टीरिया को अलग किया, तो पाया गया कि करीब 74 प्रतिशत बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स के खिलाफ प्रतिरोधी थे। वहीं, 36 प्रतिशत बैक्टीरिया कई दवाओं पर भी असर नहीं दिखने देते थे

अपडेटेड Jan 02, 2026 पर 4:42 PM
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सुपरबग तैर रहे हैं जो कई बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है।

दिल्ली की जहरीली हवा में ऐसे सुपरबग तैर रहे हैं जो कई बीमारियों के खतरे को बढ़ा रहे हैं। एक नई स्टडी में चेतावनी दी गई है कि दिल्ली-NCR की सर्दियों की बेहद प्रदूषित हवा में अब खतरनाक दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया भी फैल रहे हैं। इससे प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ गए हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल साइंसेज के शोधकर्ताओं के अनुसार, हवा में मौजूद ये “सुपरबग्स” एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकी बैक्टीरिया का एक रूप हैं। ये बैक्टीरिया घर के अंदर और बाहरदोनों जगह की हवा में पाए गए हैं।

 सर्दियों में बढ़ जाती है बैक्टीरिया 

शोध में बताया गया है कि सर्दियों के मौसम में इन बैक्टीरिया की संख्या काफी बढ़ जाती है। इससे लोगों, खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए स्वास्थ्य खतरे और गंभीर हो सकते हैं। नेचर जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के नतीजों से पता चला है कि हवा में पाए गए इन बैक्टीरिया में मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकी (MRS) भी शामिल हैं। ये ऐसे बैक्टीरिया हैं, जिन पर आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स असर नहीं करतीं। इसका मतलब है कि इनके कारण होने वाले संक्रमण का इलाज करना ज्यादा मुश्किल हो जाता है।

दवाओं का भी असर नहीं 

इस शोध के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों से हवा के नमूने लिए गए। जांच के दौरान जब शोधकर्ताओं ने शुद्ध बैक्टीरिया को अलग किया, तो पाया गया कि करीब 74 प्रतिशत बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स के खिलाफ प्रतिरोधी थे। वहीं, 36 प्रतिशत बैक्टीरिया कई दवाओं पर भी असर नहीं दिखने देते थे। स्टडी में स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया की आठ प्रजातियों का विश्लेषण किया गया। इनमें से दो प्रजातियां ऐसी पाई गईं, जो इंसानों और जानवरों दोनों में सबसे ज्यादा संक्रमण फैलाती हैं। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।


मुख्य शोधकर्ता माधुरी सिंह ने बताया कि सर्दियों में इन बैक्टीरिया की बढ़ी हुई संख्या यह समझाने में मदद करती है कि इस मौसम में सांस से जुड़ी बीमारियां क्यों ज्यादा गंभीर हो जाती हैं और लंबे समय तक बनी रहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मानसून के महीनों में बैक्टीरिया की मात्रा कम पाई गई। यह अध्ययन इस बढ़ती चिंता को सामने लाता है कि शहरी इलाकों का वातावरण अब एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया का ठिकाना बनता जा रहा है। इससे लोगों की सेहत पर बड़ा खतरा पैदा हो रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे बैक्टीरिया इसी तरह फैलते रहे, तो आम संक्रमण भी भविष्य में जानलेवा साबित हो सकते हैं।

दुनिया भर में करीब 42 लाख लोगों की मौत

दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिनी जाती है। यहां हवा की गुणवत्ता अक्सर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय मानकों से 7 से 10 गुना तक खराब रहती है। लंबे समय तक ऐसी जहरीली हवा में सांस लेने से फेफड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियां, कैंसर और कई तरह की पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। WHO के अनुसार, बाहरी वायु प्रदूषण की वजह से हर साल दुनिया भर में करीब 42 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है। यह आंकड़ा बताता है कि वायु प्रदूषण एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।

डॉक्टरों की सलाह है कि लोग प्रदूषण के संपर्क में कम से कम रहें, खासकर सुबह और देर शाम के समय, जब हवा सबसे ज्यादा खराब होती है। बाहर निकलते समय अच्छी क्वालिटी का मास्क पहनना फायदेमंद होता है। इसके अलावा, घर के अंदर हवा को साफ रखने की कोशिश करें, साफ-सफाई पर ध्यान दें और पौष्टिक भोजन लें, ताकि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे। ये सावधानियां अपनाकर प्रदूषण से होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

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