E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर मचे बवाल के बीच मारुति की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?

E20 Petrol Row: नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन औ राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाहन उद्योग के दिग्गजों ने E-20 फ्यूल को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। एथेनॉल पेट्रोल को लेकर चिंताओं के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है

अपडेटेड Jul 05, 2026 पर 12:30 PM
E20 Petrol Row: मारुति सुजुकी की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से नया खुलासा हुआ है

E20 Petrol Row: देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर लोगों के बीच मौजूद चिंताओं और बहस के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है। नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन औ राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाहन उद्योग के दिग्गजों ने E-20 फ्यूल को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की एक रिलीज के मुताबिक इस उच्च स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी के कॉरपोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने कंपनी के सर्विस डेटा के आधार पर एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

मारुति सुजुकी की 1.5 करोड़ पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग से क्या पता चला?


प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मारुति सुजुकी के राहुल भारती ने एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने कुल 2.84 करोड़ कारों की सर्विसिंग की थी। इन गाड़ियों में से 1.5 करोड़ से अधिक कारें तीन साल से ज्यादा पुरानी थीं। यानी वे तकनीकी रूप से ई20 सर्टिफाइड नहीं थीं।

भारती ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियों की सर्विसिंग के बावजूद फील्ड से ई20 फ्यूल की वजह से इंजन में जंग, सामान्य टूट-फूट या गाड़ी के किसी भी पार्ट/कंपोनेंट की लाइफ खराब होने की एक भी शिकायत या समस्या सामने नहीं आई है। उन्होंने भरोसा दिया कि ई10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों का ई20 ईंधन के साथ सभी मापदंडों पर परीक्षण किया जा चुका है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।

माइलेज पर कितना पड़ता है असर? मारुति ने समझाया पूरा गणित

माइलेज में गिरावट के दावों पर मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ने स्पष्ट गणित समझाया। उन्होंने कहा कि ई10 पेट्रोल की तुलना में ई20 पेट्रोल की कैलोरीफिक वैल्यू लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम होती है। माइलेज पर इसका असर भी केवल इसी सीमा तक सीमित है। जैसे कि अगर कोई कार 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है तो ई20 की वजह से उसका माइलेज केवल 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर ही कम होगा।

इसकी तुलना में टायर का प्रेशर, ड्राइविंग का तरीका, सही गियर का इस्तेमाल, अचानक एक्सीलरेट करना, बार-बार ब्रेक लगाना और गाड़ी का रखरखाव जैसी वजहें माइलेज में इससे कहीं ज्यादा बड़ा अंतर पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि माइलेज में होने वाले इस मामूली नुकसान की भरपाई बेहतर एक्सीलरेशन, बेहतर एंटी-नॉकिंग और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल से होने वाले बेहद कम प्रदूषण से पूरी हो जाती है।

क्या बाजार में उपलब्ध हैं रेट्रोफिटमेंट किट?

राहुल भारती ने साफ किया कि वाहनों को ई20 कंप्लायंस की तय सीमा से कहीं अधिक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बाजार में पुरानी गाड़ियों को ई20 के अनुकूल बनाने के लिए कोई भी रेट्रोफिटमेंट किट नहीं बेची जा रही है। इस तरह के समाधान फिलहाल सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के स्तर तक ही सीमित हैं।

टोयोटा और हीरो मोटोकॉर्प ने भी जताई सहमती

प्रेस कॉन्फ्रेंस में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव उद्योग सबसे कड़े रेग्युलेटेड क्षेत्रों में से एक है। वाहनों को बाजार में उतारने से पहले और बाद में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

भारत यूएनईसीई (UNECE) का हिस्सा है, इसलिए यहां के टेस्टिंग प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ई20 को लागू करने का निर्णय पुरानी गाड़ियों पर कड़े परीक्षणों के बाद ही लिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू किए गए E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन विशेष रूप से केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं जो भविष्य की नीति की दिशा तय करते हैं।

वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माताओं में से एक हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर आशुतोष वर्मा ने भी मारुति के दावों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने व्यापक सर्विस डेटा का विश्लेषण किया है और पाया है कि ई20 ईंधन पर चलने वाले वाहनों में पहले के ईंधन की तुलना में किसी भी तरह के नुकसान या खराबी की कोई अधिक घटना सामने नहीं आई है।

वैज्ञानिक सबूतों और वैश्विक मानकों पर आधारित है ई20 प्रोग्राम

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने बताया कि एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को सभी हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसे वैज्ञानिक सबूतों और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए व्यापक परीक्षणों का पूरा समर्थन प्राप्त है जो वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है। वर्तमान में ई20 ईंधन बीआईएस मानक और बीएस-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानदंडों के पूरी तरह अनुरूप है और देश के सभी रिटेल आउटलेट्स पर समान रूप से उपलब्ध है।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में टीवीएस मोटर कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रसाद कृष्णन, हुंडई मोटर इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट पुनीत आनंद और बजाज ऑटो लिमिटेड के सर्कल हेड (सेल्स- नॉर्थ एंड ईस्ट) मनप्रीत सिंह बिंद्रा सहित पूरे पैनल ने ई20 कार्यक्रम पर सामूहिक विश्वास जताया और उपभोक्ताओं के हर सवाल का पारदर्शिता से जवाब देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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