El Nino Shock: उबल रहे दुनिया के महासागर! जून में टूटा गर्मी का सारा रिकॉर्ड, सुपर अल नीनो मौसम को लेकर दे रहा खतरनाक संकेत

El Nino Shock: अल नीनो प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति को कहा जाता है। इसकी वजह से वायुमंडल में अधिक गर्मी निकलती है। यह पूरी दुनिया में हवा, बादलों और मौसम के पैटर्न को प्रभावित करता है। इसके चलते दुनिया भर में एक्स्ट्रीम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है

अपडेटेड Jul 01, 2026 पर 12:03 PM
El Nino Shock: अल नीनो के कारण आने वाले महीनों में गर्मी के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं

El Nino Shock: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दुनिया के महासागरों ने इतिहास का सबसे गर्म जून महीना दर्ज किया है। टेंप्रेचर मे इस उछाल के पीछे की वजह अल नीनो और जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले महीनों में गर्मी के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं। यूरोपीय संघ की कोपरनिकस मरीन सर्विस के आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून में वैश्विक औसत समुद्री सतह का तापमान 20.98 °C दर्ज किया गया है। इसने साल 2023 और 2024 में बने पिछले सभी रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है।

साल 2026 की पहली छमाही में लगातार बनी रही समुद्री हीटवेव

कोपरनिकस मरीन सर्विस के मुताबिक, जून के इस रिकॉर्ड ने साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में समुद्र में रही अभूतपूर्व गर्मी और लंबे समय तक चली समुद्री हीटवेव पर एक तरह से मुहर लगा दी है। इस साल की पहली छमाही (जनवरी से जून) में औसत समुद्री तापमान 20.04 °C दर्ज किया गया। ये साल 2024 की इसी अवधि में बने रिकॉर्ड से थोड़ा ही कम है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि एक संभावित ताकतवर अल नीनो मौसम पैटर्न की शुरुआत साल 2026 और अगले साल में महासागरों और वायुमंडल की गर्मी को और अधिक बढ़ा सकती है।


नए और अनजाने खतरों की ओर बढ़ रही है दुनिया

कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के निदेशक कार्लो बुओनटेंपो ने एक बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियां हमें एक बार फिर अनजान और अनियंत्रित क्षेत्र की ओर ले जा रही हैं। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि समुद्र के मौजूदा तापमान और आने वाले अल नीनो को देखते हुए हम अगले कुछ महीनों में गर्मी के कई और रिकॉर्ड टूटते हुए देख सकते हैं।

क्या होता है अल नीनो और कैसे लाता है तबाही?

अल नीनो प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति को कहा जाता है। इसकी वजह से वायुमंडल में अधिक गर्मी निकलती है। यह पूरी दुनिया में हवा, बादलों और मौसम के पैटर्न को प्रभावित करता है। इसके चलते दुनिया भर में एक्स्ट्रीम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए पेरू में विनाशकारी बाढ़ आना, अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भीषण सूखा पड़ना, ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में भयानक आग लगने जैसी घटनाओं को लिया जा सकता है।

ऐसी स्थिति फॉसिल फ्यूल जलाने से लंबे समय से चल रही ग्लोबल वार्मिंग के असर को और बढ़ा देती है। इससे पहले पिछले अल नीनो के अंतिम चरण यानी साल 2024 में जमीन और समुद्र दोनों का तापमान सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

2026 हो सकता है इतिहास का सबसे गर्म साल

कोपरनिकस मरीन सर्विस के मुख्य समुद्र विज्ञानी साइमन वैन गेनिप ने एक न्यूज ब्रीफिंग में कहा कि अल नीनो वर्ष की शुरुआत और आगमन के साथ हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि साल 2026 अब तक के दर्ज इतिहास के सबसे गर्म सालों में शामिल होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा अल नीनो के कारण हो रहा है लेकिन साथ ही वायुमंडल में लगातार छोड़ी जा रही ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से होने वाली वार्मिंग भी इसके लिए जिम्मेदार है।

महासागरों पर गहराता संकट

यह रिपोर्ट पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र की उस चेतावनी के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि दुनिया के महासागर गहरे संकट में हैं क्योंकि समुद्र तेजी से गर्म हो रहे हैं और उनका जलस्तर भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। महासागर पृथ्वी की जलवायु को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे इंसानों द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों से पैदा होने वाली अतिरिक्त गर्मी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा खुद सोख लेते हैं।

समुद्र के गर्म होने से वायुमंडल में नमी बढ़ती है। ये जो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों और विनाशकारी बारिश के लिए ईंधन का काम करती है। गर्म पानी सीधे तौर पर समुद्र का जलस्तर बढ़ाता है और समुद्री कोरल रीफ के ब्लीच होकर मरने का खतरा खड़ा हो जाता हैय़

82 प्रतिशत महासागरों पर हीटवेव का साया

इस साल के पहले छह महीनों में व्यापक मरीन हीटवेव ने दुनिया के लगभग 82 प्रतिशत महासागरों को प्रभावित किया है। साल 2024 के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा प्रभावित क्षेत्र है। मरीन हीटवेव (लंबे समय तक समुद्र का तापमान असामान्य रूप से उच्च रहना) मौसम को प्रभावित करने के साथ-साथ कोरल ब्लीचिंग को बढ़ावा देती है और समुद्री जीवों के लिए घातक साबित होती है।

भूमध्य सागर और उष्णकटिबंधीय प्रशांत में टूटे रिकॉर्ड

मर्केटर ओशन इंटरनेशनल द्वारा संचालित इस सर्विस के मुताबिक साल की पहली छमाही में वैश्विक समुद्री सतह के तापमान में काफी फर्क देखा गया:-

भूमध्य सागर: इसने जून में 24.3°C के साथ अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो 2023 और 2025 से अधिक है। साल के पहले छह महीनों में इस बेसिन का 98 प्रतिशत हिस्सा मरीन हीटवेव की चपेट में रहा। एक स्पैनिश जलवायु संस्थान के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भूमध्य सागर में सोमवार को एक हफ्ते की भीषण गर्मी के बाद मरीन हीटवेव की तीव्रता का नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

उष्णकटिबंधीय प्रशांत: इस क्षेत्र में भी जून का महीना अब तक का सबसे गर्म (27.26°C) रहा। इस क्षेत्र ने जनवरी से जून की अवधि के लिए अपने 2016 के रिकॉर्ड की बराबरी की है। सबसे तीव्र और लगातार वार्मिंग पश्चिमी भूमध्यरेखीय प्रशांत और पेरू व कैलिफोर्निया के तटों के पास देखी गई।

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