हिमाचल प्रदेश के मनाली में मॉनसून की तेज बारिश ने भारी तबाही मचा दी है। खासकर ब्यास नदी के उफान ने मनाली में कई इमारतों को नुकसान पहुंचाया है। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा शिकार बन गया मनाली का मशहूर शेर-ए-पंजाब रेस्टोरेंट, जो अपने उत्तम खाने और जगह की वजह से पर्यटकों व स्थानीय लोगों में काफी लोकप्रिय था। हालात ऐसे बने कि इस रेस्टोरेंट का अधिकांश हिस्सा बाढ़ की तेज धाराओं में बह गया और केवल इसका सामने वाला गेट ही बच पाया।
ब्यास नदी का जलस्तर रविवार रात से अचानक बढ़ गया था, जब लार्गी बांध से पानी छोड़ा गया। इससे नदी के तेज बहाव ने सड़कें, मकान, दुकानें और होटल तक को अपनी चपेट में ले लिया। मनाली-लेह हाईवे के कई हिस्से भी बाधित हो गए हैं, जिससे यात्रा में भारी परेशानी हो रही है। वरिष्ट अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बारिश अभी और तेज होने की संभावना है, जिससे खतरा बरकरार है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, जून से अब तक बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की वजह से 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और कई इलाकों में भारी जनसंपर्क बाधित हुआ है। कुल्लू जिले के मनाली में इस भीषण बारिश ने कई दुकानों और मकानों को उजाड़ दिया है, हालांकि समय रहते लोगों को निकाला गया जिससे जान-माल के बड़े नुकसान से बचा जा सका।
मानसून की इस भारी बारिश ने मनाली के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों और स्थानीय व्यवसायों को भी झटका दिया है। शेर-ए-पंजाब रेस्टोरेंट के ध्वस्त होने से न केवल स्थानीय लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि पर्यटकों को एक प्रतिष्ठित भोजन स्थल से भी वंचित होना पड़ा है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, चंबा और लाहौल- स्पीति जिलों में 'रेड' अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य जिलों में 'ऑरेंज' अलर्ट है। इस बीच, प्रशासन ने लोगों को नदी के किनारे और भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।
इस घटना ने मनाली में भीषण बाढ़ के खतरे को सामने लाया है और यह याद दिलाया है कि मौसम की अनिश्चितता के बीच सावधानी बरतना कितना जरूरी होता है। स्थानीय प्रशासन महोत्सव और पर्यटन के दौरान सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।