Himachal Cabinet decisions: हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। प्रदेशवासियों के लिए सौगातों का पिटारा खोलते हुए सुक्खू सरकार ने राज्य सरकार के लगभग सभी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में 12,000 पद सृजित करने और उनको भरने की मंजूरी दे दी। साथ ही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और वन मित्रों का मानदेय बढ़ाने को भी स्वीकृति प्रदान की।
मुख्यमंत्री सुक्खू की अध्यक्षता में हुई बैठक में, कैबिनेट ने जल शक्ति विभाग में पैरा पंप ऑपरेटर, पैरा फिटर और मल्टीपर्पस वर्कर समेत 4,090 पैरा-वर्कर को रखने को मंजूरी दी। कैबिनेट ने सहायक वन रक्षक नियुक्त करने की योजना को भी मंजूरी दी। इससे वन विभाग में 500 पद भरने का रास्ता साफ हो गया। हिमाचल कैबिनेट ने 100 और स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का फैसला किया, जिसके लिए एक नई स्कीम तैयार की जाएगी। एक बयान में कहा गया कि नई योजना आधारित भर्ती के तहत इन स्कूलों में 3,900 टीचिंग और 900 नॉन-टीचिंग पोस्ट भरने को भी मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट ने आंगनवाड़ी वर्कर्स का महीने का मानदेय 10,500 रुपये से बढ़ाकर 11,500 रुपये, आंगनवाड़ी सहायकों का 5,800 रुपये से बढ़ाकर 6,800 रुपये और वन मित्रों का 10,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये करने को मंजूरी दी। प्रदेश कैबिनेट ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात विशेष पुलिस अधिकारियों (SPOs) का मानदेय भी 500 रुपये प्रति महीना बढ़ाएने और 100% डिसेबिलिटी वाले लोगों की महीने की पेंशन 1 अप्रैल, 2026 से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने को भी स्वीकृति प्रदान की।
कैबिनेट ने 33 छोटे हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट्स, जिनमें से हर एक की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 5 MW से कम है, के अलॉटमेंट को कैंसिल करने को मंज़ूरी दी, क्योंकि डेवलपर्स उन्हें आगे बढ़ाने को लेकर सीरियस नहीं थे। कैबिनेट बैठक में कांगड़ा जिले की बोह वैली में आपदा प्रभावित परिवारों को एक विशेष राहत पैकेज देने का फैसला किया। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक उप समिति भी बनाई गई, जो राज्य सरकार के कर्मचारियों के उनके होम डिस्ट्रिक्ट और उसी डिस्ट्रिक्ट के अंदर ट्रांसफर को नियमित करने के लिए पूरी गाइडलाइन्स बनाएगी। कैबिनेट ने एम्बुलेंस लिंक रोड्स के डिजाइन, कंस्ट्रक्शन और सर्टिफिकेशन के लिए गाइडलाइन्स को मंजूरी दी, और उन्हें फॉर्मली एक अलग कैटेगरी के तौर पर मान्यता दी ताकि रोड कनेक्टिविटी को जितना हो सके उतना आसान बनाया जा सके।