UP के रेस्टोरेंट, होटल और कैफे में हुक्का पर बैन, इलाहाबाद हाई कोर्ट बोला- 'स्मोकिंग एरिया में भी Hookah Bars नहीं चल सकते'

Hookah Bars bans in UP: स्मोकिंग के खतरों पर चेतावनी देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार (29 सितंबर) को फैसला सुनाया कि स्मोकिंग के लिए तय जगह स्मोकर्स को धूम्रपान करने के लिए अलग जगह तो दे सकती है। लेकिन यह ऐसी जगह नहीं बन सकती जहां रेस्टोरेंट कमर्शियल तौर पर हुक्का परोसते रहें

अपडेटेड Sep 29, 2026 पर 5:02 PM
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Hookah Bars bans in UP: उत्तर प्रदेश में अब तय स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का बार नहीं चल सकते (फोटो- AI)

Hookah Bars bans in UP: उत्तर प्रदेश में अब होटल, रेस्तरां, कैफे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर डिजाइनेटेड स्मोकिंग जोन में भी ग्राहकों को हुक्का नहीं दिया जा सकेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार (29 सितंबर) को हुक्का बार से जुड़ी याचिकाओं को खारिज करते हुए बड़ा आदेश दिया। पीठ ने कहा कि यह गतिविधि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008 के तहत प्रतिबंधित है। जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस एके चौधरी की पीठ ने हुक्का बार चलाने से जुड़ी मुख्य याचिका समेत सभी संबद्ध याचिकाओं को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता का तर्क

याचिकाकर्ताओं ने उन रेस्टोरेंट के लिए तय स्मोकिंग जोन में हुक्का परोसने की अनुमति मांगी थी जिनके पास वैध फूड एस्टेब्लिशमेंट लाइसेंस हैं। साथ ही याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से अपने कामकाज में पुलिस के दखल को रोकने का अनुरोध किया था। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि तय स्मोकिंग जोन सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर लगी रोक का बस एक सीमित अपवाद है। ऐसे जोन में कोई सेवा देने की अनुमति नहीं है।


पीटीआई के मुताबिक, कोर्ट ने गौर किया कि नियमों में 2017 के संशोधन के बाद 'कोई अन्य सेवा' (any other service) शब्द को बदलकर 'कोई भी सेवा' (any service) कर दिया गया था। इससे यह साफ हो गया कि हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, जलता हुआ कोयला रखना, ग्राहक को परोसना या कोयला बदलना जैसी गतिविधियां सेवा देने के दायरे में आती हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि अगर तैयार हुक्का किसी ग्राहक को दिया जाता है और वह खुद उसका इस्तेमाल करता है, तो इसे सेवा देने के बजाय उपकरण किराए पर देना माना जाना चाहिए।

कोर्ट ने खारिज की याचिका

इस तर्क को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि हुक्का तैयार करने और परोसने में सेवा का तत्व शामिल है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस बात से कि ग्राहक खुद हुक्का चलाता है, गतिविधि की कानूनी प्रकृति नहीं बदलती...। कोर्ट ने साफ किया कि फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट और नगर निगम अधिकारियों के पास हुक्का बार चलाने के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को COTPA के तहत तलाशी लेने, जब्ती करने और दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है।

बेंच ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर साफ हवा में सांस लेने का नॉन-स्मोकर्स का मौलिक अधिकार, उन बिजनेस के अधिकार से ज्यादा अहम है जो प्रतिबंधित स्मोकिंग वाली गतिविधियां करते हैं। कोर्ट ने माना कि हुक्का बार चलाना और रेस्टोरेंट में हुक्का देना, लागू कानूनी प्रावधानों का साफ उल्लंघन है। इसी के साथ सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए पीठ ने आदेश दिया कि उसके फैसले की एक कॉपी जरूरी कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजी जाए।

तंबाकू पीने पर जज की चेतावनी

'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, अपने फैसले के आखिर में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानूनी सवाल से आगे बढ़कर हुक्का और तंबाकू पीने से सेहत को होने वाले खतरों पर बात की। कोर्ट ने बताया कि लगभग एक घंटे के हुक्का सेशन में अंदाजन 200 कश (Puffs) लिए जाते हैं। यह 100 सिगरेट पीने जितना ही नुकसानदायक है। कोर्ट ने इस गलतफहमी को भी खारिज कर दिया कि हुक्का सिगरेट से कम नुकसानदायक है। अदालत ने कहा कि हुक्का की लत लग सकती है। यह नुकसानदायक है। इसमें सिगरेट की तरह ही जहरीले केमिकल होते हैं।

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कोर्ट ने कहा, "यह 100 सिगरेट पीने जितना ही नुकसानदायक है। यह एक गलतफहमी है कि हुक्का सिगरेट से कम नुकसानदायक है। हुक्का भी सिगरेट की तरह ही लत लगाने वाला और नुकसानदायक है। इसमें सिगरेट की तरह ही जहरीले केमिकल होते हैं। इसके अलावा, सिगरेट के हर पैकेट पर कानूनी तौर पर जरूरी स्वास्थ्य चेतावनी होती है। हुक्के के मामले में भी ऐसी ही चेतावनी की जरूरत है ताकि उस कानूनी कमी को पूरा किया जा सके जिस पर तुरंत विधायी ध्यान देने की जरूरत है।"

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