West Bengal Election: आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मची हुई है। TMC के बागी विधायक हुमायूं कबीर की नई पार्टी 'जनता उन्नयन पार्टी (JUP)' ने मालदा जिले की वैष्णवनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवारी पेश कर दी है। खुद हुमायूं कबीर ने भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसके साथ ही पार्टी की ओर से मुस्तारा बीबी को भी उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की है, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
दरअसल, मुस्तारा बीबी ने यह आरोप लगाया है कि 'जनता उन्नयन पार्टी' से जुड़ने और उम्मीदवार घोषित होने के बाद उन्हें नागरिक स्वयंसेवी के पद से हटा दिया गया। उनका दावा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है। इस आरोप के बाद मालदा की राजनीति गरमा गई है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
बताया जा रहा है कि मुस्तारा बीबी पहले TMC की सक्रिय कार्यकर्ता रही हैं। उनके पति कुर्बान अंसारी स्थानीय स्तर पर तृणमूल से जुड़े रहे हैं। 22 दिसंबर को जब हुमायूं कबीर ने नई पार्टी के नाम की घोषणा की, तभी वैष्णवनगर सीट से मुस्तारा बीबी का नाम सामने आया। इसके तुरंत बाद इलाके में राजनीतिक हलचल और चर्चाएं तेज हो गई।
मुस्तारा बीबी वैष्णवनगर के बिननगर-1 ग्राम पंचायत की निवासी हैं। उनके पति कुर्बान अंसारी का कहना है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी है, क्योंकि वहां गुटबाजी के कारण उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि इस बार का चुनाव पूरी तरह बदला हुआ होगा और तृणमूल कांग्रेस को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। उनके अनुसार, आगामी चुनाव में असली मुकाबला भाजपा और अन्य दलों के बीच होगा।
वहीं, अपने पद से हटाए जाने के आरोपों पर मुस्तारा बीबी ने कहा कि वह कालियाचक थाने के अंतर्गत नागरिक स्वयंसेवी के रूप में काम कर रही थीं। उम्मीदवार बनने के बाद उनका नाम सूची से हटाया गया, लेकिन उन्हें इसका कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने कहा कि अब वे पूरी तरह राजनीति पर ध्यान देंगी और 'जनता उन्नयन पार्टी' के साथ मजबूती से चुनाव लड़ेंगी। उनका दावा है कि वे वैष्णवनगर से जीत दर्ज करेंगी।
हुमायूं कबीर की नई पार्टी और उतरे उम्मीदवारों ने बंगाल की चुनावी राजनीति में एक नया समीकरण खड़ा कर दिया है। बीते दिन मंगलवार को बंगाल की सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर निशा चटर्जी की JUP पार्टी से उम्मीदवारी रद्द करने की बात सामने आई थी। जिसके बाद निशा चटर्जी ने कबीर पर कई गंभीर आरोप लगाई। उन्होंने दावा किया कि उनकी उम्मीदवारी इसलिए रद्द की गई है, क्योंकि वह हिंदू ब्राह्मण समुदाय से आती हैं। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हुमायूं कबीर को लेकर तरह - तरह के सवाल उठने लगे। हालांकि, कबीर ने आरोप को खारिज करते हुए बयान दिया कि, निशा चटर्जी की निजी गतिविधियों और सोशल मीडिया तस्वीरें उनके पार्टी की छवि पर सवाल उठा सकते थे, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया।