IAF Plane In Ladakh Video: भारत ने चीन सीमा के पास अपनी सैन्य और रणनीतिक ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रूस निर्मित भारतीय वायुसेना का एक परिवहन विमान शनिवार (7 नवंबर) को लद्दाख के न्योमा एयरबेस पर सफलतापूर्वक उतरा। इसके साथ ही IAF ने विश्व में किसी भी स्थान पर सर्वाधिक ऊंचाई पर उतरने का रिकॉर्ड बनाया है। यह एयरबेस चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
वायुसेना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "भारतीय वायुसेना के आईएल-76एमडी विमान ने न्योमा में सफलतापूर्वक उतरकर इतिहास रच दिया है। यह दुनिया में इस विमान की अब तक की सर्वाधिक ऊंचाई पर की गई लैंडिंग है।" वायुसेना ने इस लैंडिंग को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे भारत की रणनीतिक हवाई परिवहन क्षमता और मजबूत होगी।
जानकारों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक विमान की लैंडिंग तक सीमित नहीं है। बल्कि इससे ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में भारत की सैन्य पहुंच, भारी सामान और सैनिकों को तेजी से पहुंचाने की क्षमता तथा वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी भी प्रदर्शित होती है।
चीन सीमा से सिर्फ 25 किलोमीटर दूर है न्योमा एयरबेस
पूर्वी लद्दाख में स्थित न्योमा एयरबेस भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह एयरबेस समुद्र तल से लगभग 13,629 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। जबकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से इसकी दूरी करीब 25 किलोमीटर बताई गई है। सामरिक महत्व के इस एयरबेस पर पिछले साल नवंबर में उड़ान परिचालन शुरू किया गया था। इस एयरबेस से लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और परिवहन विमानों का परिचालन किया जा सकता है। यह लद्दाख में इस तरह का चौथा वायुसेना अड्डा है। बाकी तीन लेह, कारगिल और थोइस में स्थित हैं। कारगिल हवाई पट्टी लगभग 10,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।
चीन सीमा के इतने करीब स्थित होने के कारण यह एयरबेस भारतीय रक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पूर्वी लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सैनिकों, सैन्य उपकरणों और जरूरी रसद को तेजी से पहुंचाने के लिए मजबूत हवाई बुनियादी ढांचा बेहद जरूरी है। न्योमा एयरबेस की मौजूदगी से इस क्षेत्र में भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलती है। यहां भारी परिवहन विमान की सफल लैंडिंग इस बात का संकेत है कि भारतीय वायुसेना कठिन परिस्थितियों में भी अपनी पहुंच और संचालन क्षमता का विस्तार कर रही है।
2.7 किलोमीटर लंबा रनवे, सैन्य लॉजिस्टिक्स को मिलेगी मजबूती
न्योमा एयरफील्ड का रनवे करीब 2.7 किलोमीटर लंबा है। इस रनवे पर IL-76MD जैसे भारी परिवहन विमान की सफल लैंडिंग को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पूर्वी लद्दाख में ऊंचाई, कम तापमान, दुर्गम पहाड़ी इलाके और चुनौतीपूर्ण मौसम के कारण सैन्य गतिविधियों को संचालित करना आसान नहीं होता। ऐसे क्षेत्रों में सड़क मार्ग से सैनिकों और सैन्य सामग्री को पहुंचाने में समय और संसाधन दोनों अधिक लग सकते हैं। ऐसे में एयरबेस की क्षमता बढ़ने से सैन्य लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिल सकती है। जरूरत पड़ने पर सैनिकों, जरूरी उपकरणों और अन्य सैन्य संसाधनों की हवाई आवाजाही अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
क्या है IL-76MD विमान की खासियत?
IL-76MD रूस में विकसित किया गया एक भारी सैन्य परिवहन विमान है। इसे बड़े आकार के सैन्य सामान, उपकरण और सैनिकों को लंबी दूरी तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। भारतीय वायुसेना इस विमान का इस्तेमाल रणनीतिक एयरलिफ्ट यानी बड़े पैमाने पर हवाई परिवहन के लिए करती है। इस तरह के विमान सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां सड़क संपर्क सीमित हो या भौगोलिक परिस्थितियां बेहद कठिन हों, वहां भारी परिवहन विमानों की उपयोगिता बढ़ जाती है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
न्योमा एयरबेस पर हुई इस लैंडिंग के तीन बड़े मायने हैं:-
जानकारों का कहना है कि न्योमा एयरबेस पर भारतीय वायुसेना की यह ऐतिहासिक लैंडिंग भारत की रक्षा तैयारियों और रणनीतिक क्षमता के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे यह संदेश भी जाता है कि भारतीय वायुसेना कठिन से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अपने अभियानों को अंजाम देने के लिए लगातार अपनी क्षमता मजबूत कर रही है।