IMD Flash Flood Alert: देश भर में सक्रिय दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। आईएमडी ने लगातार हो रही भारी मॉनसूनी बारिश के मद्देनजर देश के तीन राज्यों महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के कई हिस्सों के लिए अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान इन राज्यों के कई जिलों में मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड का खतरा मंडरा रहा है जहां बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है।
कुछ इलाकों में 200 मिमी तक बारिश हो सकती है। इससे अचानक बाढ़, जलभराव और भूस्खलन की आशंका काफी बढ़ गई है। लगातार हो रही बारिश से मिट्टी पहले ही पूरी तरह गीली हो चुकी है और नदियां उफान पर हैं। इससे इन क्षेत्रों में तेजी से बाढ़ आने की संवेदनशीलता बढ़ गई है।
पश्चिमी भारत में भारी बारिश से बढ़ा बाढ़ का खतरा
IMD के मुताबिक सबसे ज्यादा फ्लैश फ्लड का खतरा नीचे दिए गए इलाकों को है-
भारी बारिश से नदियां उफान पर
मौसम एजेंसी का कहना है कि बहुत कम समय में होने वाली बेहद तेज बारिश की वजह से नदियां, नाले और जल निकासी चैनल उफान पर आ सकते हैं। खासकर निचले इलाकों में स्थिति गंभीर हो सकती है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने और भारी बारिश के दौरान बाढ़ वाली सड़कों या नदियों के किनारों से यात्रा करने से बचने की सख्त सलाह दी है।
क्या होती है अचानक आने वाली बाढ़?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, फ्लैश फ्लड सामान्य नदी की बाढ़ से बिल्कुल अलग होती है। मौसमी नदी की बाढ़ आमतौर पर बारिश होने के 100 से 150 घंटे बाद आती है लेकिन फ्लैश फ्लड भारी बारिश के कुछ ही मिनटों या घंटों के भीतर आ सकता है। यह स्थिति तब बनती है जब जमीन पानी को सोखने की स्थिति में नहीं रहती या फिर नदियां, नाले और ड्रेनेज चैनल पूरी तरह से भर जाते हैं। तेज हवाओं की वजह से फ्लैश फ्लड अपने साथ मिट्टी, चट्टानें और मलबे को भी बहा ले आती है। अपनी बेहद तेज स्पीड और ताकत की वजह से इसे बारिश के मौसम से जुड़ी सबसे खतरनाक आपदाओं में से एक माना जाता है। ये तुरंत जानलेवा साबित हो सकती है।
IMD कैसे लगाता है फ्लैश फ्लड के खतरे का अनुमान?
मौसम विभाग द्वारा फ्लैश फ्लड की चेतावनियां जारी करने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। वैज्ञानिक इसके लिए बारिश के पूर्वानुमान, सैटेलाइट ऑब्जर्वेशन, डॉपलर वेदर रडार डेटा और हाइड्रोलॉजिकल मॉडल्स का इस्तेमाल करते हैं। वैज्ञानिक मिट्टी की नमी, नदियों के जलस्तर और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों का भी बारीकी से एनालिसिस करते हैं ताकि यह सटीक अनुमान लगाया जा सके कि तेज बारिश के बाद कहां पानी तेजी से बढ़ सकता है।
9 जुलाई तक जारी रहेगा मौसम का यह उग्र रूप
पश्चिमी भारत में वर्तमान दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है। IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के कुछ हिस्सों में 9 जुलाई तक बहुत भारी बारिश का यह दौर जारी रहेगा। इसके बाद परिस्थितियों में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है। मौसम विभाग का कहना है कि अरब सागर से मिल रही प्रचुर नमी और अनुकूल मानसूनी चक्र की वजह से मौसम का यह चरम रूप देखने को मिल रहा है।