भारत के लिए मुश्किल भरा रहेगा अगला साल! अल नीनो और ग्लोबल टेंशन बिगाड़ेंगे खेल, सुस्त पड़ जाएगी देश की आर्थिक रफ्तार

El Niño impact on Indian Monsoon: कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मौसम की मार यानी 'अल नीनो' के चलते कमजोर मानसून की आशंका भारत के विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा सकती है। यही वजह है कि ब्रोकरेज फर्म्स ने भारत के ग्रोथ रेट में सुस्ती आने की बात कही है

अपडेटेड Jun 07, 2026 पर 2:35 PM
यह मंदी की आशंका तब जताई जा रही है जब FY26 में भारत ने उम्मीद से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है

India GDP Growth FY27: भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। हाल ही में आई दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स डोलाट कैपिटल और आईसीआईसीआई ग्लोबल मार्केट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष (FY27) में देश की आर्थिक ग्रोथ सुस्त होकर 6.5 फीसदी पर आ सकती है।

माना जा रहा है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मौसम की मार यानी 'अल नीनो' (El Niño) के चलते कमजोर मानसून की आशंका भारत के विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा सकती है। यह मंदी की आशंका तब जताई जा रही है जब चालू वित्त वर्ष (FY26) में भारत ने उम्मीद से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है।

FY26 में रहा दमदार प्रदर्शन, पर अब मंडराए संकट के बादल


भारत के लिए बीता वित्त वर्ष आर्थिक मोर्चे पर बेहद शानदार रहा। घरेलू मांग, मजबूत निवेश और बेहतर कृषि पैदावार के दम पर देश की जीडीपी (GDP) 7.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी। वित्त वर्ष 2026 में सर्विस सेक्टर ने 9.3% और मैन्युफैक्चरिंग ने 10.7% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की थी।

टैक्स में राहत, घटती महंगाई और ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ने से लोगों ने जमकर खर्च किया, जिससे प्राइवेट कंजम्पशन बढ़कर 7.7% हो गया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह मजबूत आधार भी अगले साल (FY27) आने वाली बड़ी मुश्किलों को पूरी तरह से रोक नहीं पाएगा।

क्यों मुश्किल भरा रहेगा FY27? ये हैं 3 सबसे बड़े रोड़े

ब्रोकरेज रिपोर्ट्स ने उन मुख्य वजहों को उजागर किया है जो भारत के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती हैं:

महंगा कच्चा तेल: दुनिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चिंता तेल की कमी को लेकर नहीं है, बल्कि भारत में आने वाले तेल की बढ़ती लागत को लेकर है। इससे देश में महंगाई और कंज्यूमर प्राइसेज तेजी से बढ़ सकते हैं।

कमजोर एक्सपोर्ट: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक मंदी के चलते भारत के सामानों की विदेशी मांग कमजोर हो सकती है, जिससे हमारा निर्यात बुरी तरह प्रभावित होगा।

लागत में बढ़ोतरी: कंपनियों के लिए कच्चे माल और इनपुट कॉस्ट की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ेगा।

सबसे बड़ा विलेन है 'अल नीनो'

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा 'अल नीनो' के रूप में सामने आया है। यह एक ऐसा मौसमी बदलाव है जो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह गर्म होने से पैदा होता है और भारत में सूखे जैसे हालात पैदा कर देता है।

मौसम विभाग (IMD) का अनुमान है कि अल नीनो के कारण मानसून सामान्य से घटकर 90% (LPA) रह सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो डोलाट कैपिटल के मुताबिक कृषि क्षेत्र की विकास दर वित्त वर्ष 2027 में घटकर महज 1.2 फीसदी पर सिमट जाएगी।

कमजोर मानसून का मतलब है- कम फसल, जिससे फल, सब्जियां, दालें और खाद्य तेल महंगे हो जाएंगे। इससे ग्रामीण इलाकों के लोगों की कमाई घटेगी और देश में खाद्य व ऊर्जा महंगाई का संकट गहरा जाएगा।

UN की चेतावनी- 'ग्लोबल वार्मिंग की आग में घी डालेगा अल नीनो'

जलवायु विशेषज्ञों और दुनिया भर के बड़े संगठनों ने भी अल नीनो को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक वीडियो संदेश में चेतावनी देते हुए कहा है, 'दुनिया को इसे एक गंभीर क्लाइमेट वार्निंग की तरह लेना चाहिए। अल नीनो के हालात ग्लोबल वार्मिंग की आग में घी डालने का काम करेंगे। इसका असर बहुत खतरनाक, तेज और सीमाओं के पार तक होगा'।

वैसे तो भारत का मजबूत घरेलू बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च देश की ग्रोथ को 6 फीसदी से ऊपर बनाए रखेगा, लेकिन आने वाले साल में बढ़ती महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और अल नीनो की मार से निपटना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद कठिन परीक्षा साबित होने वाला है।

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