Jaswant Garh War Memorial: 1962 में नूरानांग की लड़ाई में आगे बढ़ती चीनी सेना के खिलाफ राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की बेमिसाल बहादुरी लोगों की कहानियों का एक कभी न मिटने वाला हिस्सा है। 21 साल की उम्र शहीद होने की नहीं होती है। इस उम्र में युवा अपने सपनों की नींव पर इमारत खड़ी करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं। उस उम्र में उत्तराखंड से भारत मां के एक सपूत ने अपने देश पर प्राण न्योछावर कर दिए। आखिरी सांस लेने से पहले उत्तराखंड के बरयून गांव का यह बेटा 72 घंटे तक दुश्मनों से लड़ता रहा।
इस वीर सपूत की याद में उसके गांव स्थित पुश्तैनी घर को अब सरकार म्यूजियम में तब्दील करने की तैयारी कर रही है। उत्तराखंड में गढ़वाल लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद अनिल बलूनी इस म्यूजियम के प्रोजेक्ट का 17 नवंबर 2026 को ‘भूमि पूजन’ करेंगे। इससे पहले, अरुणाचल प्रदेश में चीन से सटे सीमा क्षेत्र में भारतीय सेना ने उनके सम्मान में एक मेमोरियल बनाया है। इसी जगह 1962 की भारत-चीन जंग में उन्होंने अपने देश के लिए सबसे बड़ा बलिदान दिया था।
अरुणाचल प्रदेश में 'जसवंत गढ़ वॉर मेमोरियल' विजिटर्स और पर्यटकों को आकर्षित करता है। गढ़वाल राइफल्स की 4th बटालियन के एक सैनिक के तौर पर उनकी अनोखी कहानी दिखाने वाली एक बायोग्राफिकल मूवी '72 Hours: Martyr Who Never Died' भी बनाई गई थी। मगर, उत्तराखंड में उनके पुश्तैनी गांव में महावीर चक्र विजेता के लिए एक सही मेमोरियल की कमी रह गई थी। उम्मीद है उनके जन्मस्थान पर एक म्यूजियम बनने से उनके होम स्टेट में उनकी विरासत और मजबूत होगी। आकार में छोटा होने के बावजूद, यह क्षेत्र सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में सैनिक भेजता है।
गढ़वाल सीट से लोकसभा में भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि पौड़ी गढ़वाल के बरयून गांव में दिवंगत सैनिक के घर को एक मॉडर्न म्यूजियम बनाया जाएगा। वह 17 नवंबर को इस प्रोजेक्ट के लिए 'भूमि पूजन' करेंगे। बलूनी ने कहा कि वह शहीद सैनिक के परिवार वालों से मिले थे जिन्होंने इस पहल के लिए हां कहा और प्रोजेक्ट की तारीफ की। रावत 19 अगस्त, 1960 को 19 साल की छोटी उम्र में 4th गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे। 17 नवंबर, 1962 को जब उन्होंने अपनी जान दी, तब उनकी उम्र सिर्फ 21 साल थी।
इससे पहले सांसद बलूनी ने अपने एक्स आईडी से एक पोस्ट शेयर की जिसमें उन्होंने बताया कि वह खुद दिवंगत शहीद जसवंत सिंह के गांव पहुंचे और उनके पुश्तैनी घर को संग्रहालय में बदलने का संकल्प लिया। अपनी पोस्ट के साथ उन्होंने अपनी भावुक कर देने वाली यात्रा की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं।