Jaswant Garh War Memorial: 1962 में नूरानांग की लड़ाई में आगे बढ़ती चीनी सेना के खिलाफ राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की बेमिसाल बहादुरी लोगों की कहानियों का एक कभी न मिटने वाला हिस्सा है। 21 साल की उम्र शहीद होने की नहीं होती है। इस उम्र में युवा अपने सपनों की नींव पर इमारत खड़ी करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं। उस उम्र में उत्तराखंड से भारत मां के एक सपूत ने अपने देश पर प्राण न्योछावर कर दिए। आखिरी सांस लेने से पहले उत्तराखंड के बरयून गांव का यह बेटा 72 घंटे तक दुश्मनों से लड़ता रहा।
