JEE Advanced 2026: एससी और एसटी कैटिगरी के क्वालिफिकेशन रेट में बड़ा उछाल, महिलाओं का 6 साल का रिकॉर्ड टूटा
JEE Advanced 2026: जेईई में अनुसूचित जाति और जनजाती के छात्रों की हिस्सेदारी में बड़ा उछाल देखने को मिला है। इस मामले में महिला छात्र भी पीछे नहीं है। IIT रुड़की द्वारा शनिवार को जेआईसी की रिपोर्ट जारी की गई। इसमें साल-दर-साल छात्रों की हिस्सेदारी से जुड़े आंकड़े दिए गए हैं
MoneyControl News
अपडेटेड Oct 05, 2026 पर 1:24 PM
IIT रुड़की ने शनिवार को जॉइंट इम्प्लीमेंटेशन कमेटी (JIC) की रिपोर्ट जारी की।
JEE Advanced 2026: जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट (JEE) एडवांस्ड देश के प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी में प्रवेश का जरिया माना जाता है। यह देश की सबसे मुश्किल प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है। हाल ही में इस परीक्षा में पिछले कुछ सालों में छात्रों की हिस्सेदारी से जुड़े आंकड़े जारी किए गए हैं। IIT रुड़की ने शनिवार को जॉइंट इम्प्लीमेंटेशन कमेटी (JIC) की रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार, JEE एडवांस्ड 2026 में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवारों का क्वालिफिकेशन रेट तेजी से बढ़ा है। वहीं, सभी श्रेणियों में क्वालिफाइंग मार्क्स बढ़े हें। इसमें शामिल छह साल के समय में महिलाओं ने भी अपना सबसे ज्यादा क्वालिफिकेशन रेट दर्ज किया।
इस साल एससी क्वालिफिकेशन रेट 50.16% रहा, जो 2025 में 40.41% था, यानी 9.8 परसेंटेज पॉइंट्स की बढ़ोतरी। ST कैंडिडेट्स के लिए, यह रेट 33.99% से बढ़कर 42.14% हो गया, यानी 8.1 परसेंटेज पॉइंट्स की बढ़ोतरी। महिलाओं का क्वालिफिकेशन रेट पिछले साल के 21.7% से बढ़कर 23.4% हो गया, जो 2021 और 2026 के बीच सबसे ज़्यादा है।
इसी समय, जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफिकेशन रेट 3.2 परसेंट पॉइंट गिरकर 39.8% हो गया, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग-नॉन-क्रीमी लेयर (OBC-NCL) कैंडिडेट्स के लिए रेट 0.7 परसेंट पॉइंट गिरकर 17.5% हो गया। इस साल ज़्यादा क्वालिफाइंग मार्क्स के बावजूद ये बदलाव हुए।
SC, ST कैंडिडेट्स के लिए JEE एडवांस्ड 2026 क्वालिफिकेशन रेट बढ़ा
कुल 56,880 कैंडिडेट्स ने JEE एडवांस्ड 2026 के लिए क्वालिफाई किया। इसमें 15,856 SC कैंडिडेट्स और 6,379 ST कैंडिडेट्स शामिल थे, जबकि 2025 में यह संख्या क्रमशः 12,499 और 5,008 थी। दूसरे शब्दों में, इस साल रजिस्टर्ड हर दो में से लगभग एक SC कैंडिडेट क्वालिफाई हुआ, जबकि पांच में से दो से ज़्यादा ST कैंडिडेट्स क्वालिफाइंग लिमिट पार कर पाए।
सामान्य श्रेणी के सफल प्रतियोगियों की संख्या 2025 में 16,154 से थोड़ी कम होकर इस साल 15,883 हो गई। हालांकि, EWS क्वालिफायर 6,291 से बढ़कर 6,377 हो गए, हालांकि क्वालिफिकेशन रेट पिछले साल के 21.6% की तुलना में लगभग 21% पर स्थिर रहा। OBC-NCL क्वालिफायर 12,606 से घटकर 12,385 हो गए, और क्वालिफिकेशन रेट 18.2% से घटकर 17.5% हो गया।
JEE एडवांस्ड 2026 में सभी श्रेणी में कट-ऑफ बढ़ा
कुछ कैटेगरी के लिए क्वालिफिकेशन रेट में बढ़ोतरी कम क्वालिफाइंग मार्क्स की वजह से नहीं हुई। JEE एडवांस्ड 2026 में क्वालिफाइंग लिमिट सभी कैटेगरी में बढ़ी। कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) कट-ऑफ 2025 में 74 से बढ़कर 360 में से 92 मार्क्स हो गई, यानी 18 मार्क्स की बढ़ोतरी।
CRL, कैंडिडेट के टोटल मार्क्स के आधार पर ओवरऑल मेरिट लिस्ट है, चाहे कैटेगरी कोई भी हो। JIC रिपोर्ट में बताया गया है कि हर कैटेगरी में मौजूद सीटों की संख्या के मुकाबले कम से कम दोगुने कैंडिडेट क्वालिफाई करें, यह पक्का करने के लिए जहा जरूरी था, क्वालिफाइंग क्राइटेरिया में ढील दी गई थी। रिपोर्ट में कैटेगरी के हिसाब से बदलावों को खास तौर पर कैंडिडेट की परफॉर्मेंस या कैंडिडेट पूल की बनावट में अंतर के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया।
महिलाओं की सफलता दर छह साल के शीर्ष पर
महिलाओं ने भी परीक्षा में काफी सुधार किया। JEE एडवांस्ड 2026 के लिए पंजीकरण कराने वाली 43,112 महिलाओं में से 40,562 दोनों पेपर में शामिल हुईं और 10,107 क्वालिफाई हुईं। सफलता दर 2025 में 21.7% से बढ़कर 23.4% हो गया, जिसका मतलब है कि इस साल पंजीकृत चार में से लगभग एक महिला कैंडिडेट क्वालिफाई हुई।
महिलाओं का पंजीकरण 2025 में दर्ज 43,413 से थोड़ा कम था। इसके बावजूद, रिपोर्ट में शामिल 2021-2026 के समय में क्वालिफिकेशन रेट अपने शीर्ष पर पहुंच गया।
फाइनल IIT सीट अलॉटमेंट में 3,814 महिलाएं थीं, जो अलॉट की गई 18,861 सीटों का लगभग 20.2% थीं। इनमें से 37 महिलाओं को जेंडर-न्यूट्रल पूल से सीटें मिलीं, जबकि 3,777 को सिर्फ महिलाओं के लिए सुपरन्यूमरेरी सीटों से एडमिशन मिला।
IIT में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए 2018 में फीमेल सुपरन्यूमरेरी सीट सिस्टम शुरू किया गया था। यह पुरुष कैंडिडेट्स के लिए उपलब्ध सीटों की संख्या को कम किए बिना महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें देता है। इसका मकसद महिलाओं का प्रतिनिधित्म 20% तक ले जाना है। स्कीम शुरू होने से पहले, IIT में BTech स्टूडेंट्स में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 7% से 9% थी। बाद में 2020 तक उनकी हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 20% हो गई और उसी लेवल के आसपास बनी हुई है।