पटना की 40 साल पुरानी बहादुरपुर हाउसिंग कॉलोनी बनेगी 18 मंजिला हाईटेक टाउनशिप, फ्लैट बनने तक किराया भी मिलेगा
बहादुरपुर सेक्टर-6 स्थित बिहार राज्य आवास बोर्ड की पुरानी बहादुरपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का रूप बदलने की तैयारी है। बोर्ड पुरानी कॉलोनी का स्व-वित्तपोषित पुनर्विकास करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) के साथ समझौता ज्ञापन किया जाएगा।
MoneyControl News
अपडेटेड Oct 05, 2026 पर 12:54 PM
बहादुरपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बने एलआईजी और एमआईजी फ्लैट 40 साल से ज्यादा पुराने हैं।
राजधानी पटना के बहादुरपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिनों में तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। चार दशक से ज्यादा पुरानी जर्जर इमारतों की जगह अब ऊंची-ऊंची गगनचुम्बी इमारतें नजर आएंगी। सिर्फ मकान ही नहीं बदलेंगे, बल्कि पूरी कॉलोनी का रूप ही बदलने की तैयारी है। यहां आधुनिक टाउनशिप विकसित की जाएगी, जहां रहने के साथ खरीदारी, इलाज, पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों की सुविधाएं भी परिसर के भीतर मिलेंगी।
बहादुरपुर सेक्टर-6 स्थित बिहार राज्य आवास बोर्ड की पुरानी कॉलोनी का स्व-वित्तपोषित पुनर्विकास किया जाएगा। इसके लिए नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) के साथ समझौता ज्ञापन किया जाएगा। मंत्रिपरिषद ने इस संबंध में आवास बोर्ड को एनबीसीसी के साथ एमओयू करने और योजना से जुड़े जरूरी फैसले लेने के लिए अधिकृत कर दिया है।
जर्जर फ्लैटों की जगह बनेंगे 18 मंजिला टावर
बहादुरपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बने एलआईजी और एमआईजी फ्लैट 40 साल से ज्यादा पुराने हैं। समय के साथ इनकी हालत जर्जर हो चुकी है और कॉलोनी के कई हिस्सों में अतिक्रमण की समस्या भी सामने आई है। एलआईजी पार्क के आस पास भी स्थिति बेहद खराब है। पार्क के चारों तरफ जर्जर घर और पूरे सड़क पर अतिक्रमण दिखाई देता है। बिल्डिंग के बाहर भी छोटे छोटे घर बने हुए हैं। पूरे इलाके में बिल्डिंग तो कई मंजिला हैं लेकिन बेहद जर्जर स्थि में है। बाहर से लेकर अंदर तक ऐसी ही स्थिति है।
इस योजना के तहत पुराने बिल्डिंग के ढांचे को तोड़कर उसी जगह नई और हुमंजिला इमारतें बनाई जाएंगी। पयह टावर 18 मंजिल तक होने की योजना है। यानी जहां अभी पुरानी और जर्जर इमारतें दिखाई देती हैं, वहां आने वाले समय में आधुनिक आवासीय परिसर नजर आएगा।
नया घर बनने तक कहां रहेंगे पुराने लोग?
पुनर्विकास के दौरान सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि मौजूदा निवासी कहां रहेंगे। योजना में इसका भी प्रावधान किया गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक नए फ्लैट तैयार होने तक वर्तमान में रह रहे वैध आवास धारकों को बाहर रहने के लिए तय किराया भत्ता दिया जाएगा। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है, ताकि निर्माण के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी हो।
जब नए टावर बनकर तैयार हो जाएंगे, तो पुराने आवंटियों को प्राथमिकता के आधार पर फ्लैट दिए जाएंगे। इसके बाद जो फ्लैट बचेंगे, उन्हें आम लोगों के लिए खुले बाजार में बेचा जाएगा। फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती स्टेज में है। धीरे धीरे कई दूसरे जानकारी भी सामने आयेंगे।
सिर्फ फ्लैट नहीं, पूरी टाउनशिप होगी
इस परियोजना की खास बात यह होगी कि यहां केवल घर बनाकर कॉलोनी को छोड़ने की योजना नहीं है। इसे इंटीग्रेटेड टाउनशिप की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। परिसर में स्कूल, अस्पताल, मैरिज हॉल, बैंक और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए रिटेल मार्केट, एटीएम और क्लिनिक भी परिसर के अंदर उपलब्ध होंगे।
पार्क से जिम और सोलर सिस्टम तक
नई टाउनशिप में आधुनिक सुविधाओं पर भी जोर दिया जाएगा। मल्टीलेवल पार्किंग, सोलर एनर्जी सिस्टम, 24 घंटे जलापूर्ति और आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। लोगों के लिए वॉकवे, ग्रीन पार्क, कम्युनिटी सेंटर और जिम जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। यानी पुरानी कॉलोनी की जगह ऐसा परिसर तैयार करने की योजना है, जहां आवास के साथ जीवनशैली से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही जगह मिल सकें।
भूतनाथ रोड मेट्रो स्टेशन के पास होगी नई टाउनशिप
कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण होगी। प्रस्तावित परिसर भूतनाथ रोड मेट्रो स्टेशन के करीब है। ऐसे में मेट्रो के जरिए शहर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच आसान होगी। इसके अलावा, यह इलाका बायपास से भी बेहद नजदीक है। राजेन्द्रनगर टर्मिनल से भी दूरी अधिक नहीं है।
सेक्टर 5 में 8.5 एकड़ जमीन पर भी परियोजना
बहादुरपुर में सिर्फ सेक्टर 6 की पुरानी कॉलोनी ही नहीं, बल्कि सेक्टर-5 में टीवी टावर के पास आवास बोर्ड की करीब 8.5 एकड़ जमीन पर भी स्व-वित्तपोषित परियोजना विकसित करने का रास्ता साफ हुआ है। इस परियोजना के लिए भी एनबीसीसी के साथ एमओयू किया जाएगा। मंत्रिपरिषद ने योजना जुड़े आवश्यक निर्णय लेने के लिए बिहार राज्य आवास बोर्ड को अधिकृत किया है। इस योजना को लेकर वहां के लोगों में भी खुशी है। स्थानीय अरुण सिन्हा ने बताया कि अगर सरकार इस तरह की प्लानिंग कर रही है तो यह हमारे लिए अच्छी खबर है. मौजूदा बिल्डिंग बाहर से लेकर अंदर तक जर्जर हो चुका है। हमेशा खतरा बना रहता है।