झीरम घाटी नक्सली हमला: NIA कोर्ट ने 10 माओवादियों को दी मौत की सजा, 2013 में हुई थी 27 लोगों की हत्या

Jhiram Ghati Attack: छत्तसीगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर शहर की एक विशेष NIA कोर्ट ने बुधवार को 10 माओवादियों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। इन सभी को 2013 के झीरम घाटी हमले में कथित भूमिका के लिए आपराधिक साजिश और हत्या का दोषी पाया गया है।

अपडेटेड Sep 17, 2026 पर 10:26 AM
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झीरम घाटी हमले में बड़ा फैसला, 10 माओवादियों को फांसी की सजा

Jhiram Ghati Attack: छत्तसीगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर शहर की एक विशेष NIA कोर्ट ने बुधवार को 10 माओवादियों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। इन सभी को 2013 के झीरम घाटी हमले में कथित भूमिका के लिए आपराधिक साजिश और हत्या का दोषी पाया गया है।

बता दें कि 2013 में हुए इस हमले में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के हथियारबंद सदस्यों ने कांग्रेस के काफिले को घेरकर हमला किया था। इस हमले में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई थी और राज्य में कांग्रेस का लगभग पूरा नेतृत्व खत्म हो गया था। हमले में करीब 38 लोग घायल भी हुए थे।

NIA के जज अजय सिंह राजपूत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की कई धाराओं के तहत दोषी माना। कोर्ट ने IPC की धारा 120-B के तहत आपराधिक साजिश और धारा 302 के तहत हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई।


10 आरोपियों को सजा, 28 की तलाश जारी

जिन 10 लोगों को दोषी ठहराया गया है उनमें प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ ​​मुन्ना, सुमिता उर्फ ​​पुनेम मोडियम, मुक्का मांडवी, कोसा कवासी उर्फ ​​कोसाराम, आयता मरकाम, मदकामी देवा, जोगा मदकामी, बनजामी सन्ना उर्फ ​​चमरू और महादेव नाग शामिल हैं। 11वें आरोपी की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि अन्य 28, जिनका नाम आरोपपत्र में आरोपी के रूप में नामित किया गया था, को वांछित के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

इस मामले में जिन प्रमुख माओवादियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, लेकिन जिन्हें 'वॉन्टेड' (फरार) आरोपी दिखाया गया है, उनमें थिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​देवूजी शामिल हैं। वे CPI (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य थे और उन्होंने इस साल फरवरी में तेलंगाना में सरेंडर किया था। इनके अलावा बारसे देवा भी शामिल हैं, जिन्होंने माडवी हिडमा की जगह PLGA बटालियन 1 के कमांडर का पद संभाला था और इस साल जनवरी में सरेंडर किया था। साथ ही, गणेश उइके का नाम भी है, जो CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य थे और दिसंबर 2025 में ओडिशा में हुई एक मुठभेड़ में मारे गए थे।

सलवा जुडूम के सूत्रधार भी मारे गए लोगों में शामिल

झिरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था, जब 150 से ज्यादा माओवादियों ने कांग्रेस की 'परिवर्तन रैली' के काफिले पर घात लगाकर हमला किया और कई लोगों की हत्या कर दी। मारे गए लोगों में महेंद्र कर्मा भी शामिल थे, जिन्होंने माओवाद-विरोधी प्रतिबंधित मिलिशिया 'सलवा जुडूम' को शुरू करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके अलावा, राज्य कांग्रेस प्रमुख नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक उदय मुदलियार भी इस हमले में मारे गए।

जांचकर्ताओं के अनुसार, बस्तर और सुकमा जिलों की सीमा के पास हुए इस हमले का मुख्य निशाना कर्मा ही थे।

NIA की चार्जशीट के मुताबिक, यह हमला प्रतिबंधित CPI (माओवादी) के 'टैक्टिकल काउंटर-ऑफेंसिव कैंपेन' (TCOC) के तहत बहुत सोच-समझकर प्लान किया गया था। इसमें कहा गया है कि माओवादी कमांडरों ने 2013 की शुरुआत में हुई बैठकों में "वर्ग-दुश्मनों" को निशाना बनाने की साजिश रची थी, जिसमें खास तौर पर कर्मा को निशाना बनाया गया।

पहले लैंडमाइन ब्लास्ट, फिर गोलियों और ग्रेनेड से हमला

माओवादियों ने एक लाल बोलेरो गाड़ी के नीचे लैंडमाइन धमाका किया, जिससे 5 फीट गहरा गड्ढा बन गया और एक ट्रक के रुक जाने से रास्ता बंद हो गया। उन्होंने आसपास की पहाड़ियों से, फंसे हुए 20 गाड़ियों के काफिले पर लगभग दो घंटे तक अंधाधुंध गोलियां बरसाईं और ग्रेनेड फेंके।

हमले में मारे गए 27 लोगों में 10 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, माओवादियों ने मौके से एक 9 एमएम पिस्तौल, उसकी दो मैगजीन और 20 कारतूस भी लूट लिए थे। इसके अलावा उन्होंने दो AK-47 राइफल, 14 मैगजीन, 455 कारतूस, 10 हैंड ग्रेनेड और संचार उपकरण भी लूटे थे।

हमले के दो दिन बाद NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी। इसके बाद 25 सितंबर 2014 को NIA ने जगदलपुर की स्पेशल कोर्ट में गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

वहीं, 28 सितंबर 2015 को NIA ने इस मामले में 30 और आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान इनमें से एक की मौत हो गई। वहीं, चार्जशीट में नामजद कम से कम 28 अन्य आरोपी अब भी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

बता दें कि मुकदमे की सुनवाई एक दशक से ज्यादा समय तक चली और इसमें कम से कम 294 बार सुनवाई हुई। इस महीने अंतिम बहस पूरी होने के बाद, NIA कोर्ट ने 5 सितंबर को अपना फैसला सुनाया और उसके बाद बुधवार को सजा की अवधि तय की।

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