Kanwar Yatra 2026: मीट-शराब की दुकानें बंद, ड्रोन से होगी निगरानी... कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी सरकार का मेगा प्लान, जानें- बड़ी बातें

Kanwar Yatra 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रावण मास (30 जुलाई से 11 सितंबर) के दौरान होने वाली कांवड़ यात्रा 2026 के लिए व्यापक प्रशासनिक, सुरक्षा और सामाजिक-राजनीतिक कदम उठाए हैं। कांवड़ यात्रा रूट्स पर मांस और शराब की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। ताकि धार्मिक पवित्रता बनी रहे और किसी भी संभावित विवाद से बचा जा सके

अपडेटेड Jul 21, 2026 पर 4:36 PM
Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा को लेकर यूपी सरकार की तरफ से खास तैयारी की गई है

Kanwar Yatra 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा 2026 को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक मैनेजमेंट, धार्मिक माहौल बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार ने कांवड़ यात्रा रूट्स पर मीट और शराब की दुकानों को बंद रखने का फैसला किया है। जबकि संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन और CCTV कैमरों से निगरानी की जाएगी।

इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होगी। सावन माह में लाखों शिवभक्त हरिद्वार और अन्य गंगा घाटों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे। यह यात्रा 11 सितंबर तक चलेगी।

दुकानों पर नाम लिखने की मांग


शाहजहांपुर में विश्व हिंदू महासंघ ने प्रशासन से मांग की है कि कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों पर मालिकों के नाम स्पष्ट रूप से लिखा जाए। संगठन ने यात्रा अवधि के दौरान मीट और मछली की दुकानों को बंद रखने की भी अपील की है।

हालांकि, दुकानों की पहचान को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। जबकि आलोचकों का मानना है कि इससे सामाजिक भेदभाव की आशंका पैदा हो सकती है।

'जीरो इंसिडेंट, जीरो एक्सीडेंट' का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस बार कांवड़ यात्रा के लिए 'जीरो इंसिडेंट, जीरो एक्सीडेंट' का लक्ष्य तय किया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने और श्रद्धालुओं के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने के निर्देश दिए हैं।

ड्रोन और CCTV से होगी निगरानी

कांवड़ यात्रा के दौरान संवेदनशील इलाकों, प्रमुख चौराहों, धार्मिक स्थलों और कांवड़ मार्गों पर ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी और जहां कांवड़ मार्ग सामान्य यातायात से मिलता है, वहां विशेष सुरक्षा व्यवस्था रहेगी।

श्रद्धालुओं के लिए स्पेशल सुविधाएं

सरकार ने यात्रा रूट्स पर एम्बुलेंस, मेडिकल टीमें, पेयजल, शौचालय, बिजली और अस्थायी विश्राम स्थलों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा ट्रैफिक डायवर्जन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है। ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। राज्य सरकार का कहना है कि इन सभी इंतजामों का उद्देश्य कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाना है।

प्रशासनिक निर्देश और प्रतिबंध की बड़ी बातें

मांस और शराब पर रोक: कांवड़ यात्रा मार्गों पर मांस और शराब की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा, ताकि धार्मिक पवित्रता बनी रहे और किसी भी संभावित विवाद से बचा जा सके।

दुकानों पर नाम का बोर्ड: संगठनों और स्थानीय निकायों ने यात्रा मार्गों पर स्थित दुकानों के बाहर मालिकों और संचालकों के नाम स्पष्ट रूप से लिखने की मांग की है। इसके पक्ष में पारदर्शिता और यात्रियों की सुविधा का तर्क दिया जा रहा है, जबकि आलोचक इसे सामाजिक भेदभाव से जोड़कर देख रहे हैं।

लक्ष्य: यूपी पुलिस और डीजीपी राजीव कृष्णा ने पश्चिमी यूपी के प्रमुख जिलों (मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बागपत, हापुड़ और बुलंदशहर) में "जीरो इंसिडेंट, जीरो एक्सीडेंट" (शून्य घटना, शून्य दुर्घटना) का लक्ष्य तय किया है।

हाई-टेक निगरानी: संवेदनशील स्थानों और प्रमुख चौराहों पर ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और रीयल-टाइम कंट्रोल रूम के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

अंतर-राज्यीय समन्वय: भारी भीड़ और यातायात को सुचारू रूप से संभालने के लिए पड़ोसी राज्यों (दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा) की पुलिस के साथ मिलकर समन्वय बनाया गया है।

नागरिक और यात्री सुविधाएं: हरिद्वार से दिल्ली/एनसीआर को जोड़ने वाले हाईवे पर व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन (यातायात परिवर्तन) लागू किए जाएंगे।

मेडिकल सुविधाएं: प्रमुख मार्गों पर मेडिकल कैंप, आपातकालीन एम्बुलेंस, पीने के पानी की व्यवस्था, मोबाइल शौचालय और अस्थायी विश्राम स्थल (कांवड़ शिविर) स्थापित किए जा रहे हैं।

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