भारत में इस साल मानसून सामान्य से काफी कमजोर रह सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने पहले अनुमान को घटाते हुए कहा है कि जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश सामान्य से सिर्फ 90% रहने की संभावना है। अप्रैल में विभाग ने 92% बारिश का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसे कम कर दिया गया है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो 2015 के बाद यह देश का सबसे सूखा मानसून सीजन हो सकता है। 2015 में देश में सामान्य से सिर्फ 86% बारिश हुई थी। पिछले 20 सालों में केवल 2009, 2014 और 2015 ऐसे साल रहे हैं जब मानसून की बारिश 90% से नीचे रही थी।
मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार बारिश कम होने की सबसे बड़ी वजह एल नीनो (El Nino) हो सकता है। यह प्रशांत महासागर में बनने वाली एक मौसमीय स्थिति है, जो भारत में मानसून को कमजोर कर देती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल एल नीनो काफी मजबूत हो सकता है और इसका असर अगले साल तक भी रह सकता है।
IMD के अनुसार जून में एल नीनो का असर कमजोर रहेगा, लेकिन जुलाई और अगस्त में यह मध्यम स्तर का और सितंबर में काफी मजबूत हो सकता है। दूसरी ओर, इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) से भी ज्यादा मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। पहले माना जा रहा था कि IOD सकारात्मक हो सकता है, जिससे एल नीनो के असर को कुछ हद तक संतुलित किया जा सके, लेकिन अब इसके पूरे मानसून सीजन में सामान्य रहने की संभावना जताई गई है।
पिछले कुछ साल भारत के लिए मानसून के लिहाज से अच्छे रहे हैं। पिछले सात वर्षों में से पांच बार सामान्य से ज्यादा बारिश हुई थी। ऐसे में इस साल का कमजोर मानसून उस अच्छे दौर को खत्म कर सकता है।
हालांकि, फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। पिछले साल अच्छी फसल और अच्छी बारिश की वजह से देश के अनाज भंडार और जलाशयों में पर्याप्त पानी मौजूद है। इससे तुरंत कोई बड़ा संकट पैदा होने की संभावना कम है।
फिर भी कम बारिश का असर खेती, बिजली उत्पादन, पीने के पानी और उद्योगों पर पड़ सकता है। खासकर रबी फसलों के लिए एल नीनो बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि जून में सामान्य से कम बारिश होने के साथ-साथ देश के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में हीटवेव के दिन 2 से 3 दिन ज्यादा रह सकते हैं।
कुल मिलाकर, इस साल मानसून कमजोर रहने और गर्मी ज्यादा पड़ने की आशंका है, जिससे किसानों और आम लोगों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।