मखाना, सत्तू और बहुत कुछ... BRICS Summit में दिखी ‘Vocal for Local’ की झलक, जानें Media Kit में क्या-क्या है?

BRICS Summit Media Kit: नई दिल्ली में हो रहा 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन दुनिया की कुछ सबसे ताकतवर उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ ला रहा है, लेकिन इस सम्मेलन की कवरेज करने वाले पत्रकारों को दी गई मीडिया किट एक बिल्कुल अलग वजह से चर्चा में है – और वह वजह है इसका खास भारतीय अंदाज।

अपडेटेड Sep 12, 2026 पर 1:15 PM
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BRICS Summit की Media Kit बनी चर्चा का विषय

BRICS Summit Media Kit: नई दिल्ली में हो रहा 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन दुनिया की कुछ सबसे ताकतवर उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ ला रहा है, लेकिन इस सम्मेलन की कवरेज करने वाले पत्रकारों को दी गई मीडिया किट एक बिल्कुल अलग वजह से चर्चा में है – और वह वजह है इसका खास भारतीय अंदाज।

सोशल मीडिया पर इस मीडिया किट को "वोकल फॉर लोकल" (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने) की पहल बताया जा रहा है, क्योंकि भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को दिए जा रहे इस पैकेज में देश के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए उत्पादों को शामिल किया गया है।

पत्रकार सिद्धांत सिब्बल ने ब्रिक्स दिल्ली समिट की मीडिया किट को "चर्चा का विषय" बताया। उन्होंने "वोकल फॉर लोकल" (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाली) पहल के तहत शामिल एक बैग का जfक्र किया, जिसमें बिहार का मखाना और सत्तू, ओडिशा की कोरापुट कॉफी और गुजरात के हैंडीक्राफ्ट्स (हाथ से बनी चीजें) शामिल थे। एक और पोस्ट में सिबल ने बताया कि समिट की कवरेज करने वाले देश-विदेश के पत्रकारों के लिए तैयार मीडिया किट में "मखाना (फॉक्स नट) और गुजरात के हैंडीक्राफ्ट्स" भी शामिल थे।


मीडिया किट में अलग-अलग राज्यों के सामान को शामिल करने से इसे एक खास भारतीय और क्षेत्रीय पहचान मिलती है।

मीडिया किट में अलग-अलग राज्यों के उत्पादों को शामिल करने से एक मजबूत क्षेत्रीय पहचान मिलती है। बिहार का सत्तू (भुने हुए चने के आटे से बनी पारंपरिक चीज) और मखाना (फॉक्स नट्स) ऐसे दो उत्पाद हैं जो राज्य की खान-पान और खेती-बाड़ी की विरासत का अहम हिस्सा बन गए हैं। जबकि ओडिशा के पहाड़ी इलाकों में उगाई जाने वाली कोरापुट कॉफी, भारत के एक ऐसे उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाती है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

वहीं, गुजरात की हस्तकलाएं भारत की पारंपरिक कारीगरी और खान-पान की विविधता को एक साथ पेश करते हुए इसमें एक खास कारीगरी की झलक दिखाते हैं।

न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, BRICS समिट में मीडिया किट बैग उच्च-स्तरीय कूटनीति के साथ-साथ "भारत की समृद्ध पाक-कला परंपराओं, स्थानीय उत्पादों और कारीगरी के हुनर" को भी सामने लाता है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 12-13 सितंबर को होने वाले समिट से पहले, विदेश मंत्रालय (MEA) की मीडिया किट भारत और दुनिया भर के पत्रकारों को "भारत की जीवंत सांस्कृतिक विविधता का अनुभव" कराती है।

इस पैकेज में सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) का पहलू भी शामिल है। सिब्बल ने खास तौर पर "रीपरपज्ड बैग" (दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार बैग) का जिक्र किया, जबकि पत्रकार सुहासिनी हैदर ने विदेश मंत्रालय और इंडियन डिप्लोमेसी का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि यह बैग #BRICS2026 की उन सभी यादों को संजोने के लिए एक सोच-समझकर बनाया गया "रीपरपज्ड बैग" है, जिन्हें समिट के बाद मीडिया अपने साथ ले जाएगा!

हैदर ने इसमें शामिल अधिकारियों की भी तारीफ की और लिखा, "हम अक्सर ऐसा कहते नहीं हैं, लेकिन टीम XP जबरदस्त है।"

हो सकता है कि मीडिया किट उस समिट का एक छोटा सा हिस्सा हो, जिसमें जियोपॉलिटिक्स, ट्रेड और 'ग्लोबल साउथ' जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही हो। लेकिन इसमें मौजूद चीज़ें यह बताती हैं कि भारत की ग्लोबल कहानी सिर्फ उसकी आर्थिक या रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बारे में नहीं है। बल्कि यह उसके किसानों, कारीगरों, क्षेत्रीय खान-पान की परंपराओं और स्थानीय उत्पादों के बारे में भी है।

बता दें कि दुनिया भर के पत्रकारों को सत्तू, मखाना, कोरापुट कॉफ़ी और गुजरात के हैंडीक्राफ्ट्स देकर, ब्रिक्स समिट असल में एक साधारण सी मीडिया किट को भारत की 'वोकल फॉर लोकल' मुहिम को दिखाने का जरिया बना रहा है।

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