Monsoon Advancement in UP: यूपी में हो गई मानसून की एंट्री, 30 जून को आजमगढ़, अयोध्या, बरेली से गुजर रहा, IMD ने दिया ये अलर्ट

Monsoon Advancement in UP: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से 30 जून को जारी ताजा आधिकारिक बयान के मुताबिक मानसून उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कुछ और इलाकों, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के शेष हिस्सों, उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों और हिमाचल प्रदेश व लद्दाख के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है

अपडेटेड Jun 30, 2026 पर 1:31 PM
Monsoon Advancement in UP: मानसून बारिश की वजह से यूपी के किसानों को बड़ी राहत मिली है

Monsoon Advancement in UP: उत्तर प्रदेश के निवासियों और किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से 30 जून को जारी ताजा आधिकारिक बयान के मुताबिक मानसून उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कुछ और इलाकों, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के शेष हिस्सों, उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों और हिमाचल प्रदेश व लद्दाख के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है।

यूपी के इन शहरों से गुजर रही है मानसून की सीमा

मौसम विभाग के मुताबिक, 30 जून को मानसून की उत्तरी सीमा उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा सूरत, इंदौर, सागर, सिद्धी, आजमगढ़, अयोध्या, बरेली, देहरादून, मंडी से होकर गुजर रही है।


अगले 2-3 दिनों के लिए IMD का पूर्वानुमान और अलर्ट

मौसम विभाग (IMD) ने आगामी दिनों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का संकेत दिया है। अगले 2 से 3 दिनों के दौरान मानसून के और आगे बढ़ने के लिए स्थितियां पूरी तरह से अनुकूल बनी हुई हैं। इस दौरान मानसून उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, पूरे दमन और दीव, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के शेष हिस्सों, पूरे जम्मू-कश्मीर, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली और पंजाब के अधिकांश हिस्सों और राजस्थान के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगा।

सुस्त मानसून का खरीफ फसलों की बुआई पर असर

मानसून की इस एंट्री से कृषि क्षेत्र को बड़ी उम्मीदें हैं क्योंकि इस साल मानसून की धीमी गति और देरी से शुरुआत के कारण देश में धान सहित खरीफ फसलों की बुआई काफी पिछड़ गई है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जून तक देश में कुल खरीफ बुआई का रकबा 182.72 लाख हेक्टेयर रहा है।

यह पिछले साल की समान अवधि के 236.46 लाख हेक्टेयर की तुलना में 23 प्रतिशत कम है। मुख्य खरीफ फसल धान का रकबा 25.17 प्रतिशत घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर रह गया है। ये पिछले साल 34.41 लाख हेक्टेयर था। दालों की बुआई में 30.47 प्रतिशत की गिरावट आई है (14.92 लाख हेक्टेयर बनाम 21.46 लाख हेक्टेयर)। इसमें तुअर/अरहर की बुआई पिछले साल के 8.45 लाख हेक्टेयर के मुकाबले केवल 3.56 लाख हेक्टेयर हुई है।

वहीं तिलहन का रकबा 53.33 प्रतिशत भारी गिरावट के साथ 16.99 लाख हेक्टेयर (पिछले साल 36।41 लाख हेक्टेयर) रह गया है। इसमें मूंगफली का रकबा गिरकर 8.87 लाख हेक्टेयर और सोयाबीन का रकबा घटकर 6.92 लाख हेक्टेयर पर आ गया है। मोटे अनाज का रकबा घटकर 31.84 लाख हेक्टेयर और कपास की बुआई 34.61 प्रतिशत घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गई है।

इस गिरावट के बीच गन्ने के रकबे में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है और यह 56.64 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। जबकि जूट और मेस्टा का रकबा भी 6.13 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 6.25 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।

अल नीनो का खतरा और जलाशयों की वर्तमान स्थिति क्या है?

मौसम विभाग के मुताबिक 24 जून तक दक्षिण-पश्चिम मानसून देश भर में सामान्य से 42 प्रतिशत नीचे दर्ज किया गया था। इसमें सबसे ज्यादा कमी मध्य भारत (59 प्रतिशत की कमी) में देखी गई थी। इसके बाद पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 41 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीप में 28 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

इस कमी की मुख्य वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मौजूद अल नीनो की स्थितियां हैं। इसके जून-सितंबर मानसून सीजन के दौरान और मजबूत होने की आशंका है। इसके अलावा केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा निगरानी किए जाने वाले 166 महत्वपूर्ण जलाशयों में लाइव स्टोरेज क्षमता 25 जून तक 48.405 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) थी। ये कुल क्षमता का सिर्फ 26.37 प्रतिशत है। यह पिछले साल के भंडारण का 73.21 प्रतिशत और सामान्य स्तर का 105.67 प्रतिशत है।

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कुल 166 जलाशयों में से 55 जलाशय ऐसे हैं जहां भंडारण सामान्य क्षमता का 80 प्रतिशत या उससे कम है। इनमें से 29 जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य क्षमता के 50 प्रतिशत या उससे भी कम रह गया है। ऐसे में यूपी में मानसून के इस नए एडवांसमेंट से आने वाले दिनों में पानी की किल्लत दूर होने और खेती को गति मिलने की उम्मीद है।

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