Nalanda University: ज्ञान की धरती बिहार में एक और कमाल! नालंदा यूनिवर्सिटी में रामायण और महाभारत से कूटनीतिक सबक सीख रहे विदेशी छात्र
Nalanda University News: इस वक्त बिहार की विश्व विख्यात विश्वविद्यालय नालंदा यूनिवर्सिटी की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। विश्व प्रसिद्ध नालंदा यूनिवर्सिटी में दुनिया के 30 से ज्यादा देशों के छात्र पढ़ते हैं। यूनिवर्सिटी में इस वक्त विदेशी छात्र रामायण और महाभारत से कूटनीतिक सबक सीख रहे हैं
Nalanda University News: नालंदा यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्र रामायण और महाभारत से कूटनीतिक सबक सीख रहे
Nalanda University News: होर्मुज स्ट्रेट संकट के बाद भगवान राम भारत को किस तरह पेश करते? या फिर अमेरिका, चीन और रूस के साथ भारत के रिश्तों पर भगवान कृष्ण क्या सलाह देते? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर इस वक्त बिहार की विश्व विख्यात विश्वविद्यालय नालंदा यूनिवर्सिटी में चर्चा हो रही है। विश्व प्रसिद्ध नालंदा यूनिवर्सिटी में दुनिया के 30 से ज्यादा देशों के छात्र पढ़ते हैं। 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक यह यूनिवर्सिटी अपने खास पोस्टग्रेजुएट कोर्स 'इंटरनेशनल रिलेशन्स एंड पीस स्टडीज' (IRPS) के जरिए इन सवालों के जवाब तलाश रही है। माना जाता है कि यह अपनी तरह का पहला कोर्स है।
इस कोर्स में रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों और भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर रिसर्च की जाती है। ताकि आज के अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति से जुड़ी समस्याओं का समाधान मिल सके। नालंदा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सचिन चतुर्वेदी के मुताबिक, इस कोर्स का मकसद प्राचीन भारतीय परंपराओं को फिर से जिंदा करना और 'सार्थक बातचीत' के जरिए इन ग्रंथों को आज की वैश्विक चिंताओं से जोड़ना है।
कई नए कोर्स शुरू
नालंदा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सचिन चतुर्वेदी ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, "हाल के दिनों में यूनिवर्सिटी ने कई बौद्धिक और अलग-अलग विषयों से जुड़ी अकादमिक पहल शुरू की हैं। इनका मकसद प्राचीन भारतीय परंपराओं को फिर से जिंदा करना और आज की वैश्विक चिंताओं के संदर्भ में इन ग्रंथों पर सार्थक बातचीत करना है।"
उन्होंने आगे कहा, "हाल ही में छात्रों के कई शोध-पत्रों (dissertations) में भारतीय ज्ञान प्रणालियों के विषयों को आज के अंतरराष्ट्रीय संबंधों, नैतिकता, शासन-प्रशासन और रणनीतिक अध्ययन के संदर्भ में समझने की कोशिश की गई है। कुछ चर्चाओं में ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) सिद्धांतों और व्यापक भारतीय सभ्यता के संदर्भ में 'अर्थशास्त्र' से मिली सीख पर भी विचार-विमर्श किया गया है।"
महाभारत और रामयण पर रिसर्च
शोध-पत्रों पर एक नजर डालने से पता चलता है कि छात्र आज की वैश्विक समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्राचीन भारतीय प्रणालियों का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं। एक शोध-पत्र में प्राचीन विचारों को आज की भारतीय विदेश नीति से जोड़ने की कोशिश की गई है। वहीं, दूसरे में "सॉफ्ट पावर" (नरम शक्ति) के महत्व को समझने के लिए महाभारत का सहारा लिया गया है।
क्या बोले स्टूडेंट?
अपने शोध-पत्र 'रामायण के गठबंधनों के नजरिए से भारत की रणनीतिक साझेदारियां' में मास्टर की छात्रा सुरभि रानी लिखती हैं कि रामायण का 'किष्किंधा कांड' कूटनीति, संप्रभुता और नैतिक हस्तक्षेप को समझने के लिए एक मज़बूत ढांचा पेश करता है।"
रानी ने आगे कहा, "राम और सुग्रीव के बीच का गठबंधन सिर्फ दोस्ती की कहानी नहीं है। यह मित्र-धर्म, विश्वास, राजधर्म और धार्मिक यथार्थवाद से बनी एक असमान साझेदारी का मॉडल है…। इसलिए, राम-सुग्रीव मित्रता बिना किसी प्रभुत्व के साझेदारी, बिना किसी कब्जे के प्रभाव और जिम्मेदारी पर आधारित नेतृत्व का एक शक्तिशाली उदाहरण बन जाता है।"
वह आगे कहती हैं, "जबकि हम स्टीफन वॉल्ट और ग्लेन स्नाइडर जैसे विद्वानों के गठबंधन बनाने के तर्कों को आगे बढ़ाते हैं। हम एस. जयशंकर के भारत को 'विश्व बंधु' के रूप में देखने के सभ्यतागत दृष्टिकोण पर भी विस्तार से चर्चा करते हैं। यह रवि दत्त बाजपेयी की रामायण को रणनीतिक अंतर्दृष्टि के स्रोत के रूप में पढ़ने की समझ पर भी आधारित है। सॉफ्ट पावर, कूटनीतिक नैतिकता और भारतीय राज-काज पर व्यापक चर्चाओं पर भी। ये सभी योगदान मिलकर यह दिखाते हैं कि महाकाव्य आधुनिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए विश्लेषणात्मक संसाधनों के रूप में काम कर सकते हैं।"
भगवान कृष्ण के सॉफ्ट पावर का जिक्र
एक और IRPS शोधकर्ता प्रीति कुमारी अपने पेपर 'महाभारत: नियम-आधारित व्यवस्था' में भगवान कृष्ण द्वारा 'सॉफ्ट पावर' के इस्तेमाल पर प्रकाश डालती हैं। यह पेपर कहता है, "कृष्ण का दर्शन आधुनिक 'न्यायपूर्ण युद्ध' (Just War) की अवधारणा के 'परम आपातकाल' (Supreme Emergency) को दर्शाता है। एक ऐसा शब्द जिसे माइकल वॉल्जर ने किसी राज्य के राजनीतिक और नैतिक अस्तित्व के लिए आसन्न, जानलेवा खतरे का वर्णन करने के लिए लोकप्रिय बनाया था।"
इसमें आगे लिखा है, "जिस तरह कृष्ण ने कर्ण को युद्ध के नियम-कायदों के तहत मिलने वाली सुरक्षा से वंचित कर दिया था, क्योंकि उसने अतीत में निष्पक्ष खेल के नियमों का उल्लंघन किया था (अभिमन्यु की हत्या और द्रौपदी का अपमान), उसी तरह आधुनिक IR (अंतरराष्ट्रीय संबंध) भी उन आतंकवादी नेटवर्क या दुष्ट राज्यों को सुरक्षा देने से मना करने की चुनौती का सामना करता है, जो सशस्त्र संघर्ष के कानूनों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करते हैं। जबकि वे व्यवस्थित रूप से उन कानूनों का उल्लंघन करते हैं।"
'शास्त्रार्थ' पर भी होगी पढ़ाई
नालंदा यूनिवर्सिटी अगले साल 'शास्त्रार्थ' (बहस) जैसी पहलों को अपने अकादमिक फ्रेमवर्क (Academic Framework) में और अधिक व्यवस्थित तरीके से शामिल करने पर विचार कर रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, "जहां पश्चिमी बहसें ज्यादातर जीतने या हारने के बारे में होती हैं। वहीं इंडियन नॉलेज सिस्टम संचित ज्ञान पर आधारित रही है। रामायण, महाभारत और भारतीय ज्ञान परंपरा से प्रेरणा लेते हुए हम दुनिया को संघर्ष, शांति और वैश्विक व्यवस्था को समझने के लिए एक इंडियन नॉलेज ट्रेडिशन पेश कर रहे हैं।"