नमो भारत के 136 किमी लंबे दिल्ली-करनाल कॉरिडोर के डिजाइन की तैयारी शुरू, बनेंगे 17 स्टेशन, ये रहीं अबतक की डिटेल्स

दिल्ली और हरियाणा के बीच जाम से परेशान यात्रियों को नमो भारत कॉरिडोर से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे सफर का समय घटेगा और आवाजाही आसान होगी। अभी इस सफर में करीब साढ़े तीन से चार घंटे लगते हैं, जबकि कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी लगभग 90 मिनट में तय की जा सकेगी

अपडेटेड Oct 26, 2026 पर 3:12 PM
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कॉरिडोर का डिजाइन तैयार करने में करीब चार साल लग सकते हैं

अगर आप दिल्ली से हरियाणा हर दिन सफर करते है तो आपके लिए अच्छी खबर है। दिल्ली से हरियाणा के सोनीपत, पानीपत और करनाल जाने वाले लोगों का सफर आने वाले समय में आसान हो सकता है। करीब 136 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर में ट्रैक, स्टेशन और ट्रेनों के रखरखाव के लिए डिपो बनाए जाने की योजना है। इस परियोजना के शुरू होने से दिल्ली से करनाल तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है। इस रूट पर नमो भारत ट्रेन चलाने की योजना को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने कॉरिडोर का डिजाइन तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

दिल्ली और हरियाणा के बीच जाम से परेशान यात्रियों को नमो भारत कॉरिडोर से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे सफर का समय घटेगा और आवाजाही आसान होगी। अभी इस सफर में करीब साढ़े तीन से चार घंटे लगते हैं, जबकि कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी लगभग 90 मिनट में तय की जा सकेगी।

कहां से शुरू होगा कॉरिडोर


कॉरिडोर का डिजाइन तैयार करने में करीब चार साल लग सकते हैं। इसे दिल्ली मेट्रो से जोड़ने की भी योजना है। ये कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होगा और हरियाणा के सोनीपत, पानीपत होते हुए करनाल तक जाएगा। इस पूरे रूट पर 17 स्टेशन बनाने की योजना है। इनमें से 11 स्टेशन हरियाणा में होंगे। इस ट्रेन सेवा से दिल्ली और हरियाणा के बीच आने-जाने वाले लोगों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल स्टेशनों के नाम, उनके डिजाइन और दूसरे परिवहन साधनों से जुड़ने की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। इन सभी बातों की जानकारी डिजाइन तैयार होने के बाद स्पष्ट होगी।

मिट्टी की होगी जांच

इस परियोजना के तहत रेल ट्रैक, स्टेशन और ट्रेनों की देखभाल के लिए डिपो बनाने की योजना तैयार की जाएगी। इसमें बिजली और मशीनों से जुड़े काम भी शामिल होंगे। निर्माण शुरू करने से पहले जमीन और मिट्टी की जांच की जाएगी, ताकि पता चल सके कि वहां काम करना कितना सही रहेगा। इसके अलावा, रास्ते में आने वाली गैस पाइपलाइन और दूसरी जरूरी लाइनों को भी जरूरत के अनुसार दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।

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